Misuse of ED CBI: केंद्रीय जांच एजेंसियों खासतौर से प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई के दुरुपयोग पर विपक्षी दलों के तेवर गरम हैं। प्रेस कांफ्रेंस के जरिए विपक्ष के सभी दल नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते रहते हैं। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट की चौखट से होते हुए जजो के टेबल तक जा पहुंचा है। कांग्रेस की अगुवाई में 14 दलों ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अर्जी लगा कर कहा है कि माई लॉर्ड अब तो इंतेहा हो गई है। दायर अर्जी में प्री अरेस्ट और पोस्ट अरेट केस में सीबीआई और ईडी की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए 5 अप्रैल की तारीख दी है। बता दें कि मानहानि केस में सूरत सेशंस कोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, टीएमसी, डीएमके शामिल हैं।
विपक्ष के इन नेताओं के खिलाफ जांच
- राहुल गांधी- कांग्रेस सांसद
- सोनिया गांधी- कांग्रेस सांसद
- प्रियंका गांधी- कांग्रेस नेता
- मनीष सिसोदिया- दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम
- सत्येंद्र जैन- दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री
- लालू यादव- आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष
- तेजस्वी यादव- बिहार के डिप्टी सीएम
- अभिषेक बनर्जी- ममता बनर्जी के भतीजे
- फारुक अब्दुल्ला- जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम
- के कविता- तेलंगाना के सीएम की बेटी
इन नेताओं के खिलाफ हो रही जांच
मनीष सिसोदिया को सीबीआई और ईडी ने दिल्ली के कथित शराब घोटाले में गिरफ्तार किया है, के कविता से इसी मामले में पूछताछ की गई है और तेजस्वी और उनके परिवार के सदस्यों को नौकरी के लिए जमीन मामले की जांच की जा रही है।कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि 14 पार्टियां 42% जनता का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। इन दलों का मानान है है कि लोकतंत्र खतरे में है। हम मौजूदा जांच को प्रभावित करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। 95% मामले विपक्षी नेताओं पर हैं। हम गिरफ्तारी से पहले और बाद के दिशानिर्देशों की मांग कर रहे हैं। राजनीतिक मंचों पर ये दल बार बार कहते हैं कि बीजेपी वो वॉशिंग मशीन है जिसमें कोई भी धुलकर अपने दामन के दाग को धो सकता है। आखिर एनडीए के नेताओं के खिलाफ जांच क्यों नहीं हो रही है। बीजेपी जिन उद्योगपतियों को मदद कर रही है या जिनकी मदद से वो अपना कारोबार चला रहे हैं उसकी जांच क्यों नहीं होती है।
