नई दिल्ली: भारतीय इतिहास के सबसे बड़े विमानन दुर्घटनाओं में से एक मानी जा रही इस दुर्घटना में 242 लोगों को ले जा रहा एयर इंडिया का बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। विमान अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ मिनट बाद ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस विमान में 242 लोग सवार थे। इनमें से 241 लोगों की मौत की पुष्टि एयर इंडिया की तरफ से की जा चुकी है और एक शख्स बच गया है, जिसका अभी अस्पताल में उपचार चल रहा है। इस हादसे को लेकर जानकारों की अलग अलग राय है। हालांकि हादसों के कारणों की अधिकारिक जांच रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।
कंट्रोलर में कोई बड़ी खराबी हो सकती है वजह

क्यों और कैसे क्रैश हुआ एयर इंडिया का प्लेन
एविएशन एक्सपर्ट विपुल सक्सेना ने गुरुवार को कहा कि अहमदाबाद प्लेन क्रैश की वजह कंट्रोल में कोई बड़ी खराबी हो सकती है। विपुल सक्सेना के मुताबिक यह एक काफी गंभीर दुर्घटना है। इस तरह की घटनाएं एविएशन में काफी कम हुई हैं। जब भी कोई एयरक्राफ्ट उड़ान भरता है तो उसमें हर प्रकार की जांच होती है। पायलट और इंजीनियर सभी चेकिंग करते हैं। सक्सेना के मुताबिक यह एक काफी अच्छा एयरक्राफ्ट था। मुझे नहीं लगता है कि इसके दोनों इंजन एक साथ फेल हो गए होंगे। सभी पायलट भी काफी अनुभवी थे। उनकी गलती की संभावनाएं काफी कम है। मेरा मानना है कि इस एयरक्राफ्ट के गिरने की वजह कंट्रोलर में कोई बड़ी खराबी हो सकती है। बोइंग द्वारा निर्मित एयर इंडिया का यह विमान अहमदाबाद से लंदन जा रहा था और उड़ान भरने के कुछ देर के बाद ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
क्या विमान टेक ऑफ के लिए तैयार था?
हादसे का शिकार हुआ विमान बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर था जो चौड़े आकार वाला और दो इंजन से लैस होता है। एविएशन सेफ्टी नेटवर्क के आंकड़ों के अनुसार, 2009 में सेवा में आने के बाद से किसी ड्रीमलाइनर विमान की यह पहली दुर्घटना है। विमानन सुरक्षा सलाहकार जॉन एम कॉक्स ने कहा कि जांचकर्ता पहला सवाल यह पूछेंगे कि एयर इंडिया का यह विमान उड़ान भरने के लिए सही ढंग से तैयार था या नहीं।
जहाज पूरी तरह उपर उड़ान नहीं भर पा रहा था

अहमदाबाद में एयर इंडिया का यात्री विमान दुर्घटनाग्रस्त
वाशिंगटन डीसी स्थित सेफ्टी ऑपरेटिंग सिस्टम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के मुताबिक तस्वीर में हवाई जहाज का अगला नुकीला हिस्सा 'नोज' ऊपर की ओर उठता हुआ और फिर नीचे की ओर गिरता हुआ दिखाई दे रहा है। इससे पता चलता है कि हवाई जहाज पर्याप्त उठान (उपर की तरफ उड़ान भरना) नहीं ले पा रहा है। स्लैट्स और फ्लैप्स को इस तरह से रखा जाना चाहिए कि पंख कम गति पर अधिक लिफ्ट बना सके।
अभी नतीजे पर पहुंचना मुश्किल
