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पुरुषों के लिए मार्केट में आ सकती है गर्भनिरोधक गोली, दूर हो जाएगी अनवांटेड प्रेग्नेंसी की टेंशन

Birth Control Pill For Male: पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक का नया विकल्प विकसित किया जा रहा है। आइए जानते हैं कि यह कैसे काम करेगी और यह कब तक मार्केट में आ सकती है।

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पुरुषों के लिए आएंगी बर्थकंट्रोल पिल्स (Image AI Generated and Newsroom Verified)

Birth Control Pill For Male: पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक के नए विकल्प की तलाश कर रहे वैज्ञानिकों को एक अहम सफलता मिली है। अमेरिका के शोधकर्ता ऐसी एक्सपेरिमेंटल गोली विकसित कर रहे हैं, जिसे संबंध बनाने से करीब 30 मिनट पहले लेना होगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह गोली शुक्राणुओं की चलने की क्षमता को अस्थायी रूप से रोक सकती है। इसका संभावित असर 6 से 8 घंटे तक रहने की संभावना है और उसके बाद पुरुषों की फर्टिलिटी यानी प्रजनन क्षमता सामान्य हो जाएगी।

इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे अमेरिका के वेल कॉर्नेल मेडिसिन के फार्माकोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. जोचेन बक और डॉ. लॉनी लेविनइस ने अमेरिकी समाचार पत्रिका Newsweek को बताया कि रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए हमारी टीम को चार साल के लिए 8.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग मिली है। इस फंडिंग का इस्तेमाल दवा की सुरक्षा से जुड़े परीक्षणों और इसे इंसानों पर ट्रायल के लिए तैयार करने में किया जाएगा।

हालांकि, यह गोली अभी बाजार में उपलब्ध नहीं है और न ही इंसानों में इसकी गर्भनिरोधक क्षमता साबित हुई है। फिलहाल वैज्ञानिकों का अगला लक्ष्य इसकी सेफ्टी की जांच करना और शुरुआती ह्यूमन ट्रायल की दिशा में आगे बढ़ना है।

कैसे काम करेगी पुरुषों की यह नई गर्भनिरोधक गोली

इस एक्सपेरिमेंटल गोली की खास बात यह है कि यह शरीर में शुक्राणु बनने की प्रक्रिया को रोकने के बजाय पहले से मौजूद शुक्राणुओं की गति को प्रभावित करेगी।

वैज्ञानिकों अभी सॉल्यूबल एडेनिलिल साइक्लेज (sAC) एंजाइम पर काम कर रहे हैं। यह एंजाइम स्पर्म को एक्टिव होने और आगे बढ़ने में मदद करता है। दरअसल, शुक्राणुओं को महिला पार्टनर के रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट में आगे बढ़ने के लिए तैरने की क्षमता चाहिए होती है, जो इस एंजाइम की वजह से आती है। अगर पुरुष के स्पर्म की यह क्षमता प्रभावित हो जाए, तो उनके महिला के एग तक पहुंचने और उसे फर्टिलाइज करने की संभावना कम हो सकती है।

रिसर्चर्स ऐसी दवा विकसित कर रहे हैं, जो sAC एंजाइम की एक्टिविटी को अस्थायी रूप से रोक सके। इससे स्पर्मेटोजून अपनी सामान्य गति से आगे नहीं बढ़ पाएंगे। जानवरों पर किए गए शुरुआती टेस्ट में इस तरीके से गर्भधारण रोकने के उत्साहजनक नतीजे मिले हैं। अब वैज्ञानिक यह पता लगाना चाहते हैं कि इंसानों में भी यह तरीका सुरक्षित और असरदार होगा या नहीं होगा।

शोधकर्ताओं के अनुसार, अगर इस एंजाइम को पर्याप्त समय तक निष्क्रिय रखा जा सके, तो स्पर्म सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ पाएंगे और एग तक पहुंचने की उनकी क्षमता प्रभावित हो सकती है। इस तरह प्रेग्नेंसी की संभावना कम हो जाएगी।

संबंध बनाने से 30 मिनट पहले लेनी होगी गोली

वैज्ञानिक इस दवा को ऑन-डिमांड कॉन्ट्रासेप्टिव के रूप में विकसित करना चाहते हैं। इसका मतलब है कि पुरुषों को इसे रोजाना लेने के बजाय जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करने का विकल्प मिल सकता है। शोधकर्ताओं की मौजूदा योजना के अनुसार, गोली लेने के करीब 30 मिनट बाद इसका असर शुरू होगा और लगभग 6 से 8 घंटे तक गर्भधारण से सुरक्षा दे सकती है। इसके बाद दवा का असर कम होने और प्रजनन क्षमता सामान्य हो जाएगी।

हालांकि, अभी इसका टेस्ट इंसानों पर नहीं किया गया है। अभी यह पुष्टि होना बाकी है कि दवा इंसानी शरीर में कितनी जल्दी असर करेगी, कितनी देर तक प्रभावी रहेगी और क्या यह पूरे निर्धारित समय में बेबी कंसीव करने से रोकने में सफल होगी।

मौजूदा गर्भनिरोधक तरीकों से कैसे अलग होगी यह गोली

फिलहाल पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक के प्रमुख विकल्पों में कंडोम और नसबंदी शामिल हैं। कंडोम का इस्तेमाल हर बार संबंध बनाते समय करना पड़ता है, जबकि नसबंदी एक मेडिकल प्रक्रिया है, जिसे आमतौर पर स्थायी गर्भनिरोधक विकल्प के तौर पर चुना जाता है।

