80 साल के बुजुर्ग को 62 साल बाद मिला इंसाफ, 1963 की कीमत पर मिलेगी करोड़ों की जमीन, बिल्डर पर क्या बीत रही होगी

भारत की आजादी के कुछ साल बाद शुरू हुआ एक कानूनी विवाद आखिरकार समाप्त हो गया है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सबसे लंबे समय से चल रहे संपत्ति विवादों में से एक को आखिरकार सुलझा दिया। इसके साथ ही अदालत ने एक निजी डेवलपर के खिलाफ मूल आवंटी केअधिकारों की पुष्टि की है। कोर्ट का ये फैसला अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। किस तरह ये कोर्ट केस शुरू हुआ कैसे अपने अंजाम तक पहुंचा, आइए जानते हैं।

Authored by: अमित कुमार मंडलUpdated Dec 14 2025, 10:47 IST
​62 साल पहले 14000 रुपये में खरीदी थी जमीन​01 / 07

​62 साल पहले 14000 रुपये में खरीदी थी जमीन​

मामला फरीदाबाद जिले का है जहां, 62 साल पहले 14,000 रुपये से कम में खरीदी गई 5,103 वर्ग फुट जमीन अब नाममात्र 25% अतिरिक्त कीमत पर सौंपी जाएगी। इसकी मौजूदा बाजार दर लगभग 7 करोड़ रुपये है। इस संपत्ति के इकलौते वारिस सी.के. आनंद 80 वर्ष से अधिक आयु के हैं। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने अपने हालिया आदेश में कहा, दशकों तक अपनी जिम्मेदारी निभाने में देरी करने वाला पक्ष बाजार की बढ़ती कीमतों को ढाल के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकता।

 परिवार का इंतजार लंबा हुआImage Credit : Meta AI02 / 07

परिवार का इंतजार लंबा हुआ

पीड़ित ने अदालत का रुख कब्जा पाने के लिए नहीं, बल्कि केवल संपत्ति के हस्तांतरण को रोकने के लिए। तब भी, हाई कोर्ट ने माना कि आवंटन वैध थे और कंपनी द्वारा एकतरफा रद्द नहीं किए जा सकते थे। फिर भी, कब्जा मिलना मुश्किल बना रहा। बिल्डर जमीन देने में लगातार आनाकानी करता चला गया। आनंद के परिवार का इंतजार लंबा होने लगा।

​62 साल पहले 14000 रुपये में खरीदी थी जमीन Image Credit : Meta AI03 / 07

​62 साल पहले 14000 रुपये में खरीदी थी जमीन

मामला फरीदाबाद जिले का है जहां, 62 साल पहले 14,000 रुपये से कम में खरीदी गई 5,103 वर्ग फुट जमीन अब नाममात्र 25% अतिरिक्त कीमत पर सौंपी जाएगी। इसकी मौजूदा बाजार दर लगभग 7 करोड़ रुपये है। इस संपत्ति के इकलौते वारिस सी.के. आनंद 80 वर्ष से अधिक आयु के हैं। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने अपने हालिया आदेश में कहा, दशकों तक अपनी जिम्मेदारी निभाने में देरी करने वाला पक्ष बाजार की बढ़ती कीमतों को ढाल के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकता।

​डेवलपर की दलीलें खारिज​Image Credit : PTI04 / 07

​डेवलपर की दलीलें खारिज​

मुकदमेबाजी का मौजूदा दौर 2002 में शुरू हुआ। निचली अदालतों ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन डेवलपर ने समय सीमा, 1964 में अनुबंध रद्द होने का आरोप और आज के रियल एस्टेट बाजार में छह दशक पुराने समझौते को लागू करने की अनुचितता का हवाला देते हुए हाई कोर्ट में अपील की। ​​

​62 साल पहले के दाम में मिलेगी जमीन​Image Credit : PTI05 / 07

​62 साल पहले के दाम में मिलेगी जमीन​

जस्टिस गुप्ता ने शनिवार को जारी 22 पेज के फैसले में इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया। अब ये जमीन आनंद को 62 साल पहले के दाम पर ही मिलेगी। इस केस ने बता दिया कि न्याय भले ही देर से मिला लेकिन तथ्यों के आधार पर सही तरीके से जमीन का मालिकाना हक 80 वर्षीय आनंद को सौंपा गया। 1963 के दौर में ये जमीन महज 14 हजार रुपये में खरीदी गई थी और इसके दाम करोड़ों में हैं। सोचिए बिल्डर पर क्या बीत रही होगी, कि उसके हाथों से करोड़ों की जमीन निकल गई।

अदालत का किया रुख Image Credit : PTI06 / 07

अदालत का किया रुख

डेवलपर ने बार-बार इन कानूनों का हवाला देते हुए कब्जा नहीं सौंपा और खरीदारों को आश्वासन दिया कि मंज़ूरी मिलते ही भूखंड हस्तांतरित कर दिए जाएंगे। 1980 के दशक के मध्य तक, भूखंडों को तीसरे पक्ष को बेचे जाने की आशंका से आवंटियों ने अदालत का रुख किया।

​लगभग आधा भुगतान कर दिया था​Image Credit : PTI07 / 07

​लगभग आधा भुगतान कर दिया था​

नानकी देवी ने बिक्री मूल्य का लगभग आधा भुगतान कर दिया था। लेकिन इसके बाद कानूनी अड़चनों, प्रशासनिक देरी और पीढ़ियों तक चलने वाले अंतहीन मुकदमों की एक लंबी गाथा शुरू हो गई। बुकिंग के कुछ ही समय बाद, पंजाब अनुसूचित सड़क एवं नियंत्रित क्षेत्र अधिनियम, 1963 लागू हुआ, जिसके बाद हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन अधिनियम, 1975 लागू हुआ।

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