Ram Mandir CEO: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान के पैसों में घपले और हेरफेर के मामले के बाद ट्रस्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, नया सीईओ चुनने के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए 18 उम्मीदवार अयोध्या पहुंच चुके हैं। ट्रस्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय पैनल इन उम्मीदवारों के इंटरव्यू ले रहा है।
चंपत राय का इस्तीफा और नए बदलाव
दान में गबन और चोरी के आरोप लगने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे ट्रस्ट ने स्वीकार कर लिया। पूर्व आरएसएस (RSS) प्रचारक और सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है।
SIT जांच और गिरफ्तारियां
दान पेटी से नकद चोरी और अनियमितताओं के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच के आधार पर पुलिस अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। सीसीटीवी फुटेज, रिकवरी और वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
RSS और VHP का रुख
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) दोनों ही संगठनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि करोड़ों राम भक्तों के विश्वास और मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता को बनाए रखा जा सके।
मामले की शुरुआत और FIR
जून 2026 में राम मंदिर के दानपात्रों (चढ़ावा) से नकदी और चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आया। यूपी सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की शुरुआती जांच के बाद मामले में एफआईआर दर्ज की गई और 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अभियुक्तों से लगभग ₹79.85 लाख बरामद किए गए।
ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक बदलाव
नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जिसे जुलाई 2026 में ट्रस्ट की बैठक में स्वीकार कर लिया गया। व्यवस्थापक गोपाल राव (गोपाल नागरकाटे) को ट्रस्ट से हटा दिया गया। ट्रस्टी कृष्ण मोहन (जिन्होंने केस दर्ज कराया था) को अंतरिम महासचिव बनाया गया।
नए CEO की नियुक्ति प्रक्रिया
मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को पेशेवर और पारदर्शी बनाने के लिए ट्रस्ट ने एक नया CEO (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) नियुक्त करने का फैसला किया। इसके लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया, जिसमें रिटायर्ड जस्टिस परमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े शामिल हैं।
चंपत राय का पक्ष
चंपत राय ने इस्तीफा देने के बाद एक हस्तलिखित पत्र जारी कर कहा कि वे ट्रस्ट की इच्छा के अनुसार SIT जांच पूरी होने तक चुप रहे। उन्होंने अपने 45 साल के सार्वजनिक जीवन को खुली किताब बताते हुए कहा कि जांच का अंतिम फैसला आने पर ही सारा सच सामने आ जाएगा।
