New Rail Line Project: भारतीय रेलवे रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रही है। देश के विभिन्न राज्यों के कोने-कोने तक पटरियां बिछाकर ट्रेनों की कनेक्टिविटी को बेहतर करने का प्रयास है। इसके लिए कई परियोजनाएं संचालित हैं। इसी बीच सरकार ने 4 नए रेल प्रोजेक्ट विकसित करने के लिए 12,328 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इनका रूट मैप गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और असम के 13 जिलों को कवर करेगा। जिनमें देशलपार-हाजीपीर-लूना और वायोर-लखपत नई लाइन, सिकंदराबाद (सनथनगर)-वाडी तीसरी और चौथी लाइन, भागलपुर-जमालपुर तीसरी लाइन और फुर्केटिंग-न्यू तिनसुकिया दोहरीकरण शामिल हैं। इन रूटों पर नई एक्सप्रेस ट्रेनें और मालगाड़ियों के संचालन से न सिर्फ रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को सीधा लाभ होगा, बल्कि माल ढुलाई भी आसान होगी। नई रेल लाइनों के लिए नए स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा, जिनके आसपास होटल, रेस्टोरेंट समेत अन्य आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति के लिए शॉप इत्यादि ओपन होंगी, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।
किन राज्यों में बिछेंगी नई पटरियां
गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और असम राज्यों के 13 जिलों को कवर करने वाली ये चार परियोजनाएं भारतीय रेलवे के विद्यमान नेटवर्क को लगभग 565 किलोमीटर बढ़ा देंगी। ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप बनाई गई हैं, जिनका उद्देश्य एंटीग्रेटेड प्लानिंग योजना और स्टॉक होल्डर कंसल्टेंट के जरिए से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है।
देशलपर-हाजीपीर-लूना और वायोर-लखपत नई रेल लाइन
प्रस्तावित सभी परियोजनाओं के निर्माण के दौरान लगभग 251 लाख मानव-दिवसों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का दावा किया जा रहा है। जिन देशलपर-हाजीपीर-लूना और वायोर-लखपत नई रेल लाइनों को मंजूरी मिली है, उनसे गुजरात के कच्छ क्षेत्र के सुदूर क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। यह गुजरात के मौजूदा रेलवे नेटवर्क में 145 रूट किमी और 164 ट्रैक किमी जोड़ेगी, जिसकी अनुमानित लागत 2526 करोड़ रुपये है। जानकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट को कंपलीट करने के लिए 3 साल की समय सीमा निर्धारित की गई है।
गुजरात में नई रेल लाइनों से क्या फायदा?
देशलपर-हाजीपीर-लूना और वायोर-लखपत रेल लाइन से गुजरात में पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलेगा। इस नई रेल लाइनों के जरिए नमक, सीमेंट, कोयला, क्लिंकर और बेंटोनाइट की ढुलाई में काफी मदद मिलेगी। इस परियोजना से कच्छ के रण को कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। हड़प्पा स्थल धोलावीरा, कोटेश्वर मंदिर, नारायण सरोवर और लखपत किला भी रेल नेटवर्क के अंतर्गत आएंगे, क्योंकि 13 नए रेलवे स्टेशन जोड़े जाएंगे, जिससे 866 गांवों और लगभग 16 लाख आबादी को सीधा लाभ होगा। हालांकि, नए स्टेशनों के नाम क्या होंगे अभी इसका इंतजार है।

रेल लाइन
कर्नाटक-तेलंगाना रेल लाइन रूट मैप
रेलवे ने पहले से संचालित ट्रैकों के चौड़ीकरण पर फोकस किया है। कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए स्वीकृत मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 3,108 गांवों और लगभग 47.34 लाख की आबादी तथा एक आकांक्षी जिले (कलबुर्गी) तक कनेक्टिविटी बढ़ेगी, जिससे कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और असम राज्यों को सीधा फायदा होगा। कर्नाटक और तेलंगाना में फैली 173 किलोमीटर लंबी सिकंदराबाद (सनथनगर)-वाडी तीसरी और चौथी लाइन के पूरा होने की समय सीमा पांच वर्ष और लागत 5012 करोड़ रुपये है।
| जानकारी | विवरण |
| परियोजना का नाम | पीएम गति शक्ति |
| प्रस्तावित नए रेल प्रोजेक्ट की लंबाई | 565 किमी. |
| प्रस्तावित नए रेल प्रोजेक्ट की संख्या | 4 |
| नए रेल प्रोजेक्ट स्टेट नाम | गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और असम |
| नए रेल प्रोजेक्ट की लागत | 12,328 करोड़ रुपये |
| रूट मैप के गांव की संख्या | 3108 गांव |
| प्रस्तावित नए स्टेशनों की संख्या | 13 देशलपर-हाजीपीर-लूना और वायोर-लखपत रेल लाइन (गुजरात) |
भागलपुर-जमालपुर तीसरी लाइन रूट मैप
बिहार में 53 किलोमीटर लंबी भागलपुर-जमालपुर तीसरी लाइन के निर्माण के लिए तीन साल का लक्ष्य तय किया गया। इस परियोजना के विकसित करने के लिए 1156 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। जानकारी के मुताबिक, जल्द ही जमीन अधिग्रहण का कार्य शुरू हो जाएगा। तीसरी रेल लाइन के बनने से ट्रेनों की रफ्तार के साथ ट्रेनों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बनने से पहले से मौजूद दो लाइनों पर मालगाड़ी का लोड कम होगा। फिलहाल, 40 से 45 मालगाड़ियों की आवाजाही हो रही है, लेकिन तीसरी लाइन से इसकी संख्या में इजाफा होगा, जिससे माल ढुलाई का कार्य समय से पूरा किया जा सकेगा।

रेल लाइन
फुरकेटिंग-न्यू तिनसुकिया लाइन दोहरीकरण
असम में रेलवे ट्रैक बिछाकर सफर आसान बनाने की दिशा में कार्य चल रहा है। रेलवे की प्रस्तावित 194 किलोमीटर लंबी फुरकेटिंग-न्यू तिनसुकिया दोहरीकरण परियोजना के लिए 3634 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस परियोजना को पूरा करने में 4 साल का समय लग सकता है।
नई रेल परियोजनाओं का क्या होगा फायदा?
ये रेल परियोजनाओं के खुलने से कोयला, सीमेंट, क्लिंकर, फ्लाईऐश, स्टील, कंटेनर, उर्वरक, कृषि उत्पाद और पेट्रोलियम उत्पादों जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए मुख्य मार्ग का काम करेंगी। रेलवे का मानना है कि क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप 68 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) की अतिरिक्त माल ढुलाई होगी। इन सभी रेल लाइनों के ईर्द गिर्द तमाम इकाइयां और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने से रोजगार के साथ आर्थिक विकास में उछाल देखने मिलेगा।
