हेल्थ

150 मिनट की मेहनत भी हार्ट अटैक से नहीं बचा पाएगी, जानिए नई रिसर्च में क्या निकला चौंकाने वाला सच

Exercise For Heart Attack Prevention: क्या आपको लगता है कि हफ्ते में 150 मिनट की एक्सरसाइज से दिल सुरक्षित रहता है? नई रिसर्च ने इस सोच को हिला दिया है। इसमें खुलासा हुआ है कि सिर्फ एक्सरसाइज ही हार्ट अटैक से नहीं बचा सकती। जानिए इस स्टडी में क्या निकला सच और क्यों जरूरी है लाइफस्टाइल में और बदलाव करना।

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150 मिनट एक्सरसाइज नहीं पर्याप्त

Exercise For Heart Attack Prevention: हम सब ये मानकर चलते हैं कि अगर हम रोज एक्सरसाइज करते हैं या हफ्ते में 150 मिनट वर्कआउट कर लेते हैं, तो हमारा दिल बिल्कुल सुरक्षित है। लेकिन हाल ही में आई 'सर्कुलेशन' नाम की मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक नई स्टडी ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। इस रिसर्च में पाया गया है कि सिर्फ एक्सरसाइज करने से हार्ट अटैक या कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का खतरा खत्म नहीं होता। दरअसल, एक्सरसाइज के साथ लाइफस्टाइल, डाइट और मेंटल हेल्थ भी उतने ही जरूरी फैक्टर हैं।

रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला सच

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिकों ने इस स्टडी में हजारों लोगों के हेल्थ रिकॉर्ड का एनालिसिस किया। नतीजा ये निकला कि जो लोग हफ्ते में 150 मिनट एक्सरसाइज करते थे, उनमें भी हार्ट अटैक का रिस्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। इसका मतलब साफ है - सिर्फ वर्कआउट करना काफी नहीं है, बल्कि हमारी डाइट, स्लीप और स्ट्रेस लेवल भी दिल की सेहत में बड़ा रोल निभाते हैं।

सिर्फ एक्सरसाइज नहीं पूरी लाइफस्टाइल जरूरी

स्टडी के मुताबिक, अगर आपकी डाइट में फैटी फूड, शुगर और प्रोसेस्ड आइटम ज़्यादा हैं, तो एक्सरसाइज का असर काफी हद तक कम हो जाता है। वहीं अगर नींद पूरी नहीं हो रही या स्ट्रेस लेवल ज्यादा है, तो शरीर का इंफ्लेमेशन बढ़ जाता है, जो हार्ट ब्लॉकेज की वजह बन सकता है। मतलब साफ है कि केवल जिम जाकर पसीना बहाना काफी नहीं, बल्कि हेल्दी खाने और शांत दिमाग की भी उतनी ही जरूरत है।

एक्सरसाइज की क्वालिटी और इंटेंसिटी का भी असर

रिसर्चर्स ने बताया कि सिर्फ टाइम नहीं, बल्कि एक्सरसाइज की क्वालिटी भी मायने रखती है। हल्की वॉक या स्ट्रेचिंग की तुलना में तेज़ वॉक, साइकलिंग या स्विमिंग जैसी एरोबिक एक्टिविटी ज्यादा असरदार होती हैं। यानी, शरीर को वाकई में मेहनत करनी होगी तभी दिल मजबूत रहेगा।

जेनेटिक और जेंडर फैक्टर का भी बड़ा रोल

स्टडी में यह भी सामने आया कि महिलाओं और पुरुषों के बीच हार्ट हेल्थ के मामले में अंतर होता है। महिलाओं में हार्मोनल बदलावों की वजह से कभी-कभी एक्सरसाइज का असर धीमा पड़ सकता है। वहीं कुछ लोगों में जेनेटिक फैक्टर्स यानी पारिवारिक इतिहास भी बड़ा कारण बनते हैं। ऐसे में उन्हें और भी ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।

हार्ट को हेल्दी रखने के लिए क्या करें

एक्सपर्ट्स की मानें तो रोजाना 30 मिनट की मॉडरेट टू इंटेंस एक्सरसाइज, साथ ही बैलेंस्ड डाइट, कम स्ट्रेस, पर्याप्त नींद और रेगुलर हेल्थ चेकअप - ये पांच बातें हार्ट को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकती हैं। यानी दिल की सुरक्षा के लिए एक्शन प्लान केवल जिम तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी लाइफस्टाइल में सुधार जरूरी है।

इस रिसर्च से एक बात साफ हो गई - सिर्फ 150 मिनट की एक्सरसाइज से हार्ट अटैक से बचाव की गारंटी नहीं दी जा सकती। अगर सच में दिल को मजबूत रखना है तो खानपान, नींद, तनाव और मानसिक स्वास्थ्य, इन सभी पहलुओं का संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है। स्वस्थ दिल का मतलब है समग्र जीवनशैली में संतुलन, न कि सिर्फ वर्कआउट पर भरोसा।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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