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अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, प. बंगाल में 'अराजक स्थिति' होने का लगाया आरोप

West Bengal: कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर कहा, पश्चिम बंगाल में अघोषित आपातकाल की स्थिति है, जहां मौलिक अधिकारों का प्रयोग करना लगभग नामुमकिन हो गया है। उन्होंने राज्य में कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए राष्ट्रपति मुर्मू से हस्तक्षेप करने की मांग की।

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कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी।

West Bengal: कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में अराजक स्थिति है। उन्होंने राज्य में कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए राष्ट्रपति मुर्मू से हस्तक्षेप करने की मांग की। अधीर रंजन ने अपने पत्र में इस वर्ष के आम चुनावों के दौरान चुनाव संबंधी हिंसा और पार्टी कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों का उल्लेख किया।

चौधरी ने दो पन्नों के पत्र में लिखा, मैं पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक जीवन में शिष्टाचार और कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए आपके हस्तक्षेप की मांग करता हूं। मेरे लिए व्यक्तिगत स्तर पर राज्य में अराजक स्थिति को देखना न केवल परेशान करने वाला है, बल्कि बहुत पीड़ादायक भी है, जिसका कारण सत्तारूढ़ पार्टी का विपक्ष के कार्यकर्ताओं, समर्थकों और समर्थकों के प्रति क्रूर रवैया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके परिणामस्वरूप कई निर्दोष लोगों की जान चली गई और उन्हें जेल भेजा गया या हिरासत में लिया गया।

संदेशखाली घटना का किया जिक्र

चौधरी ने कहा, ऐसे कई मामले भी हैं, जब सत्ताधारी पार्टी से जुड़े नहीं और विपक्षी दलों के प्रति झुकाव रखने वाले लोगों ने सत्ताधारी पार्टी की दबंगई की वजह से अपनी नौकरी या आजीविका खो दी है। उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले 'संदेशखाली घटना' और मुर्शिदाबाद जिले में झड़पों का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि ये सब मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने के लिए किया गया। उन्होंने कहा, लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा फैलाए गए आतंक के कारण विपक्षी पार्टी के सदस्यों और कार्यकर्ताओं को काफी नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन बहुत गहरी चिंता वाली बात जिस पर तत्काल ध्यान दिये जाने की जरूरत है, वह है पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा जारी रहने और विपक्षी कार्यकर्ताओं को धमकाया जाना।

पश्चिम बंगाल में अघोषित आपातकाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चौधरी ने पिछले सप्ताह जलपाईगुड़ी में पार्टी के एक कार्यकर्ता की हत्या का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि राज्य में विपक्ष के लिए बिल्कुल भी कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा, वर्तमान समय में, यह निश्चित रूप से राज्य में अघोषित आपातकाल की स्थिति है, जहां मौलिक अधिकारों का प्रयोग करना लगभग नामुमकिन हो गया है। उन्होंने कहा, पश्चिम बंगाल में व्याप्त स्थिति के तथ्यों पर विचार करते हुए, मैं राष्ट्र के प्रमुख के रूप में आपसे ईमानदारी से अनुरोध करता हूं कि लोगों को न्याय सुनिश्चित करें। पश्चिम बंगाल में व्यवस्था बहाल करने में आपके हस्तक्षेप की उत्सुकता से प्रतीक्षा है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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