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बैठने के बाद खड़े होते ही क्यों लड़खड़ा जाते हैं पैर, जानिए किस न्यूरोलॉजिकल समस्या का हो सकता है संकेत

  • Authored by: Vineet
  • Updated Jan 21, 2026, 05:12 PM IST

Locked-in Syndrome: बैठने के बाद खड़े होते ही अगर आपके पैर लड़खड़ा जाते हैं या संतुलन बिगड़ जाता है, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह समस्या एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर ऑर्थोस्टैटिक ट्रेमर का संकेत हो सकती है। जानिए इसके लक्षण, कारण और कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, आसान और रोजमर्रा की भाषा में।

लॉक्ड-इन सिंड्रोम

लॉक्ड-इन सिंड्रोम (PC- Istock)

Locked-in Syndrome Kya Hai: कई बार ऐसा होता है कि लंबे समय तक बैठे रहने के बाद जैसे ही हम खड़े होते हैं, पैर अचानक लड़खड़ा जाते हैं। कुछ सेकंड के लिए संतुलन बिगड़ता है, शरीर साथ नहीं देता और मन में डर बैठ जाता है कि कहीं कमजोरी तो नहीं। आमतौर पर लोग इसे थकान, लो बीपी या उम्र से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कुछ मामलों में यह समस्या एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का संकेत भी हो सकती है, जिसे समझना और समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।

क्या है लॉक्ड-इन सिंड्रोम (Locked-in Syndrome In Hindi)

लॉक्ड-इन सिंड्रोम एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अपने शरीर को हिला नहीं सकता लेकिन वह पूरी तरह से होश में होता है। इस स्थिति का मुख्य कारण मस्तिष्क के पोंस नामक हिस्से में नुकसान होता है। यह स्थिति आमतौर पर 30 से 50 वर्ष की आयु के लोगों को प्रभावित करती है।

लॉक्ड-इन सिंड्रोम के सामान्य लक्षण (Symptoms Of Locked In Syndrome In Hindi)

लॉक्ड-इन सिंड्रोम के लक्षणों में शामिल हैं:

- चेहरा नहीं हिला पाना

- बोलने में कठिनाई

- आँखों के नीचे किसी भी तरह की गतिविधि नहीं कर पाना

हालांकि, व्यक्ति देख सकता है, सुन सकता है और सोच सकता है, लेकिन अपने शरीर को हिलाने में असमर्थ होता है।

लॉक्ड-इन सिंड्रोम के कारण ( Causes Of Locked In Syndrome In Hindi)

इस स्थिति का मुख्य कारण मस्तिष्क के पोंस में चोट लगना है। यह चोट कई कारणों से हो सकती है:

- इस्केमिक या हेमरेजिंग स्ट्रोक

- मस्तिष्क में संक्रमण

- ट्यूमर या अन्य न्यूरोलॉजिकल विकार जैसे ALS

लॉक्ड-इन सिंड्रोमलक्षणों की पहचान

यदि आप या आपके किसी करीबी को बैठने के बाद खड़े होने में समस्या हो रही है, तो इसे हल्के में न लें। इसके अलावा, अगर कोई निम्नलिखित लक्षण दिखता है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

- अचानक संतुलन खोना

- दृष्टि में समस्या

- बोलने में कठिनाई

स्वास्थ्य पर ध्यान दें

यदि आप बार-बार लड़खड़ाते हैं, तो यह समय है कि आप अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें। समय पर जांच कराना और सही उपचार लेना महत्वपूर्ण है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप समय-समय पर डॉक्टर के साथ जुड़े रहें, समस्या को लेकर जानकारी लेते रहें।

बैठने के बाद खड़े होते समय पैर लड़खड़ाना एक गंभीर समस्या हो सकती है, जो न्यूरोलॉजिकल स्थिति का संकेत हो सकती है। इस स्थिति की पहचान और उपचार समय पर करना बहुत जरूरी है।

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विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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