दिल्ली में महिला पत्रकार से कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे ACP विवेक भगत के मामले में नया मोड़ सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि सोशल मीडिया के जरिए ACP की छवि खराब करने की साजिश रची गई। पुलिस ने इस मामले में नदीम नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।
पुलिस का कहना है कि इंस्टाग्राम समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे पोस्ट और वीडियो प्रसारित किए जा रहे थे,जिनमें एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को महिला के साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार करते हुए दिखाया गया था। इन सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच के दौरान पुलिस नदीम तक पहुंची।
पुलिस का कहना है कि नदीम खुद को स्वतंत्र पत्रकार बताता है और उसने अप्रैल में एक सोशल मीडिया चैनल शुरू किया था। उसके चैनल के करीब 24 हजार फॉलोअर्स थे और उस पर 1,226 वीडियो अपलोड किए गए थे। उन्होंने बताया कि आरोपी नदीम ने साकेत के एक मदरसा में पढ़ाई की थी और वह 10वीं कक्षा पास नहीं कर पाया था। पुलिस अब चैनल की गतिविधियों और इसके पीछे जुड़े अन्य लोगों की भी जांच कर रही है।
पुलिस ने नदीम के खिलाफ IT Act, फर्जीवाड़े और शांति भंग के लिए उकसाने समेत BNS की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की है। इतना ही नहीं, इसे लेकर दिल्ली पुलिस आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर सकती है, जिसमें कथित तौर पर यह बताया जाएगा कि ACP विवेक भगत की छवि खराब करने के लिए एक फर्जी AI पोस्टर का इस्तेमाल कैसे किया गया।
पुलिस ने साजिश का लगाया आरोप
इस मामले को लेकर एडिशनल डीसीपी मनजीत शैरों ने टाइम्स नाउ से बातचीत में बताया कि सोशल मीडिया चैनल का उद्देश्य पुलिस की छवि खराब करना और लोगों के बीच अशांति पैदा करना था। पुलिस का कहना है कि इस मामले में अन्य YouTube चैनलों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है और जांच से जुड़ी जानकारी क्राइम ब्रांच के साथ साझा की गई है।
महिला पत्रकार ने लगाया था यौन उत्पीड़न का आरोप
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक महिला स्वतंत्र पत्रकार ने आरोप लगाया कि 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की कवरेज के दौरान ACP विवेक भगत ने उसके साथ कथित तौर पर बदसलूकी और छेड़छाड़ की। पत्रकार का आरोप था कि जब AISA कार्यकर्ता नेहा बोरा को हिरासत में लेकर बस में बैठाया जा रहा था, तब वह घटना की रिपोर्टिंग कर रही थीं। इसी दौरान पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर उन्हें गलत तरीके से छुआ और बाद में धक्का दिया।महिला पत्रकार ने इस मामले में FIR दर्ज करने और आरोपी पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने अन्य लोगों के साथ पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन भी किया।
तीन महिला पत्रकारों ने लगाए आरोप
इस मामले में कुल तीन महिला स्वतंत्र पत्रकारों ने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर कथित यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। शिकायतें मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। हालांकि, विपक्षी दलों और वाम संगठनों का कहना है कि उनकी मांग FIR दर्ज कर आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई करने की है।ACP भगत को प्रमोशन के बाद फिर क्यों रोका गया?
विवाद के बीच सोमवार देर रात ACP विवेक भगत को एडिशनल डीसीपी का चार्ज दिए जाने की खबर सामने आई थी। इसके बाद इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए। दिल्ली सरकार ने बाद में स्पष्ट किया कि भगत ने खुद इस अतिरिक्त प्रभार को लेने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि महिला पत्रकारों द्वारा लगाए गए आरोपों की पूरी जांच होने और उसके संतोषजनक निष्कर्ष तक वह यह जिम्मेदारी नहीं संभालना चाहते।
