VP Enclave : नई संसद भवन का उद्घाटन होने के बाद सरकार का फोकस अब सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बनने वाली अन्य इमारतों एवं भवनों पर हो गया है। इस प्रोजेक्ट का हिस्सा रही नई संसद का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी ने गत रविवार को किया। अब सरकार का ध्यान वाइस प्रेसिडेंट एन्क्लेव, कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, डिफेंस एन्क्लेव, एमपी चैंबर और प्रधानमंत्री के नए आवास एवं कार्यालय के निर्माण को गति देने पर है।
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की दूसरी इमारत थी नई संसद
नई संसद सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की दूसरी इमारत है जिसका निर्माण कार्य पूरा हुआ है। प्रोजेक्ट का पहला हिस्सा सेंट्रल विस्टा एवेन्यू विजय चौक से लेकर इंडिया गेट तक का पुनर्विकास था। इस सड़क को पहले राजपथ के नाम से जाना जाता था। सौंदर्यीकरण एवं विकास के बाद इस सड़क को कर्तव्यपथ का नाम दिया गया। गौरतलब है कि आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन आने वाला सीपीडब्ल्यूडी विभाग इस योजना के तहत इमारतों एवं भवनों का निर्माण करा रहा है।
इन भवनों का निर्माण कार्य अगले 24 महीने में पूरा होगा
नए संसद भवन का निर्माण का ठेका सितंबर 2020 में टाटा प्रोजेक्टस को दिया गया। शुरुआत में इस पर 861 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान जताया गया लेकिन कुछ बदलाव के चलते इसका निर्माण लागत बढ़ गई। बुनियादी संरचना निर्माण करने वाली कंपनी लार्सन एवं टुब्रो पीएमओ, कैबिनेट सेक्रेटेरिएट, इंडिया हाउस और नेशनल सेक्युरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट का निर्माण कर रही है। इन इमारतों के निर्माण पर 1,189 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। कंपनी को इन भवनों का निर्माण का ठेका बीते साल नवंबर में दिया गया। समझा जाता है कि इन भवनों का निर्माण कार्य अगले 24 महीने में पूरा हो जाएगा।
एग्जीक्यूटिव एंक्लेव का होगा निर्माण
एग्जीक्यूटिव एंक्लेव का निर्माण साउथ ब्लाक के दक्षिण तरफ होगा। इंडिया हाउस का इस्तेमाल हैदराबाद हाउस की तरह होगा। हैदराबाद हाउस में विदेशी मेहमानों, राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें एवं उच्च स्तरीय वार्ता होती है। लार्सन एवं टुब्रो कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट की पहली तीन इमारतों का भी निर्माण कर रही है। कंपनी ने 3,142 करोड़ रुपए की बोली लगाकर ठेका जीता था। जबकि सीपीडब्ल्यूडी ने इन भवनों का निर्माण कार्य ढाई साल में पूरा कराने का लक्ष्य रखा है। कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट के तहत 10 इमारतें बनाई जाएंगी। इनमें मंत्रालय एवं अन्य कार्यालय होंगे।
किराए पर खर्च होते हैं सलाना 1,000 करोड़ रुपए
रिपोर्टों के मुताबिक सरकार के कई कार्यालय किराए की इमारतों में हैं और इन पर सलाना 1,000 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। कॉमन सेंट्रेल सेक्रेटेरिएट का निर्माण हो जाने के बाद यह खर्च बचेगा। बताया जाता है कि कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट को जगह देने के लिए शास्त्री भवन, उद्योग भवन, निर्माण भवन एवं रेल भवन सहित अन्य भवनों को गिराया जा सकता है।