विमान को पीछे से देखने पर ऐसा नहीं लगता कि पीछे के किनारे के फ्लैप्स उस स्थिति में हैं, जैसी संभावना है। लेकिन मैं इस बात को लेकर बहुत सतर्क हूं कि तस्वीर की गुणवत्ता इतनी अच्छी नहीं है कि मैं कोई निष्कर्ष निकाल सकूं। सुरक्षा इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता रखने वाले यॉर्क यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर विज्ञान के प्रोफेसर जॉन मैक्डर्मिड ने कहा कि दुर्घटना के कारण के बारे में अभी बहुत कुछ जानना जल्दबाजी होगी, लेकिन पहली नजर में यह बहुत अचरज से भरा लगता है।
टेक ऑफ के बाद हुई होगी गंभीर स्थिति
किसी भी उड़ान का सबसे खतरनाक चरण उड़ान और लैंडिंग होता है, लेकिन हादसे का शिकार हुआ विमान 200 मीटर यानी 650 फीट से ऊपर नहीं चढ़ पाया था। पायलट काफी देर तक उड़ान को रोक सकते हैं। इसलिए ऐसा लगता है कि समस्या उड़ान भरने के अंतिम भाग में या उड़ान के तुरंत बाद अचानक हुई और इतनी गंभीर थी कि उसे संभाल पाना मुश्किल था। उन्होंने कहा कि जेट विमानों में कई सहयोगी प्रणालियां होती हैं जिसमें केवल एक इंजन के साथ ऊपर चढ़ने की क्षमता भी शामिल होती है। ऐसे में यह हादसा और भी असामान्य लगता है।
इंजन फेल हुआ या पक्षी टकराया?
दूसरी तरफ विशेषज्ञों का मानना है कि अहमदाबाद से लंदन जा रहे एयर इंडिया के विमान के हादसे का शिकार होने का संभावित कारण दोनों इंजनों का फेल होना या उड़ान भरने के तुरंत बाद पक्षी का टकरा जाना हो सकता है। बड़े विमानों के तीन वरिष्ठ पायलट ने बताया कि इस दुर्घटना के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वीडियो को देखने से ऐसा लगता है कि इंजन उड़ान भरने के लिए आवश्यक गतिबल (थ्रस्ट) नहीं जुटा पाए, जिसके परिणामस्वरूप उड़ान भरने के कुछ सेकंड बाद ही आवासीय क्षेत्र में भीषण दुर्घटना हो गई।
दोनों इंजन में 'थ्रस्ट' की कमी?
अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए उड़ान भरने वाले बोइंग 787-8 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के विशिष्ट कारणों का पता विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) द्वारा विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा। विशेषज्ञों ने विमान के नीचे गिरने के उपलब्ध दृश्यों के आधार पर संभावित कारणों का उल्लेख किया। एक कमांडर ने कहा कि ऐसा नहीं लगता कि यह किसी एक इंजन के फेल होने का मामला है, क्योंकि ऐसी स्थिति में विमान एक ओर झूल रहा होता, लेकिन इस मामले में विमान स्थिर था। तस्वीरों से ऐसा लगता है कि या तो फ्लैप ऊपर थे या उड़ान भरते वक्त लैंडिंग गियर नीचे था। दूसरे कमांडर ने उल्लेख किया कि जिस तरह से विमान नीचे गिरा, उससे संकेत मिलता है कि दोनों इंजन में 'थ्रस्ट' की कमी थी।
दोनों इंजन का पावर कम हुआ होगा
जानकारों के मुताबिक विमान के दोनों इंजन की शक्ति कम हो गई होगी। उन्होंने कहा कि एक इंजन फेल हो सकता है और संभवतः उड़ान भरने के बाद लैंडिंग गियर को वापस नहीं खींचे जाने के कारण, दूसरे इंजन में पर्याप्त शक्ति नहीं रही होगी। हालांकि ऐसा भी अनुमान लगाया जा रहा है कि विमान का वजन अनुमेय सीमा से अधिक हो सकता था, लेकिन इस कमांडर ने कहा कि यदि ऐसा होता, तो ‘टेक-ऑफ’ संभव नहीं होता। विमान का वजन वी-1 गति या टेक-ऑफ गति निर्धारित करता है। यदि गणना की गई गति आवश्यकता से कम है, तो इंजन विमान को हवा में उड़ते रहने के लिए संघर्ष करेंगे। (एजेंसी इनपुट के साथ)
