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केजरीवाल, सिसोदिया, संजय सिंह के बाद क्या अब सत्येंद्र जैन को मिलेगी जमानत? अदालत में इस दिन होगी सुनवाई

Delhi News: संजय सिंह, मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल को तो जमानत मिल गई, वो जेल से रिहा भी हो गए हैं, लेकिन सवाल ये है कि केजरीवाल के एक और करीबी सत्येंद्र जैन को हवालात से बाहर आने का मौका कब मिलेगा? उन्होंने जमानत के लिए अदालत का रुख किया।

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सत्येंद्र जैन को कब मिलेगी राहत?

Satyendra Jain's Hopes for Bail: आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेताओं को कहीं न कहीं इस बात की चिंता जरूर सता रही होगी कि आप का भविष्य कैसा होगा? एक शराब कथित घोटाले की जद में सारे बड़े नेताओं के नाम आते चले गए। इसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री से लेकर, उपमुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, राज्यसभा सांसद... सभी को जेल की हवा खानी पड़ी। हालांकि केजरीवाल, सिसोदिया और संजय सिंह जेल से बाहर आ चुके हैं, लेकिन घोटाले का दाग अभी भी उनके दामन पर लगा हुआ है।

कब जेल से बाहर आ पाएंगे सत्येंद्र जैन?

अरविंद केजरीवाल तो जेल से बाहर आ चुके हैं, लेकिन पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन अब तक जेल की सलाखों के पीछे हैं। राज्यसभा सांसद संजय सिंह और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को भी सलाखों से आजादी मिल गई है। पहले संजय सिंह जेल से रिहा हुए, फिर मनीष सिसोदिया को 17 महीने बाद राहत मिली, हाल ही में केजरीवाल को भी सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई। लेकिन एक सवाल ये है कि केजरीवाल और उनकी पार्टी के दो दिग्गज नेताओं के लिए थोड़ी राहत भरी खबर मिली, वैसी खबर केजरीवाल के करीबी सत्येंद्र जैन को कब नसीब होगी?

सत्येंद्र जैन ने अदालत का किया रुख

जेल में बंद दिल्ली के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता सत्येंद्र जैन ने धनशोधन मामले में जमानत के लिए बृहस्पतिवार को शहर की एक अदालत का रुख किया। विशेष न्यायाधीश राकेश स्याल ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी कर 25 सितंबर तक जैन की अर्जी पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। 25 सितंबर को अदालत मामले पर सुनवाई करेगी।

जैन को न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद अदालत में पेश किया गया, जिसके बाद न्यायाधीश ने उनकी हिरासत की अवधि और बढ़ा दी। ईडी ने उन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत हिरासत में लिया था।

कब हुई थी आप नेता जैन की गिरफ्तारी

ईडी ने आप नेता को 30 मई, 2022 को उनसे कथित रूप से जुड़ी चार कंपनियों के जरिए धन शोधन के आरोप में गिरफ्तार किया था। संघीय एजेंसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 2017 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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