Rain Water And Leptospirosis: बारिश शुरू होते ही कई जगह सड़कें और गलियां पानी से भर जाती हैं। ऐसे में लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे उस पानी से होकर निकल जाते हैं। ज्यादातर लोगों को लगता है कि इससे सिर्फ कपड़े या जूते गंदे होंगे, लेकिन सच इससे कहीं ज्यादा गंभीर हो सकता है। बारिश का गंदा और रुका हुआ पानी कई तरह के कीटाणुओं का घर बन जाता है। इन्हीं में से एक की वजह से लेप्टोस्पायरोसिस नाम की बीमारी हो सकती है। अगर समय रहते इसका इलाज न कराया जाए, तो यह शरीर के कई जरूरी अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए बारिश के मौसम में थोड़ी-सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है।
बारिश के गंदे पानी से कैसे फैलती है यह बीमारी
अमृता अस्पताल, फरीदाबाद के हेड एंड सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन विभाग के डॉ. संजय रैना बताते हैं कि यह बीमारी एक तरह के बैक्टीरिया से होती है। यह बैक्टीरिया अक्सर चूहों जैसे संक्रमित जानवरों के पेशाब के जरिए गंदे पानी में पहुंच जाता है।
अगर आपके पैर में हल्की-सी खरोंच, कट या छिलन है और आप उस गंदे पानी में चलते हैं, तो यह बैक्टीरिया शरीर के अंदर जा सकता है। इतना ही नहीं, यह आंख, नाक या मुंह के जरिए भी शरीर में प्रवेश कर सकता है। इसलिए बारिश के पानी को सिर्फ सामान्य पानी समझने की गलती नहीं करनी चाहिए।
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शुरुआत में साधारण बुखार जैसा लगता है
इस बीमारी की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण बिल्कुल आम बुखार जैसे होते हैं। संक्रमित पानी के संपर्क में आने के 2 से 14 दिन के भीतर तेज बुखार, सिरदर्द, खासकर पिंडलियों में दर्द, आंखों का लाल होना, ठंड लगना, उल्टी, जी मिचलाना और बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो सकती है।
डॉ. संजय रैना कहते हैं कि कई लोग इन लक्षणों को वायरल बुखार समझकर दवा खा लेते हैं और डॉक्टर को यह नहीं बताते कि वे हाल ही में बारिश के गंदे पानी में चले थे। यही गलती बीमारी को गंभीर बना सकती है।
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इलाज में देरी करना पड़ सकता है भारी
अगर समय पर इलाज शुरू न हो, तो यह संक्रमण शरीर के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। इससे किडनी और लिवर पर असर पड़ सकता है। कुछ मामलों में फेफड़ों में भी गंभीर परेशानी हो सकती है और मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है।
हालांकि राहत की बात यह है कि अगर बीमारी की पहचान शुरुआत में ही हो जाए, तो इसका इलाज संभव है। इसलिए लक्षण दिखने पर इंतजार करने के बजाय डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना सबसे समझदारी है।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?
बारिश के मौसम में वैसे तो हर किसी को सतर्क रहना चाहिए, लेकिन कुछ लोगों में खतरा ज्यादा होता है। जैसे सफाई कर्मचारी, सीवर में काम करने वाले लोग, किसान, नगर निगम के कर्मचारी, राहत कार्य में लगे लोग और वे सभी जिन्हें रोजाना बारिश या बाढ़ के पानी में उतरना पड़ता है। अगर आपका काम भी ऐसा है, तो छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी बन सकती है।
बारिश में खुद को ऐसे रखें सुरक्षित
डॉ. संजय रैना सलाह देते हैं कि जहां तक हो सके, गंदे और रुके हुए पानी में चलने से बचें। अगर जाना जरूरी हो, तो वाटरप्रूफ जूते पहनें। शरीर पर कहीं कट या घाव हो तो उसे अच्छी तरह ढक लें। घर पहुंचने के बाद हाथ-पैर और शरीर को साबुन व साफ पानी से अच्छी तरह धोएं और गीले कपड़े तुरंत बदल लें।
अगर बारिश के गंदे पानी में चलने के बाद अगले दो हफ्तों के भीतर बुखार, तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द या फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए डॉक्टर के पास जाएं। साथ ही उन्हें यह जरूर बताएं कि आप हाल ही में बारिश या बाढ़ के पानी के संपर्क में आए थे। यह छोटी-सी जानकारी सही समय पर सही इलाज शुरू कराने में बहुत मदद कर सकती है।
