Office AC And Dry Eyes: ऑफिस जाने वाले लोगों के साथ देखा जाता है कि जैसे ही वे सुबह ऑफिस पहुंचते हैं तो AC चल जाता है और फिर उनके दिन के 8-9 घंटे कंप्यूटर स्क्रीन के सामने निकल जाते हैं। मगर जब उन्हें शाम तक आंखों में जलन, चुभन, किरकिरापन या धुंधला दिखने जैसी परेशानी होने लगती है, तो ज्यादातर लोग इसका कारण सिर्फ मोबाइल या लैपटॉप को मानते हैं। लेकिन नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या के पीछे सिर्फ स्क्रीन नहीं, बल्कि ऑफिस का एयर कंडीशनर भी एक बड़ी वजह हो सकता है।
बता दें कि AC कमरे की हवा को ठंडा करने के साथ उसकी नमी भी कम कर देता है। जब यही सूखी हवा लंबे समय तक आंखों के संपर्क में रहती है और साथ में लगातार स्क्रीन देखने से पलकें भी कम झपकती हैं, तो आंखों की प्राकृतिक सुरक्षा परत प्रभावित होने लगती है। यही वजह है कि आज पहले से कहीं ज्यादा युवा प्रोफेशनल्स ड्राई आई (Dry Eye Disease) की शिकायत लेकर डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। अच्छी बात यह है कि कुछ वैज्ञानिक और आसान आदतें अपनाकर इस समस्या के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
AC आंखों की नमी कैसे कम करता है
अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद की सीनियर कंसल्टेंट नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि मित्तल बताती हैं कि आंख की सतह पर आंसुओं की एक बेहद पतली लेकिन महत्वपूर्ण परत होती है, जिसे टियर फिल्म (Tear Film) कहा जाता है। यह तीन परतों से मिलकर बनी होती है और आंखों को चिकना बनाए रखने, पोषण देने, साफ रखने और संक्रमण से बचाने का काम करती है।
समस्या तब शुरू होती है, जब हम लंबे समय तक ऐसे कमरे में बैठते हैं जहां लगातार एयर कंडीशनर चल रहा हो। AC कमरे की हवा में मौजूद नमी को कम कर देता है। नतीजा यह होता है कि टियर फिल्म का पानी वाला हिस्सा सामान्य से तेजी से उड़ने लगता है। इससे आंखों की यह प्राकृतिक सुरक्षा परत अस्थिर हो जाती है और आंखों में सूखापन, जलन और असहजता महसूस होने लगती है।
डॉ. मित्तल के अनुसार, केवल ठंडी हवा ही समस्या नहीं है। अगर AC का वेंट सीधे चेहरे या आंखों की तरफ हो, तो टियर फिल्म और तेजी से सूख सकती है।
AC का आंखों की नमी पर असर
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स्क्रीन टाइम क्यों बढ़ा देता है परेशानी
अगर पूरा दिन कंप्यूटर पर काम करना पड़ता है, तो खतरा और बढ़ जाता है। डॉ. रश्मि मित्तल बताती हैं कि सामान्य परिस्थितियों में इंसान एक मिनट में लगभग 15 से 20 बार पलक झपकाता है। लेकिन कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल पर लगातार काम करते समय यह संख्या घटकर लगभग 5 से 7 बार प्रति मिनट रह जाती है।
कम पलक झपकाने का मतलब है कि टियर फिल्म पूरी आंख पर बराबर नहीं फैल पाती। कई बार पलक पूरी तरह बंद भी नहीं होती, जिससे कॉर्निया की सतह पर छोटे-छोटे सूखे हिस्से बनने लगते हैं। यही कारण है कि दिन खत्म होने तक आंखों में जलन, थकान और धुंधला दिखने की शिकायत बढ़ जाती है।
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क्या पानी आना भी ड्राई आई का संकेत है
यह बात बहुत कम लोग जानते हैं। कई लोगों को लगता है कि अगर आंखों से पानी आ रहा है तो आंखें सूखी कैसे हो सकती हैं? लेकिन नेत्र विशेषज्ञ बताते हैं कि कई मामलों में यह ड्राई आई का ही संकेत होता है।
जब आंखों की प्राकृतिक नमी कम होने लगती है, तो शरीर इसकी भरपाई करने की कोशिश करता है और अचानक ज्यादा पानी बनने लगता है। हालांकि यह पानी टियर फिल्म की गुणवत्ता को नहीं सुधार पाता। इसलिए अगर आंखों में बार-बार पानी आने के साथ जलन, किरकिरापन या धुंधलापन भी हो रहा है, तो इसे सामान्य नहीं मानना चाहिए।
किन लोगों की आंखें ज्यादा खतरे में हैं
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किन लोगों में ड्राई आई का खतरा ज्यादा रहता है
यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के सीनियर कंसल्टेंट कैटरैक्ट, कॉर्निया एवं रिफ्रैक्टिव सर्जन डॉ. भानु प्रकाश एम. के अनुसार, लंबे समय तक AC में बैठकर काम करने वाले लगभग सभी लोगों को इसका असर महसूस हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में जोखिम ज्यादा होता है।
