Gold Prices: देश में आगामी त्योहारों और शादियों के सबसे बड़े मांग वाले सीजन से ठीक पहले भारतीय सर्राफा बाजार में एक नया रुख देखने को मिल रहा है। आमतौर पर त्योहारी सीजन की शुरुआत होते ही बड़े ज्वैलरी ब्रांड्स और थोक व्यापारी सोने की जमकर खरीदारी करते हैं, लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग है। भारत के सबसे बड़े कीमती धातु रिफाइनर, एमएमटीसी-पैम्प इंडिया (MMTC-PAMP India) के अनुसार, देश के बड़े ज्वैलर्स फिलहाल सोने की नई खेप खरीदने से बच रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि हाल के दिनों में सोने के दामों में जो गिरावट आई है, वह आगे भी जारी रह सकती है।
बड़े ज्वैलर्स बाजार से गायब, छोटे व्यापारियों ने संभाला मोर्चा
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक एमएमटीसी-पैम्प इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (जो कि भारत सरकार की कंपनी MMTC Ltd. और स्विट्जरलैंड की रिफाइनरी PAMP SA का ज्वाइंट वेंचर है) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक अमित गुहा ने बताया कि कुल बिक्री में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली बड़ी ज्वैलरी चेन अभी पूरी तरह से बाजार में नहीं लौटी हैं। इसके विपरीत इस समय बाजार में खरीदारी की अगुवाई छोटे और मध्यम स्तर के ज्वैलर्स कर रहे हैं। इनमें से कई छोटे व्यापारियों ने दोबारा ऑर्डर भी दिए हैं। बाजार एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब कीमतें बढ़ने लगती हैं, तब बड़े ज्वैलरी निर्माता सामान महंगा होने के डर से तेजी से खरीदारी करते हैं ताकि स्टॉक जमा किया जा सके। इसके उलट, जब उन्हें कीमतों में और गिरावट आने की संभावना दिखती है, तो वे खरीदारी रोक देते हैं और अपने पास पहले से मौजूद पुराने स्टॉक से काम चलाते हैं।
रिकॉर्ड ऊंचाई से 24% तक गिरे सोने के दाम
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में सोने के भाव में लगातार हलचल बनी हुई है। पिछले हफ्ते सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे आ गया, जो जुलाई के बाद पहली बार हुआ है। फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद से अब तक सोने की कीमतों में करीब 24 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। यह स्थिति उस समय से बिल्कुल अलग है जब इसी साल जनवरी में सोने के दाम 5,400 डॉलर के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे।
15% इम्पोर्ट ड्यूटी और सरकारी नीतियों का पड़ा असर
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता भारत में इस साल सोने की मांग शुरुआत से ही सुस्त रही है। इसका मुख्य कारण सरकार द्वारा इस साल मई के महीने में सोने पर आयात शुल्क (Import Duty) को दोगुने से भी अधिक करके 15% कर देना है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश के बढ़ते व्यापार घाटे (Trade Deficit) को नियंत्रित करने के उद्देश्य से देशवासियों से सोने की खरीदारी कम करने की अपील की है। गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरत का करीब पूरा सोना विदेशों से आयात करता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आयात शुल्क में बढ़ोतरी की वजह से कई लोग कैश मार्केट या बिना बिल वाले अनधिकृत बाजार का रुख भी कर रहे हैं, जिससे आधिकारिक खरीदारी प्रभावित हुई है।
चीन में बढ़ी मांग, भारत में दिवाली से पहले सुस्ती
भारत में सोने की सुस्ती की यह स्थिति चीन से बिल्कुल उलट है। चीन, जो दुनिया का सबसे बड़ा स्वर्ण उपभोक्ता है, वहां हाल ही में कीमतें घटने के बाद घरेलू मांग में अच्छी तेजी देखी गई है। भारत में खरीदारी को लेकर यह हिचकिचाहट ऐसे समय में आई है जब देश में सोने की मांग का सबसे मजबूत सीजन शुरू हो रहा है। आमतौर पर अक्टूबर से दिसंबर के बीच दिवाली और धनतेरस के आसपास भारत में सबसे ज्यादा सोना खरीदा जाता है।
इस तिमाही आयात 50% घटने का अनुमान
वैश्विक शोध संस्था 'सिटी रिसर्च' की रिपोर्ट के मुताबिक, सख्त आयात नियमों और इस साल अल-नीनो के कारण मानसून में हुई गड़बड़ी के चलते ग्रामीण भारत में मांग कमजोर पड़ी है। इससे अक्टूबर से दिसंबर की चौथी तिमाही के दौरान भारत का स्वर्ण आयात घटकर महज 106 टन रहने का अनुमान है, जो कि आमतौर पर इस तिमाही में होने वाले ऐतिहासिक औसत आयात (212 टन) का करीब आधा ही है।
एमएमटीसी-पैम्प के अनुसार उनकी कुल बिक्री फिलहाल पिछले साल के मुकाबले कम चल रही है। लोग बड़े आभूषणों की जगह छोटे सिक्कों और बार को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। सितंबर में बिक्री पिछले साल जैसी ही रही, जबकि अक्टूबर में थोड़ी सुधार देखी गई है। जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के दाम फिर से चढ़ने शुरू होते हैं, तो बड़े ज्वैलर्स तुरंत बाजार में लौटेंगे और खरीदारी में तेजी आएगी।
