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महंगे फेशवॉस के जगह इस्तेमाल करें ये देसी उबटन, घर बैठे मिलेगी सॉफ्ट और ग्लोइंग स्किन

स्किन केयर प्रोडक्ट्स के नाम पर लोग तमाम तरह के महंगे महंगे फेशवॉश और साबुन का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ देसी चीजें आपकी स्किन का ख्याल ज्यादा बेहतर रख सकती हैं। जी हां आज हम आपको एक ऐसे ही देसी उबटन के बारे में बताने जा रहे हैं।

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homemade skin care product

आयुर्वेद में शरीर और त्वचा की देखभाल के लिए प्राकृतिक उपायों को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। आधुनिक समय में जहां लोग कठोर रसायनों से बने साबुन और ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर निर्भर होते जा रहे हैं, वहीं आयुर्वेद हमें याद दिलाता है कि असली सुंदरता प्रकृति की गोद में छिपी है। खासकर उबटन का उपयोग सदियों से भारतीय परंपरा का हिस्सा रहा है। यह केवल एक सौंदर्य प्रसाधन नहीं, बल्कि त्वचा की संपूर्ण देखभाल का वैज्ञानिक और प्राकृतिक तरीका है। साबुन त्वचा की सतह से गंदगी तो हटा देता है, लेकिन उसके साथ ही यह त्वचा के प्राकृतिक तेल और नमी को भी खत्म कर देता है। इससे त्वचा रूखी, बेजान और कई बार संवेदनशील हो जाती है तो वहीं उबटन पीएच-फ्रेंडली होता है और त्वचा के नैचुरल ऑयल को सुरक्षित रखता है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके इस्तेमाल से त्वचा साफ, मुलायम और चमकदार बनती है, बिना किसी केमिकल अवशेष के।

कैसे तैयार करें उबटन?

उबटन बनाने के लिए कई प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। इनमें से कुछ प्रमुख हैं जैसे बेसन, हल्दी, चंदन और दूध। उबटन बनाने के लिए सबसे पहले सभी सामग्रियों को मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें। पेस्ट को अपनी त्वचा पर हल्के हाथों से मालिश करें और फिर पानी से धोकर साफ कर लें। आपको बिना किसी रासायनिक अवशेष के एक मुलायम, चमकदार रंगत दिखाई देगी।

क्या कहता है आयुर्वेद

आयुर्वेद की मानें तो बेसन त्वचा की गहराई से सफाई करता है और डेड स्किन को हटाता है। हल्दी में एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो त्वचा को संक्रमण से बचाते हैं और नैचुरल ग्लो देते हैं। चंदन से त्वचा को ठंडक मिलती है। वहीं दूध में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को नमी प्रदान करता है और टैनिंग का काम करता है। उबटन का नियमित इस्तेमाल त्वचा को डिटॉक्सिफाई करने में मदद करता है। यह त्वचा की सतह से धूल-मिट्टी, प्रदूषण और डेड सेल्स को हटाकर नई कोशिकाओं को पुनर्जीवित करता है। खास बात यह है कि उबटन पूरी तरह प्राकृतिक होता है, इसलिए इसके इस्तेमाल से किसी भी प्रकार के साइड इफेक्ट की संभावना बेहद कम रहती है।

इनपुट - आईएएनएस

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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