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Ajit Doval: भारत के 'जेम्स बॉन्ड' क्यों हैं अजीत डोभाल? जानें- पाकिस्तान समेत किन देशों में दुश्मनों के छक्के छुड़ाए

India NSA Ajit Doval: अजीत डोभाल ने भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा में एक अहम भूमिका निभाई है और इसी बारे में हम बात करेंगे और उनके द्वारा किए गए सफल ऑपरेशन्स की बात करें।

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भारत के 'जेम्स बॉन्ड' क्यों हैं अजीत डोभाल?

Ajit Doval Mission: अजीत डोभाल अभी भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) हैं। उनका करियर रोमांच और कामयाबियों से भरा रहा है। उन्हें अक्सर भारत का 'जेम्स बॉन्ड' कहा जाता है, उनका करियर हिम्मत भरे मिशन और खुफिया ऑपरेशन्स से भरा है, जिन्होंने भारत के हितों की रक्षा की है और अनगिनत जानें बचाई हैं। यहां डोभाल के सबसे खास मिशनों की पूरी लिस्ट दी गई है।

पाकिस्तान में भेस बदलने के मास्टर (1971-1978)

अजीत डोभाल ने पाकिस्तान में एक बिजनेसमैन के रूप में सात साल अंडरकवर बिताए और भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान जरूरी खुफिया जानकारी इकट्ठा की। इस ऑपरेशन से पाकिस्तान की मिलिट्री योजनाओं के बारे में अहम जानकारी मिली, जिससे 1971 के युद्ध के दौरान भारत की तैयारी में काफी मदद मिली।

ऑपरेशन ब्लैक थंडर (1988)

डोभाल ने गोल्डन टेंपल कॉम्प्लेक्स में जरनैल सिंह भिंडरांवाले के नेतृत्व में खालिस्तान समर्थक चरमपंथियों को खत्म करने के लिए भारतीय सेना के ऑपरेशन की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने खुद को ISI एजेंट बताया और कहा कि वह उनकी मदद करने आए हैं। एक 'कार सेवक' के रूप में अंदर जाकर एक रिक्शा चलाने वाले ने आतंकवादियों को यकीन दिलाया कि वह ISI का एजेंट है, जिसे पाकिस्तान ने खालिस्तान के मकसद में मदद करने के लिए भेजा है। वह रिक्शा चलाने वाला कोई और नहीं बल्कि अंडरकवर अजीत डोभाल थे। उन्होंने गोल्डन टेंपल के अंदर घुसकर सारी जरूरी जानकारी इकट्ठा की।

मिजो विद्रोह (1970 का दशक)

डोभाल ने एक विद्रोही नेता को अपने पक्ष में करके और उसे अपने ही गुट के खिलाफ करके मिजो विद्रोह को दबाने में अहम भूमिका निभाई। इस अपरंपरागत तरीके से संघर्ष काफी हद तक कम हो गया। 20 साल के विद्रोह के बाद, डोभाल ने 1986 के मिजो शांति समझौते में बड़ी भूमिका निभाई।

कंधार में बंधकों को छुड़ाना (1999)

जब आतंकवादियों ने इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण कर लिया था, तब डोभाल अफगानिस्तान के कंधार भेजी गई भारत सरकार की बातचीत टीम का हिस्सा थे। डोभाल ने अफगानिस्तान के कंधार में इंडियन एयरलाइंस के विमान के अपहरण के बाद कैदियों की अदला-बदली के सौदे के जरिए बंधकों को छुड़ाने में अहम भूमिका निभाई।

46 नर्सों को बचाना (2014)

2014 में NSA अजीत डोभाल एक गुप्त मिशन पर इराक गए। उन्होंने ISIS द्वारा बंधक बनाई गई 46 भारतीय नर्सों की वापसी में मदद की। सभी 46 भारतीय नर्सों को ISIS की कैद से बचाया गया। डोभाल ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई।

सर्जिकल स्ट्राइक (2016)

डोभाल को लाइन ऑफ कंट्रोल के पार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकवादी लॉन्चपैड के खिलाफ सर्जिकल हमलों की योजना बनाने के लिए व्यापक रूप से जाना जाता है, हालांकि आधिकारिक तथ्य अभी भी गुप्त हैं। 2015 में NSCN(K) से जुड़े आतंकवादियों के खिलाफ म्यांमार में सर्जिकल स्ट्राइक हुई। 2016 में उरी सर्जिकल स्ट्राइक हुई। 2019 में बालाकोट पर हवाई हमला हुआ। ये सभी NSA अजीत डोभाल के ही समझ से हुए।

कश्मीर चुनाव (1990 के दशक)

1990 के दशक में, डोभाल की मनाने की क्षमता कश्मीर में सैनिकों और आतंकवादियों को अपने हथियार डालने और 1996 के चुनावों में भाग लेने के लिए मनाने में महत्वपूर्ण थी, जिसने क्षेत्र के राजनीतिक माहौल में एक बड़ा बदलाव लाया। कुका पर्रे भारत के लिए लड़ने लगे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 2019 में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ढाका मुक्ति युद्ध (1971)

डोभाल ने बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और मुक्ति वाहिनी स्वतंत्रता सेनानियों का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ऑपरेशन गोल्डन बर्ड (1995):

नाजुक हालात को संभालने में अपनी काबिलियत दिखाते हुए डोभाल ने जम्मू और कश्मीर में अल-कायदा द्वारा बंधक बनाए गए लोगों को छुड़ाने के गुप्त मिशन की देखरेख की।

अजीत डोभाल का करियर सिर्फ एक जासूसी थ्रिलर नहीं है, यह चालाकी, बहादुरी और लीक से हटकर समस्या सुलझाने की कहानी है। नुकसान को कम करने और संघर्ष के बीच शांतिपूर्ण समाधान खोजने के प्रति उनका समर्पण, उनके गहरे लगाव और अपने साथी नागरिकों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सबूत है। हालांकि उनके योगदान की पूरी जानकारी शायद गुप्त ही रहे।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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