ऐसे लोग जो पूरे दिन स्क्रीन पर काम करते हैं, कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं या पहले से आंखों की किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, उनमें ड्राई आई होने की संभावना अधिक रहती है। अगर लंबे समय तक इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या क्रॉनिक ड्राई आई डिजीज का रूप ले सकती है।
दुनिया भर में अनुमानित 34.4 करोड़ लोग ड्राई आई डिजीज से प्रभावित हैं। वहीं द ऑक्यूलर सरफेस (The Ocular Surface) जर्नल में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार, इसकी व्यापकता उम्र, मौसम और कामकाजी माहौल के आधार पर लगभग 5% से 50% तक हो सकती है। लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठकर AC वाले ऑफिस में काम करना आज इसके प्रमुख जोखिम कारकों में माना जा रहा है।
क्या कोई भी आई ड्रॉप डालना सही है
आंखों में जलन होने पर कई लोग मेडिकल स्टोर से कोई भी आई ड्रॉप खरीदकर इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञ इसे सही नहीं मानते। डॉ. रश्मि मित्तल बताती हैं कि लगातार ड्राई आई की समस्या होने पर नेत्र विशेषज्ञ की जांच जरूरी होती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर प्रिजर्वेटिव-फ्री लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स की सलाह दे सकते हैं, जो बार-बार इस्तेमाल करने वालों के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती हैं।
वहीं बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड या लाल आंखों को तुरंत सफेद दिखाने वाली ड्रॉप्स का इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए आंखों की किसी भी दवा का चुनाव खुद से नहीं करना चाहिए।
ऑफिस में आंखों को कैसे बचाएं
ऑफिस में आंखों को कैसे बचाएं
डॉ. भानु प्रकाश के अनुसार, AC में बैठना छोड़ना समाधान नहीं है, बल्कि उसके प्रभाव को कम करना जरूरी है। इसके लिए हर 20 मिनट बाद लगभग 20 फीट दूर रखी किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखें। इसे 20-20-20 नियम कहा जाता है। काम करते समय जानबूझकर सामान्य तरीके से पलक झपकाने की आदत डालें और शरीर में पानी की कमी न होने दें।
अगर संभव हो, तो कंप्यूटर स्क्रीन को आंखों के स्तर से थोड़ा नीचे रखें। इससे आंखें कम खुलती हैं और आंसुओं के तेजी से सूखने की संभावना घट सकती है। साथ ही कोशिश करें कि AC का वेंट सीधे चेहरे की तरफ न हो। अगर ऑफिस का वातावरण बहुत ज्यादा शुष्क हो, तो वहां की सुविधाओं के अनुसार कमरे की नमी संतुलित रखने वाले उपाय भी मददगार हो सकते हैं।
कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए
अगर आंखों में सूखापन, लालपन, जलन या धुंधला दिखना कई दिनों तक बना रहे और सामान्य सावधानियां अपनाने के बाद भी आराम न मिले, तो नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।
डॉ. भानु प्रकाश बताते हैं कि हर बार ड्राई आई की वजह सिर्फ AC नहीं होती। कई बार एलर्जी, कुछ दवाइयों का असर, हार्मोनल बदलाव या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी इसके पीछे हो सकती हैं। सही कारण की पहचान होने पर ही उचित इलाज संभव है।
वहीं डॉ. रश्मि मित्तल का कहना है कि ड्राई आई को केवल ऑफिस की छोटी-मोटी परेशानी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लंबे समय तक टियर फिल्म अस्थिर रहने से आंखों की सतह पर लगातार सूजन हो सकती है, देखने की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और गंभीर मामलों में कॉर्निया को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए आंखों की नमी की सुरक्षा करना, भविष्य की साफ और आरामदायक दृष्टि में निवेश करने जैसा है।
डिस्क्लेमर: यह लेख नेत्र विशेषज्ञों से प्राप्त की गई चिकित्सा जानकारी पर आधारित है और केवल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। यदि आपकी आंखों में लगातार सूखापन, दर्द, तेज लालपन, रोशनी से परेशानी या धुंधला दिखने जैसी शिकायत हो, तो स्वयं दवा लेने के बजाय किसी योग्य नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच और उपचार कराएं।
