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40 से पहले बंद हो जाएं पीरियड्स तो खतरे की है घंटी, जानें क्या है मेनोपॉज की सही उम्र?

मेनोपॉज एक ऐसी स्थिति है, जिसका सामना हर एक महिला को अपने जीवन में एक बार तो जरूर करना होता है। हालांकि एक सही समय पर तो मेनोपॉज सही होता है, लेकिन जब क्या हो जब ये समय से पहले होने लगे। आइए जानते हैं मेनोपॉज की सही उम्र क्या है?

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Photo : iStock

सभी महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज एक ऐसी नेचुरल प्रक्रिया है जो एक बार जरूर आनी होती है। हालांकि मेनोपॉज देर से हो तो भी खराब और जल्दी हो जाए तो भी हानिकारक होता है। मेनोपॉज की कंडीशन महिलाओं में तब होती है जब पीरियड्स बंद हो जाते हैं। हालांकि इसकी एक सही उम्र होती है। जिससे पहले या बाद में इसे खराब माना जाता है। क्योंकि इससे कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम भी पैदा होने लग जाती है। आइए जानते हैं मेनोपॉज की सही उम्र क्या है? इसके साथ ही जानिए मेनोपॉज के कारण होने वाली समस्याएं।

मेनोपॉज के लिए जागरूकता

मेनोपॉज के बारे में ज्यादातर महिलाओं में जागरूकता की कमी देखने को मिलती है। ज्यादातर महिलाएं इसे केवल पीरियड्स बंद होना ही मानती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके जल्दी या देर से होने पर कई तरह की प्रॉब्लम भी हो सकती हैं। आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है मेनोपॉज की सही उम्र?

अर्ली मेनोपॉज क्या है?

किसी महिला को 40 साल की उम्र से पहले ही मेनोपॉज हो जाता है तो इसे अर्ली मेनोपॉज कहा जाता है। मेडिकल की भाषा में इसे प्री-मैच्योर मेनोपॉज भी कहते हैं। हालांकि मेनोपॉज जल्दी होने के पीछे कई तरह की वजहें भी हो सकती हैं। लेकिन समय से पहले पीरियड्स बंद होना महिलाओं की सेहत के लिए नुकसानदायक होता है।

क्या है मेनोपॉज की सही उम्र?

मेनोपॉज की कोई एक सही उम्र तय नहीं हो सकती है। क्योंकि हर महिला के लिए ये उम्र अलग-अलग हो सकती है। हालांकि ज्यादातर महिलाओं में मेनोपॉज 45 से 55 साल की उम्र में मेनोपॉज होता है। इसलिए ज्यादातर लोग 50 साल की उम्र को मेनोपॉज के लिए सबसे आदर्श मानते हैं।

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गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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