What is Zika Virus (जीका वायरस के बारे में हिंदी में) : हाल ही में मुंबई में जीका वायरस का पता चला है जिसने निवासियों और स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। पीटीआई ने बृहन्मुंबई नगर निगम के हवाले से बताया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने पुष्टि की है कि चेंबूर के पास एम-वेस्ट वार्ड में रहने वाले 79 वर्षीय एक व्यक्ति में जीका वायरस का पहला केस दर्ज हुआ है।
हलांकि बीएमसी ने एक प्रेस विज्ञाप्ति में कहा है कि यह बीमारी स्व-सीमित है और संक्रमित होने वाले लगभग 80 प्रतिशत लोग लक्षण - मुक्त हैं।
जीका वायरस क्या है
जीका वायरस मच्छर के काटने से फैलने वाला रोग है जो मुख्य रूप से संक्रमित एडीज मच्छरों के काटने से फैलता है। इस वायरस ने कुछ साल पहले संक्रमित महिलाओं से पैदा हुए शिशुओं में बर्थ डिफेट यानी जन्म दोष की वजह बनने को लेकर सुर्खियां बटोरी थीं। लेकिन बड़ी उम्र के लोग भी जीका वायरस से बचे नहीं है। इसके लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं।
जीका वायरस के लक्षण क्या हैं
जीका वायरस संक्रमण के समान्य लक्षणों में बुखार, दाने, जोड़ों का दर्द और आंखें लाल होना शामिल हैं। ये लक्षण आमतौर पर हल्के होते हैं और कुछ दिनों से लेकर एक सप्ताह तक रह सकते हैं। कुछ मामलों में व्यक्तियों में कोई लक्षण भी नहीं दिखते जिससे वायरस का पता लगाना चुनौतीपू्र्ण हो जाता है।
जीका वायरस कैसे फैलता है ?
मच्छर के काटने के अलावा जीका वायरस किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संपर्क के माधयम से, गर्भावस्था के दौरान मां से बच्चे में और रक्त संक्रमण के माध्यम से भी फैल सकता है। मच्छरों के काटने से बचाव और सुरक्षित यौन संबंध के जरिए जीका वायररस को फैलने से रोका जा सकता है।
जीका से खुद को कैसे बचाएं
- मच्छर को दूर रखने के तरीके आजमाएं
- मच्छरों के काटने से बचने के लिए खुली त्वचा पर ईपीए युक्त क्रीम लगाएं।
- जहां तक हो सके लंबी बाजू वाली शर्ट और पैंट पहनें। टांगों और बाहों को ढक कर रखें।
- कहीं पानी जमा न होने दें क्योंकि ऐसे क्षेत्रों में मच्छर पनपते हैं
- सुबह और शाम के समय घर के अंदर रहें क्योंकि इस समय मच्छर ज्यादा काटते हैं
गर्भावस्था और जीका वायरस
गर्भवती महिलाओं को जीका वायरस संक्रमण से बचाव के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। इस वायरस से शिशुओं में बर्थ डिफेट हो सकते हैं।
क्या जीका वायरस घातक है
अधिकांश व्यक्तियों के लिए जीका वायरस संक्रमण जान के लिए खतरा नहीं है और इसके लक्षण हल्के होते हैं। हालांकि वायरस की जन्म दोष पैदा करने की क्षमता के चलते इससे बचाव करना जरूरी है।