पुरुषों के लिए कुछ अन्य गर्भनिरोधक तरीकों पर भी रिसर्च हो रही है। इनमें रोजाना लेने वाली गोली, त्वचा पर लगाने वाले जेल और लंबे समय तक असर करने वाले इंजेक्शन जैसे विकल्प शामिल हैं।

इनमें से कई तरीके स्पर्म बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करने या हार्मोन में बदलाव करने पर आधारित हैं। स्पर्मेटोज़ून के बनने और विकसित होने में लगभग ढाई महीने लग सकते हैं। इस वजह से ऐसे तरीकों को असर दिखाने और बंद करने के बाद उनका प्रभाव खत्म होने में भी समय लग सकता है।

इसके मुकाबले sAC एंजाइम को लक्ष्य बनाने वाली गोली का उद्देश्य पहले से मौजूद स्पर्मेटोज़ून की गति को अस्थायी रूप से प्रभावित करना है। अगर यह तरीका इंसानों में सुरक्षित और प्रभावी साबित होता है, तो पुरुषों को गर्भनिरोधक इस्तेमाल करने का एक नया विकल्प मिल सकता है।

क्या इस गोली के कोई साइड इफेक्ट हैं

इस समय सबसे महत्वपूर्ण सवाल दवा की सुरक्षा से जुड़ा है। अब तक किए गए जानवरों पर आधारित शुरुआती अध्ययनों में शोधकर्ताओं ने उत्साहजनक परिणाम देखे हैं, लेकिन जानवरों पर मिले परिणामों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि दवा इंसानों में भी पूरी तरह सुरक्षित होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, sAC एंजाइम केवल प्रजनन से जुड़े ऊतकों में ही नहीं पाया जाता है, शरीर के दूसरे हिस्सों में भी इसकी भूमिका होती है। इस कारण यह जांचना जरूरी है कि इस एंजाइम को रोकने वाली दवा का आंखों या शरीर के अन्य अंगों पर कोई अनचाहा प्रभाव तो नहीं पड़ता है।

इसके अलावा, वैज्ञानिकों को अभी यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इजैकुलेशन के बाद महिला के रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट में पहुंचने पर भी दवा शुक्राणुओं की गति को प्रभावी रूप से रोक सके। अगर शुक्राणु दोबारा सामान्य तरीके से तैरने लगें, तो गर्भधारण की संभावना बनी रह सकती है। इसी वजह से इस दवा को इंसानों के इस्तेमाल के लिए सुरक्षित घोषित करने से पहले विस्तृत टॉक्सिकोलॉजी टेस्ट और क्लीनिकल ट्रायल की जरूरत होगी।

पुरुषों पर कब शुरू होगा इस गोली का ट्रायल

शोधकर्ताओं को मिली नई फंडिंग का प्रमुख उद्देश्य दवा को इंसानों पर शुरुआती परीक्षण के लिए तैयार करना है। इसके लिए दवा की सुरक्षा, शरीर में उसके व्यवहार, उपयुक्त खुराक और दूसरी जरूरी विशेषताओं की जांच की जाएगी।

इसके बाद स्वस्थ पुरुषों पर फेज-1 क्लीनिकल ट्रायल करने की योजना है। ऐसे ट्रायल में मुख्य रूप से यह देखा जाता है कि दवा कितनी सुरक्षित है, उससे किस तरह के साइड इफेक्ट हो सकते हैं और शरीर उस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।

इस दौरान प्रतिभागियों को दवा या प्लेसिबो यानी ऐसी गोली दी जा सकती है जिसमें सक्रिय दवा नहीं होती। इसके बाद उनके शुक्राणुओं की गति और दूसरे सुरक्षा संकेतों की जांच की जाएगी।

फेज-1 ट्रायल सफल होने का मतलब यह नहीं होगा कि गोली इस्तेमाल के लिए तैयार है। आगे इस गोली को यह साबित करना होगा कि निर्धारित समय में गर्भधारण रोकने के लिए यह वास्तव में प्रभावी है। इसके लिए बड़े और अधिक समय तक चलने वाले परीक्षणों की जरूरत हो सकती है। शोधकर्ताओं ने संकेत दिया है कि अभी इस दवा को बाजार में आने में समय लगेगा। इसका कोई निश्चित लॉन्च डेट घोषित नहीं हुआ है।

महिलाओं पर गर्भनिरोधक की जिम्मेदारी होगी कम

गर्भनिरोधक के कई मौजूदा विकल्प महिलाओं के लिए उपलब्ध हैं। इनमें हार्मोनल गोलियां, इंट्रायूटेराइन डिवाइस (IUD), इम्प्लांट और अन्य तरीके शामिल हैं। कुछ तरीकों से साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जबकि कुछ को नियमित रूप से इस्तेमाल करने या मेडिकल प्रक्रिया की जरूरत होती है। पुरुषों के लिए इस्तेमाल किए जा सकने वाले सुरक्षित और प्रभावी विकल्प बढ़ने पर गर्भनिरोधक की जिम्मेदारी दोनों पार्टनर के बीच साझा करने के अधिक अवसर मिल सकते हैं।

हालांकि, किसी नई दवा का लाभ तभी होगा, जब वह गर्भधारण रोकने में प्रभावी हो, उसके साइड इफेक्ट स्वीकार्य हों और उसका इस्तेमाल भरोसेमंद तरीके से किया जा सके। इस गोली के मामले में ये सभी बातें अभी वैज्ञानिक जांच का हिस्सा हैं। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि प्रस्तावित गोली का उद्देश्य गर्भधारण रोकना है। इसे यौन संचारित संक्रमणों (STI) से सुरक्षा देने वाला तरीका नहीं माना जा सकता है। उन संक्रमणों से बचाव के लिए कंडोम की भूमिका अलग और महत्वपूर्ण बनी रहती है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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