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उद्धव ठाकरे और शरद पवार के साथ आएंगे ओवैसी? महाविकास अघाड़ी को AIMIM ने दिया बड़ा ऑफर

Maharashtra Election: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 'भाजपा को हराने' के लिए एआईएमआईएम ने एमवीए से हाथ मिलाने की पेशकश की है। तो क्या अब उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूटीबी), शरद पवार की एनसीपी (एसपी) और कांग्रेस पार्टी असदुद्दीन औवैसी की पार्टी के साथ मिलकर महाराष्ट्र चुनाव में अपनी किस्मत आजमाएंगे।

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असदुद्दीन ओवैसी ने एमवीए को दिया बड़ा ऑफर।

Owaisi Plan for Maharashtra: क्या असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी और विपक्षी दलों के गठबंधन के बीच समझौता होने वाला है? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने कहा कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र में इस साल प्रस्तावित विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने के लिए विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी (एमवीए) से हाथ मिलाने की इच्छुक है।

BJP को हराने के लिए विपक्षी गठबंधन में शामिल होंगे ओवैसी?

महाराष्ट्र में अभी भाजपा, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के महायुति गठबंधन की सरकार है। एआईएमआईएम की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष जलील ने मुंबई में पार्टी की एक बैठक के बाद एक निजी मराठी समाचार चैनल से बातचीत में यह टिप्पणी की।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'हमने लोकसभा चुनाव के दौरान ऐसा कहा था और अब हम एमवीए को फिर से हाथ मिलाने की पेशकश कर रहे हैं, क्योंकि हम भाजपा को हराना चाहते हैं। हालांकि, यह तय करना उनके जिम्मे है कि हमें गठबंधन में शामिल करना है या नहीं।' जलील ने कहा, 'अगर वे (एमवीए के घटक दल) हमें साथ लेकर चलते हैं, तो यह उनके लिए फायदेमंद होगा। अगर नहीं, तो हम अकेले आगे बढ़ने को तैयार हैं। अगर उन्हें लगेगा कि हमारे पास कुछ ताकत है या हमारा मजबूत वोट बैंक है तो वे संपर्क करेंगे, वरना नहीं।'

ओवैसी की पार्टी को उद्धव की शिवसेना से कोई दिक्कत नहीं!

यह पूछे जाने पर कि क्या एआईएमआईएम को एमवीए के घटक दल शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (शिवसेना-यूबीटी) से कोई दिक्कत नहीं है, जलील ने कहा, 'भाजपा ने देश को नुकसान पहुंचाया है, इसलिए हम उसे किसी भी तरह सत्ता से दूर रखना चाहते हैं।' हालांकि, उन्होंने प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) के साथ गठबंधन की संभावनाओं से इनकार किया।

AIMIM ने महाराष्ट्र की शिंदे सरकार पर जमकर बोला धावा

महायुति सरकार की ‘लाडकी बहिन’ योजना पर निशाना साधते हुए जलील ने कहा, 'इतने वर्षों बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को एहसास हुआ कि राज्य में उनकी इतनी बहनें हैं। अब महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने के बाद सत्ता में बैठे लोग खुलेआम जनता से उन्हें (महायुति को) वोट देने के लिए कह रहे हैं... इससे साफ होता है कि बहनों के लिए कोई प्यार नहीं है। यह सिर्फ एक सौदा भर है।'

उन्होंने आरोप लगाया कि ‘लाडकी बहिन’ योजना लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन को मिले झटके का नतीजा है। महाराष्ट्र में इस साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। कुछ महीने पहले हुए लोकसभा चुनावों में एमवीए ने राज्य की 48 संसदीय सीटों में से 31 पर जीत दर्ज की थी, जबकि महायुति गठबंधन को 17 सीटों से संतोष करना पड़ा था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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