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अयोध्या दुष्कर्म मामले में बुलडोजर एक्शन के बाद सियासत गरमाई, अखिलेश ने की डीएनए टेस्ट की मांग, मायावती ने किया पलटवार

Ayodhya Rape Case: सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि कुकृत्य के मामले में जिन पर भी आरोप लगा है उनका डीएनए टेस्ट कराकर इंसाफ़ का रास्ता निकाला जाए न कि केवल आरोप लगाकर सियासत की जाए। यही न्याय की मांग है।

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अयोध्या में बुलडोजर एक्शन के बाद गरमाई सियासत।

Ayodhya Rape Case: यूपी के अयोध्या में बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोपी सपा नेता की बेकरी पर बुलडोजर एक्शन के बाद सियासत शुरू हो गई है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने इस मामले में सरकार पर सियासत करने के साथ ही डीएनए टेस्ट का सुझाव दिया है तो बसपा नेता मायावती ने सपा पर ही सवाल उठाए हैं।

अयोध्या में आरोपी पर चल रही कार्रवाई सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि कुकृत्य के मामले में जिन पर भी आरोप लगा है उनका डीएनए टेस्ट कराकर इंसाफ़ का रास्ता निकाला जाए न कि केवल आरोप लगाकर सियासत की जाए। जो भी दोषी हो उसे कानून के हिसाब से पूरी सज़ा दी जाए, लेकिन अगर डीएनए के बाद आरोप झूठे साबित हों तो सरकार के संलिप्त अधिकारियों को भी न बख्शा जाए। यही न्याय की मांग है।

मायावती ने किया पलटवार

इस पर बसपा मुखिया मायावती ने पलटवार करते हुए सोशल मीडिया एक्स के माध्यम से लिखा कि यूपी सरकार द्वारा अयोध्या के गैंगरेप केस में आरोपी के विरुद्ध की जा रही सख्त कार्रवाई उचित, लेकिन सपा द्वारा यह कहना कि आरोपी का डीएनए टेस्ट होना चाहिये, इसे क्या समझा जाए? जबकि सपा को यह भी बताना चाहिए कि उनकी सरकार में ऐसे आरोपियों के खिलाफ कितने डीएनए टेस्ट हुए हैं। उन्होंने आगे लिखा कि यूपी में अपराध नियंत्रण व कानून-व्यवस्था में भी ख़ासकर महिला सुरक्षा व उत्पीड़न आदि को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अयोध्या व लखनऊ आदि की घटनाएं अति-दुखद व चिन्तित करने वाली हैं। सरकार इनके निवारण के लिए जाति-बिरादरी एवं राजनीति से ऊपर उठकर सख़्त कदम उठाए तो बेहतर है।

मोईद खान की बेकरी पर चला बुलडोजर

ज्ञात हो कि अयोध्या दुष्कर्म मामले में योगी सरकार एक्शन में है। बच्ची की मां से मुख्यमंत्री योगी की मुलाकात के 24 घंटे बाद आरोपी सपा नेता मोईद खान की बेकरी को बुलडोजर से ढहा दिया। अपर जिलाधिकारी प्रशासन अनिरुद्ध प्रताप सिंह और अयोध्या विकास प्राधिकरण के सचिव सत्येंद्र सिंह के साथ एसडीएम सोहावल अशोक सैनी की मौजूदगी में भारी पुलिस फोर्स को लेकर कार्रवाई शुरू की गई। अयोध्या विकास प्राधिकरण के सचिव सतेंद्र सिंह ने कहा कि बेकरी तालाब की जमीन पर बनी थी। जांच के बाद एक्शन लिया गया। आरोपी की अवैध संपत्तियों की जांच की जा रही है। इधर, योगी सरकार में मंत्री संजय निषाद पीड़ित बच्ची से मिलने अस्पताल पहुंचे। बाहर निकलकर वह फूट-फूटकर रोए। उन्होंने कहा कि अखिलेश का पीडीए झूठा साबित हो रहा है। लगता है कि इन अपराधियों के सहारे इनकी जीत हुई।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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