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मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन पर आई एक और मुसीबत, ACB ने दर्ज किया भ्रष्टाचार का केस, जानिए क्या है ये मामला

एसीबी ने एक बयान में कहा कि यह घोटाला करीब 2,000 करोड़ रुपये का है और इसमें अत्यधिक बढ़ी हुई दरों पर ठेके दिए गए थे।

Manish and satyenra

मुश्किल में मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन

ACB files corruption case- भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने दिल्ली सरकार के स्कूलों में 12,748 कक्षाओं के निर्माण में कथित भ्रष्टाचार को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। एसीबी ने एक बयान में कहा कि यह घोटाला करीब 2,000 करोड़ रुपये का है और इसमें अत्यधिक बढ़ी हुई दरों पर ठेके दिए गए थे। बयान के अनुसार, कथित तौर पर प्रत्येक कक्षा का निर्माण 24.86 लाख रुपये में किया गया, जो सामान्य लागत से लगभग पांच गुना अधिक है। बयान के मुताबिक, यह कार्य कथित तौर पर आप से जुड़े ठेकेदारों को सौंपा गया था।

क्या है पूरा मामला?

दिल्ली सरकार में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने केस दर्ज किया है। आरोप है कि आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान करीब 12,748 स्कूल कक्षाओं के निर्माण में लगभग 2,000 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। शिकायतकर्ताओं में बीजेपी नेता हरीश खुराना, विधायक कपिल मिश्रा और नीलकंठ बख्शी शामिल हैं। इनका कहना है कि जिन कक्षाओं पर लगभग 5 लाख रुपये प्रति कक्षा खर्च होना था, वहां 24.86 लाख रुपये प्रति कक्षा खर्च दिखाया गया।

साल 2015-16 में दिल्ली सरकार ने स्कूलों में कक्षा निर्माण का बड़ा प्रोजेक्ट शुरू किया। सरकारी मंजूरी के अनुसार यह प्रोजेक्ट जून 2016 तक तय लागत पर पूरा होना था, लेकिन कोई भी काम समय पर पूरा नहीं हुआ। निर्माण में सेमी-पर्मानेंट स्ट्रक्चर (SPS) बनाए गए, जिनकी उम्र 30 साल होती है, लेकिन खर्च पक्की इमारतों (RCC) जितना किया गया, जो 75 साल चलती हैं। केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की तकनीकी रिपोर्ट ने बताया कि SPS कक्षाओं की लागत लगभग पक्की इमारतों के बराबर ही रही और कोई भी आर्थिक लाभ नहीं हुआ।

34 ठेकेदारों को काम दिया गया, जिनमें कई का संबंध आम आदमी पार्टी से बताया जा रहा है। 860.63 करोड़ रुपये के टेंडर दिए गए, लेकिन लागत 17% से 90% तक बढ़ा दी गई।

कुल 326.25 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जोड़ी गई, जिसमें से 205.45 करोड़ रुपये सिर्फ ‘रिच स्पेसिफिकेशन’ के नाम पर थे। CVC रिपोर्ट फरवरी 2020 में तैयार हुई थी, लेकिन उसे लगभग 3 साल तक दबाकर रखा गया।

इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत अनुमति मिलने के बाद ACB ने एफआईआर नंबर 31/2025 दर्ज कर ली है। इसमें IPC की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात), 120-B (साजिश) और भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 13(1) को शामिल किया गया है। अब इस घोटाले की गहराई से जांच शुरू हो चुकी है। सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, ठेकेदारों और अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच के बाद यह तय होगा कि शिक्षा और निर्माण क्षेत्र की इस बड़ी धांधली में असली दोषी कौन हैं और किसे सजा

मिलनी चाहिए।

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अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडल Author

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर... और देखें

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