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मेरी ड्यूटी खत्म, अब प्लेन नहीं उड़ाऊंगा... बीच एयरपोर्ट पर यात्रियों को छोड़ चला गया Air India का पायलट

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 26, 2023, 08:13 AM IST

Air India: लंदन से दिल्ली जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-112 तीन घंटे तक जयपुर एयरपोर्ट पर ही खड़ी रही। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि फ्लाइट के पायलट ने यह कहकर प्लेन उड़ाने से इंकार कर दिया कि उसकी ड्यूटी खत्म हो चुकी है। यह कहने के बाद वह फ्लाइट से उतर गया।

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एयर इंडिया की फ्लाइट

Photo : BCCL

Air India: एयर इंडिया की फ्लाइट में इन दिनों अजीबो-गरीब घटनाएं सामने आ रही हैं। कभी पैसेंजर क्रू मेंबरों के साथ गलत व्यवहार कर रहे हैं तो कभी एयर इंडिया के स्टाफ के कारण खूब फजीहत हो रही है। अब एक और नया मामला सामने आया है, जिसके कारण एयर इंडिया को यात्री सुविधाओं के नाम पर शर्मिदंगी का शिकार होना पड़ रहा है।

दरअसल, लंदन से दिल्ली आ रही एक एयर इंडिया की फ्लाइट को पायलट बीच रास्ते जयपुर एयरपोर्ट पर ही छोड़ कर चला गया। पायलट का तर्क था कि उसकी ड्यूटी खत्म हो चुकी है, ऐसे में वह अब प्लेन को नहीं उड़ाएगा। कई घंटों के इंतजार के बाद भी जब प्लेन नहीं उड़ा तो यात्रियों को सड़क मार्ग से दिल्ली तक आना पड़ा।

खराब मौसम के कारण डायवर्ट की गई थी फ्लाइट

दिल्ली में कल हो रही बारिश और बादलों के कारण फ्लाइट संचालन में दिल्ली एयरपोर्ट को काफी परेशानी हो रही थी। ऐसे में कई फ्लाइटों को डायवर्ट किया गया था। लंदन से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-112 को भी दिल्ली में उतरने की इजाजत नहीं दी गई। ऐसे में फ्लाइट करीब 10 मिनट तक हवा में ही घूमती रही। करीब 10 मिनट बाद इस फ्लाइट को जयपुर की तरफ मोड़ दिया गया।

पायलट ने प्लेन उड़ाने से किया इंकार

जानकारी के मुताबिक, करीब दो घंटे बाद दिल्ली एयरपोर्ट से क्लीयरेंस मिलने के बाद एक-एक कर फ्लाइटों को रवाना किया जाने लगा। हालांकि, लंदन से दिल्ली जाने वाली AI-112 फ्लाइट तीन घंटे तक वहीं खड़ी रही। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि फ्लाइट के पायलट ने यह कहकर प्लेन उड़ाने से इंकार कर दिया कि उसकी ड्यूटी खत्म हो चुकी है। यह कहने के बाद वह फ्लाइट से उतर गया।

दोपहर दो बजे उड़ी फ्लाइट

पायलट के इंकार के कारण फ्लाइट काफी देर तक वहीं खड़ी रही, जिस कारण कई यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। पांच घंटे तक परेशान रहने के बाद कुछ यात्रियों को सड़क मार्ग से दिल्ली तक भेजा गया। इसके बाद दूसरे क्रू की व्यवस्था कर बचे यात्रियों को प्लेन से दिल्ली भेजा गया। इस कारण सुबह चार बजे दिल्ली पहुंचने वाली फ्लाइट ने दोपहर दो बजे जयपुर एयरपोर्ट से उड़ान भरी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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