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आमिर खान पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, तो CJI ने किया उनका स्वागत; जानें आखिर क्या है माजरा

Court News: अभिनेता आमिर खान सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने उनका स्वागत किया और कहा- मैं कोर्ट में भगदड़ नहीं चाहता, लेकिन हम आमिर खान का स्वागत करते हैं जो फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए यहां आए हैं। आमिर खान कोर्ट नंबर 1 में कोर्ट की सुनवाई में शामिल हो रहे हैं।

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सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर आमिर खान का सीजेआई ने किया स्वागत।

Aamir Khan at Supreme Court: बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान फिल्म ‘लापता लेडीज’ की न्यायाधीशों के लिए स्क्रीनिंग से पहले शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय पहुंचे और प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने उनका स्वागत किया। आज शाम को लिंग संवेदनशीलता कार्यक्रम (Gender Sensitisation Programme) के तहत उनकी फिल्म 'लापता लेडीज' यहां दिखाई जाएगी।

आमिर खान पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, तो क्या बोले CJI

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'मैं अदालत में भगदड़ नहीं चाहता लेकिन हम आमिर खान का स्वागत करते हैं जो फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए यहां आए हैं। निर्देशक किरण राव भी जल्द ही हमारे साथ शामिल होंगी।' यह फिल्म ग्रामीण भारत की दो दुल्हनों की हृदयस्पर्शी कहानी है, जिनकी ट्रेन में यात्रा के दौरान गलती से अदला-बदली हो जाती है। इसका निर्माण राव के बैनर ‘किंडलिंग प्रोडक्शंस’ और खान के बैनर ‘आमिर खान प्रोडक्शंस’ ने किया है।

अधिकारियों के लिए प्रदर्शित की जाएगी यह फिल्म

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को न्यायाधीशों, उनके परिवारों और रजिस्ट्री के अधिकारियों के लिए यह फिल्म प्रदर्शित की जाएगी। न्यायालय के प्रशासनिक अनुभाग द्वारा जारी एक पत्र में कहा गया, 'भारत के उच्चतम न्यायालय की स्थापना के 75वें वर्ष के दौरान आयोजित गतिविधियों के तहत लैंगिक समानता के विषय पर आधारित फिल्म ‘लापता लेडीज’ शुक्रवार, नौ अगस्त, 2024 को प्रशासनिक भवन परिसर के सी-ब्लॉक स्थित ऑडिटोरियम में प्रदर्शित की जाएगी।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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