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लेबर पेन शुरू होने से पहले शरीर देता है ये 3 संकेत, डॉ. सोनल परिहार से जानें असली और नकली Labour Pain का फर्क

डिलीवरी का समय करीब आने पर पेट दर्द और कमर में खिंचाव को नजरअंदाज न करें। डॉ से जानें असली लेबर पेन के 3 संकेत, फॉल्स पेन की पहचान और कब तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है।

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Labour Pain Symptoms

गर्भावस्था के आखिरी दिनों में पेट में दर्द, कमर में खिंचाव या पानी जैसा डिस्चार्ज होने पर कई महिलाएं समझ नहीं पातीं कि डिलीवरी का समय आ गया है या यह सामान्य दर्द है। कुछ महिलाएं हल्के दर्द को नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि कुछ छोटी-सी परेशानी होने पर भी घबरा जाती हैं। ऐसे में असली और नकली लेबर पेन के बीच अंतर जानना बहुत जरूरी है।

    स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनल परिहार ने अपने वीडियो में बताया है कि हर महिला को लेबर पेन एक जैसा महसूस नहीं होता। किसी को तेज दर्द होता है, तो किसी महिला का गर्भाशय काफी खुलने के बाद भी दर्द हल्का रह सकता है। इसलिए केवल दर्द की तीव्रता के आधार पर डिलीवरी का समय तय करना सही नहीं है।अगर आप भी गर्भावस्था के अंतिम चरण में हैं, तो लेबर पेन के संकेतों को समझना आपके लिए मददगार हो सकता है। आइए जानते हैं असली लेबर पेन की पहचान कैसे करें, फॉल्स पेन से कैसे अंतर समझें और किन लक्षणों में तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।

    लेबर पेन के 3 पक्के संकेत क्या होते हैं?

    डॉ. सोनल परिहार के अनुसार, लेबर पेन को समझने के लिए दर्द की नियमितता, उसकी बढ़ती तीव्रता और शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। ये तीन संकेत खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं।

    1. दर्द नियमित अंतराल पर होना

    असली लेबर पेन में पेट का कसाव बार-बार होता है और दर्द के बीच का अंतर धीरे-धीरे कम हो सकता है। इसके विपरीत, फॉल्स लेबर पेन अनियमित होता है और अक्सर आराम करने या पोजीशन बदलने से कम हो जाता है।

    2. दर्द का धीरे-धीरे बढ़ना

    ट्रू लेबर पेन में संकुचन आमतौर पर समय के साथ अधिक मजबूत, लंबे और नियमित होते जाते हैं। दर्द पेट के निचले हिस्से और कमर में महसूस हो सकता है। हालांकि, हर महिला का अनुभव अलग होता है।

    3. गर्भाशय ग्रीवा का खुलना

    डिलीवरी के दौरान गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्विक्स धीरे-धीरे खुलती है। इसकी पुष्टि डॉक्टर जांच करके करते हैं। केवल दर्द देखकर यह निश्चित नहीं किया जा सकता कि सर्विक्स कितना खुला है।

    फॉल्स लेबर पेन और ट्रू लेबर पेन में अंतर

    फॉल्स लेबर पेन को ब्रैक्सटन हिक्स संकुचन या कंट्रैक्शन्स भी कहा जाता है। इसमें पेट कुछ समय के लिए सख्त हो सकता है, लेकिन कंट्रैक्शन्स आमतौर पर नियमित रूप से बढ़ते नहीं हैं। पानी पीने, आराम करने या स्थिति बदलने से राहत मिल सकती है।

    वहीं, असली लेबर पेन में कंट्रैक्शन्स नियमित और अधिक तीव्र होते जाते हैं। डॉ. सोनल परिहार बताती हैं कि दर्द सहने की क्षमता हर महिला में अलग होती है, इसलिए केवल तेज दर्द का इंतजार नहीं करना चाहिए।

    कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?

    अगर पानी की थैली फट जाए, योनि से अधिक रक्तस्राव हो या बच्चे की हलचल सामान्य से कम महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। नियमित संकुचन शुरू होने पर भी डॉक्टर से संपर्क करें। 5-1-1 नियम के अनुसार, संकुचन हर 5 मिनट पर आएं, लगभग 1 मिनट रहें और यह क्रम 1 घंटे तक चले, तो अस्पताल जाने की जरूरत हो सकती है। हालांकि, डॉक्टर की सलाह और गर्भावस्था की स्थिति के अनुसार इससे पहले भी अस्पताल जाना पड़ सकता है।

    शुरुआती लेबर पेन में क्या करें?

    अगर डॉक्टर ने घर पर इंतजार करने की सलाह दी है, तो हल्का टहलना, पर्याप्त पानी पीना, आराम करना और धीरे-धीरे सांस लेना मददगार हो सकता है। हल्का भोजन लें और अपने साथी या परिवार के किसी सदस्य को साथ रखें। दर्द बहुत बढ़ने या किसी चेतावनी संकेत के दिखने पर देर न करें।

    (डिस्क्लेमर: यह लेख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हेल्थ यूट्यूबर और डॉक्टर सोनल परिहार के वीडियो में बताए गए टिप्स के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी संबंधित क्रिएटर के व्यक्तिगत विचार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत इन टिप्स या दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।)

    Avni Bagrola
    अवनी बागरोलाauthor

    अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें जेन Z और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 3000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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