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क्या साइलेंट किलर बन सकती है नींद की कमी? डॉक्टर से जानें नींद और ब्लड प्रेशर के बीच का गहरा संबंध

Relation Between Sleep And Blood Pressure : क्या आप जानते हैं कि ब्लड प्रेशर और नींद एक दूसरे से बंधे हुए हैं, जी हां लाइफस्टाइल की गड़बड़ी के कारण डिस्टर्ब हुई हमारी नींद ब्लड प्रेशर की समस्या का कारण भी बन जाती है। आज हम आपको बताएंगे कि क्या है नींद और ब्लड प्रेशर का आपसी संबंध?

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क्या साइलेंट किलर बन सकती है नींद की कमी? डॉक्टर से जानें नींद और ब्लड प्रेशर के बीच का गहरा संबंध

Relation Between Sleep And Blood Pressure : नींद सिर्फ आराम का जरिया नहीं, बल्कि अच्छी सेहत की नींव है। अगर हम रोजाना पूरी नींद नहीं लेते हैं, तो यह धीरे-धीरे शरीर में कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकती है। एक्सपर्ट्स की मानें तो नींद की कमी को एक "साइलेंट किलर" कहा जा सकता है, क्योंकि इसके सेहत पर होने वाले असर धीरे-धीरे दिखाई देते हैं लेकिन परिणाम बेहद खतरनाक हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हर व्यक्ति को औसतन 7 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए। नींद पूरी होने पर इसका असर हमारी हार्ट हेल्थ पर भी देखने को मिलता है। जो हमारे ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में जरूरी होती है। नींद लेने के दौरान हमारा शरीर खुद को रिपेयर करता है। लेकिन जब हम रोजाना नींद से समझौता करते हैं, ये कई तरह की सेहत संबंधी समस्याओं का कारण बन जाती है। क्या आपकी नींद और ब्लड प्रेशर के बीच कोई संबंध है? इस विषय को लेकर बात की हमने न्यूरोकेयर इंडिया के डायरेक्टर, न्यूरोसर्जन डॉ. पी.के. झा से....

नींद और ब्लड प्रेशर का संबंध - Relation Between Sleep And Blood Pressure

डॉ. पी.के. झा के मुताबिक, नींद की कमी से शरीर में तनाव हार्मोन, जैसे कि कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने लगता है। यह हार्मोन आपके ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है और लंबे समय तक ऐसा होने से हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन की स्थिति बन सकती है। यही बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर बाद में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी फेलियर जैसी बीमारियों का कारण हो सकता है। जो लोग पहले से ब्लड प्रेशर के मरीज हैं, उनके लिए नींद की अहमियत और भी बढ़ जाती है। इसलिए यह जरूरी है कि हम नींद भरपूर लें और अपनी नींद की गुणवत्ता का भी ध्यान रखें। एक बेहतर नींद, एक बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में पहला कदम है।

Lack of Sleep

Lack of Sleep

सेहत के लिए परेशानी का कारण नींद की कमी

डॉ. पी.के. झा के मुताबिक, नींद सिर्फ आराम या थकान मिटाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर और मन की मरम्मत का सबसे मौलिक हिस्सा है। जब हम गहरी नींद में होते हैं, तो हमारा शरीर खुद को ठीक करता है। नींद के समय हमारे हार्ट की गति संतुलित रहती है, दिमाग अनावश्यक सूचनाओं को साफ करता है और अगली सुबह के लिए ऊर्जा संचित होती है। लेकिन जब ये नींद टूटने लगती है, अधूरी उथली या बाधित होती है। तो इसका असर धीरे-धीरे हमारी शरीर के पूरे सिस्टम पर पड़ता है। यही उसे खतरनाक बनाता है। नींद की कमी एक ऐसा दुश्मन जो सामने से नहीं दिखाई देता है पर शरीर को अंदर से खोखला कर देता है।

Causes of Sleeplessness

Causes of Sleeplessness

नींद में बाधक हैं ये कारण

डॉ. पी.के. झा के मुताबिक, कई लोगों को रात में नींद नहीं आती या बार-बार टूटती है, तो इसके पीछे अक्सर कोई एक कारण नहीं होता। इसके पीछे अलग-अलग कई कारण हो सकते हैं। तनाव जो दिमाग को रातभर सक्रिय रखता है आपकी नींद में खलल डाल सकता है। इसके साथ ही मोबाइल या टीवी स्क्रीन की रोशनी भी आपकी नींद में बाधा बन सकते हैं। कई बार खाने-पीने की आदतें या कोई बीमारी जैसे थायराइड, हाई ब्लड प्रेशर, बार-बार यूरिन आना या पेट की परेशानी आपकी नींद को खंडित कर देती है।

क्या है एक्सपर्ट की राय

डॉ. पी.के. झा कहते हैं कि, जिस तरह भूख लगने पर खाना जरूरी है, वैसे ही थके हुए शरीर को गहरी नींद देना भी जरूरी है। लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम नींद को सबसे लास्ट में रखते हैं। हालांकि ये एक ऐसा समझौता जो धीरे-धीरे सेहत को खराब कर देता है। इसलिए नींद को दवाई की तरह न लें, बल्कि उसे लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाएं। जब आप समय पर सुकून से सोते हैं, तब शरीर खुद अपना उपचार करता है। और सबसे सुंदर बात यह है कि नींद एकमात्र ऐसा काम है जिसमें हम कुछ भी अलग से नहीं करना होता है। इसलिए अगली बार जब आप यह सोचें कि नींद बाद में ले लेंगे, तो याद रखिए, नींद अगर छूट गई, तो शायद बहुत कुछ और भी साथ छूट जाएगा।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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