हेल्थ

बच्चे की सेहत के लिए खतरनाक है समय से पहले जन्म, जानें प्रीमैच्योर बेबी को होने वाली हेल्थ प्रॉब्लम

हाल ही में अमेरिकी नागरिकता कानूनों में हुए बदलाव के चलते बहुत से प्रवासी लोग में प्रीमैच्योर डिलीवरी कराने की होड़ सी लग गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि समय से पहले जन्म होने से बच्चे की सेहत पर काफी बुरा असर पड़ता है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...

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side effects of premature delivery

अमेरिका में नई सरकार के गठन के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी नागरिकता कानूनों में बदलाव कर दिया है। जिसके बाद अमेरिका में रह रहे प्रवासी भारतीय और अन्य देशों के नागरिकों में काफी अफरा तफरी का माहौल है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो नए अमेरिकी नागरिकता कानून के मुताबिक अब अमेरिकी नागरिकता का आधार केवल अमेरिका में जन्म को नहीं माना जाएगा। वहीं यह नया नियम 20 फरवरी से अस्तित्व में आ जाएगा। इस नए नियम के चलते अमेरिका में बसे प्रवासी लोगों में प्रीमैच्योर डिलीवरी की होड़ की लग गई है। ताकि उनके होने वाले बच्चे को अमेरिका की नागरिकता आसानी से मिल सके। आइए जानते हैं प्रीमैच्योर डिलीवरी से बच्चे की सेहत पर कैसा प्रभाव पड़ता है।

मां और नवजात दोनों के लिए खतरनाक

हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो प्रीमैच्योर डिलीवरी न केवल बच्चे बल्कि मां की सेहत पर भी काफी बुरा असर डालती है। समय से पहले जन्म लेने से बच्चे को सांस लेने में समस्या और संक्रमण और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा जन्म देने वाली महिला को भी संक्रमण और ऑपरेशन से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

बच्चे के दिमाग पर असर

हेल्थ से जुड़े कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि प्रीमैच्योर बर्थ से जन्म लेने वाले बच्चों के दिमाग 7-15 वर्ष की आयु में अन्य बच्चों की तुलना में काफी कमजोर देखे जाते हैं। इसलिए बच्चे को पूरे पूरे 37 हफ्ते तक गर्भ में विकसित होने देना चाहिए।

पीलिया

प्रीमैच्योर बेबी में जन्म के साथ पीलिया होने की संभावना भी काफी ज्यादा होती है। इसमें बच्चे की आंखें और त्वचा पीली पड़ने लगती है। इसका कारण है कि प्रीमैच्योर बच्चे का लिवर पूरी तरह नहीं बना होता है। जिससे उसके खून में लाल रक्त कोशिकाएं भरपूर नहीं बन पाती हैं।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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