Can Hair Transplant Cause Death In Hindi: आजकल झड़ते बाल और समय से पहले गंजापन युवाओं में भी आम समस्या बन चुकी है। सोशल मीडिया और फेशियल लुक्स के बढ़ते ट्रेंड के चलते लोग कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में हेयर ट्रांसप्लांट एक लोकप्रिय विकल्प बन चुका है। लेकिन हाल ही में एक चौंकाने वाली खबर ने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है।
कानपुर के पनकी पावर हाउस में कार्यरत 37 वर्षीय असिस्टेंट इंजीनियर विनीत दुबे की हेयर ट्रांसप्लांट के दौरान मौत हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही उन्हें एक प्राइवेट क्लिनिक में इंजेक्शन दिया गया, उनका चेहरा सूजने लगा और तबीयत बिगड़ती चली गई। यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या हेयर ट्रांसप्लांट हर किसी के लिए सुरक्षित है? क्या सिर्फ गंजापन ही इसका कारण होना चाहिए या पूरी सेहत की जांच भी जरूरी है? चलिए विषय पर डॉक्टर से जानते हैं सबकुछ।
क्या है डॉक्टर की राय
इस पूरे विषय पर अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद की डॉ. विचित्रा शर्मा (सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी) का कहना है, "हेयर ट्रांसप्लांट एक सर्जिकल प्रोसीजर है, इसे सिर्फ ब्यूटी ट्रीटमेंट समझना खतरनाक हो सकता है। इसके लिए क्लीनिकल असेसमेंट, मेडिकल हिस्ट्री और इमरजेंसी की तैयारी बेहद जरूरी होती है।" इसके अलावा डॉक्टर ने कुछ इससे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी भी हमारे साथ शेयर की।

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हेयर ट्रांसप्लांट नहीं कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट
बहुत से लोग हेयर ट्रांसप्लांट को आसान और कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट समझते हैं, लेकिन सच्चाई ये है कि इसमें सर्जिकल टूल्स, लोकल एनेस्थीसिया और डॉक्टर की निगरानी जरूरी होती है। यानी ये मेडिकल प्रक्रिया है, जिसे हल्के में लेना जानलेवा साबित हो सकता है।
किन लोगों के लिए हेयर ट्रांसप्लांट खतरनाक हो सकता है?
1. दिल और डायबिटीज के मरीज
डॉ. विचित्रा शर्मा कहती हैं, “अगर किसी को हार्ट डिजीज या अनकंट्रोल्ड डायबिटीज है, तो हेयर ट्रांसप्लांट उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है। लोकल एनेस्थीसिया में मौजूद एपिनेफ्रिन जैसे तत्व दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर पर असर डाल सकते हैं।”
2. ब्लड थिनर लेने वाले मरीज
जो लोग वॉरफरिन, एस्पिरिन या अन्य ब्लड थिनिंग दवाएं लेते हैं, उनके शरीर में सर्जरी के दौरान अधिक ब्लीडिंग और धीमा रिकवरी प्रोसेस हो सकता है। इसीलिए, डॉक्टर पहले ब्लड क्लॉटिंग प्रोफाइल (PT, INR, Platelet Count) की जांच करने की सलाह देते हैं।
3. सिर की स्किन डिजीज या एलर्जी वाले लोग
डॉ. शर्मा बताती हैं कि “जिन लोगों को स्कैल्प पर एक्जिमा, एलर्जी या ऑटोइम्यून डिसऑर्डर (जैसे लिचन प्लेनोपिलारिस या लुपस) है, उनमें हेयर ट्रांसप्लांट से स्थिति और बिगड़ सकती है। इन रोगों में स्किन पहले ही संवेदनशील होती है।”

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4. एनेस्थीसिया से एलर्जी
कुछ लोगों को लिडोकेन या अन्य लोकल एनेस्थेटिक दवाओं से एलर्जी होती है, जिससे एनाफिलैक्टिक रिएक्शन (तेज सूजन, सांस फूलना, बेहोशी) हो सकता है। ऐसे मरीजों के लिए स्किन पैच टेस्ट और इमरजेंसी तैयारी अनिवार्य है।
5. मानसिक तनाव या BDD वाले लोग
डॉ. शर्मा कहती हैं कि “जिन मरीजों को बॉडी डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर होता है, वो बार-बार सर्जरी कराना चाहते हैं लेकिन कभी संतुष्ट नहीं होते। इनके लिए पहले मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी होता है।”
हर साल लाखों ट्रांसप्लांट, लेकिन कितने सुरक्षित?
भारत में हर साल लगभग 1.5 से 2 लाख हेयर ट्रांसप्लांट किए जाते हैं। लेकिन चिंताजनक बात ये है कि इनमें से कई ऑपरेशन बिना प्रशिक्षित डॉक्टर या सर्टिफाइड डर्मेटोलॉजिस्ट की निगरानी में होते हैं। डॉ. शर्मा बताती हैं, “लाइसेंस और मेडिकल ट्रेनिंग के बिना सर्जरी करना एक गंभीर अपराध है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण मरीज इन जगहों का रुख कर लेते हैं।”
बाल लगवाने से पहले ये सावधानियां जरूरी हैं
- हेल्थ चेकअप करवाएं - ब्लड शुगर, बीपी, ब्लड क्लॉटिंग टेस्ट
- स्किन और एलर्जी टेस्ट जरूर कराएं
- मानसिक स्थिति का आंकलन करें अगर जरूरत हो
- सिर्फ सर्टिफाइड डॉक्टर और रजिस्टर्ड क्लिनिक ही चुनें
- सस्ते ऑफर और अनजान क्लिनिक से बचें
निष्कर्ष
हेयर ट्रांसप्लांट जरूर आपकी खूबसूरती लौटा सकता है, लेकिन इसे करवाने से पहले यह जानना जरूरी है कि आपकी सेहत इस प्रक्रिया के लायक है या नहीं। किसी भी कॉस्मेटिक प्रोसीजर से पहले संपूर्ण मेडिकल चेकअप और एक्सपर्ट की सलाह बेहद जरूरी है।
जैसा कि डॉ. विचित्रा शर्मा कहती हैं, “सिर्फ लुक्स नहीं, लाइफ भी जरूरी है। मरीज और डॉक्टर दोनों की जिम्मेदारी है कि ऐसी दुखद घटनाएं दोबारा न हों।”
