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मणिपुर में काम आई अमित शाह की अपील, 24 घंटे के अंदर बागियों ने किए 140 हथियार सरेंडर

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 2, 2023, 02:56 PM IST

Manipur Violence: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अपील के बाद मणिपुर में अब तक सरेंडर किए गए हथियारों में SLR 29, Carbine, AK, INSAS Rifle, INSAS LMG, .303 Rifle, 9mm pistol, .32 pistol, M16 rifle, smoke gun Tear gas, देशी पिस्टल, स्टन गन, मॉडिफाइड राइफल, जेवीपी और ग्रैनेड लॉचर शामिल हैं।

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मणिपुर में उग्रवादियों द्वारा सरेंडर किए गए हथियार (स्क्रीन ग्रैब)

Photo : ANI

Manipur Violence: हिंसाग्रस्त राज्य मणिपुर में शांति बहाली की कोशिशों का असर धीरे-धीरे दिखने लगा है। राज्य में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह डेरा डाले हुए हैं। इस बीच खबर है कि उनकी अपील के 24 घंटे बाद उग्रवादियों ने हथियार सरेंडर करना शुरू कर दिए हैं। दअरसल, 24 घंटे पहले अमित शाह ने उग्रवादियों से सुरक्षाबलों से लूटे गए हथियारों को सरेंडर करने की अपील की थी।

मणिपुर पुलिस का कहना है कि उनकी अपील के बाद 140 हथियार सरेंडर किए गए हैं, जिसमें कुछ हथियार काफी खतरनाक हैं। इन हथियारों में SLR 29, Carbine, AK, INSAS Rifle, INSAS LMG, .303 Rifle, 9mm pistol, .32 pistol, M16 rifle, smoke gun Tear gas, देशी पिस्टल, स्टन गन, मॉडिफाइड राइफल, जेवीपी और ग्रैनेड लॉचर शामिल हैं।

अब तक करीब 75 लोगों की हो चुकी है मौत

मणिपुर में बीते तीन मई को हिंसा भड़की थी। यहां दो समुदाय में जातीय संघर्ष के चलते पूरा राज्य जल उठा। आलम यह हो गया कि पूरे राज्य में इंटरनेट बंद करना पड़ा और सुरक्षा बलों को तैनात करना पड़ा। इस हिंसा में अब तक 75 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य में बीते 28 मई को भी हिंसा भड़की थी। इस दौरान कई घरों में आग लगा दी गई थी। बता दें, यह सब अमित शाह के मणिपुर दौरे से पहले हुआ।

शांति बहाली की कोशिश में जुटे गृहमंत्री

मणिपुर पहुंचते ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शांति बहाली की कोशिश में जुट गए। उन्होंने उच्च अधिकारियों के साथ बैठक कर राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने हिंसाग्रस्त क्षेत्रों का भी दौरान किया। शांति के प्रयासों के क्रम में अमित शाह ने मैतेई व कुकी समुदाय के लोगों से बात करके भी समझौते के प्रयास किए। बता दें, हिंसा के बीच यहां खबर आई कि उग्रवादियों ने हमला करके सुरक्षाबलों से हथियार लूट लिए, जिसके बाद केंद्रीय गृहमंत्री ने उनसे हथियार लौटाने की अपील की थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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