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गंदी हवा बन रही है मीठी बीमारी की वजह, कैसे सांस के साथ प्रदूषण अब बढ़ा रहा ब्लड शुगर लेवल, जान लीजिए

Pollution Could Be Raise Blood Sugar: प्रदूषण में सांस लेना हमारे फेफड़ों के लिए कितना खतरनाक है यह तो हम सभी अच्छी तरह जानते हैं। लेकिन अब सिर्फ यह सांस संबंधी और फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं तक ही सीमित नहीं रह गया है। बता दें कि हालिया अध्ययन में यह पाया गया है कि प्रदूषित हवा में सांस लेने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ने की समस्या यानी डायबिटीज भी हो सकती है। तो इसका मतलतब है कि गंदी हवा सिर्फ फेफड़ों को नहीं, अब ब्लड शुगर को भी प्रभावित कर रही है। चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं....

Pollution Could Be Raise Blood Sugar

Pollution Could Be Raise Blood Sugar

Pollution Could Be Raise Blood Sugar: हम में से शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि रोज वो हवा जो हम सांस में भरते हैं, सिर्फ खांसी-जुकाम का कारण नहीं बल्कि ब्लड शुगर यानी शुगर लेवल को भी बढ़ा सकती है। शहरों में धुंध, धूल, वाहन व फैक्ट्री का धुआं, बड़े-छोटे पार्टिकुलेट्स (जैसे PM2.5) हवा में छा जाते हैं और हमारी कोशिकाओं तक पहुंचकर चुपके से हमारी इन्सुलिन प्रतिक्रिया को प्रभावित करते हैं। हाल ही में भारत के अलग-अलग अध्ययन में यह पाया गया है कि वायु प्रदूषण और टाइप 2 डायबिटीज के बढ़ते मामलों के बीच पक्का रिश्ता है। इस लेख में हम यह जानेंगे कि गंदी हवा कैसे मीठी बीमारी यानि शुगर का कारण बन सकती है, किन-किन माध्यमों से असर करती है, और क्या कदम उठा सकते हैं हम अपनी रक्षा के लिए।

हवा में प्रदूषण और ब्लड शुगर के बीच क्या कनेक्शन है

हवा में मौजूद बहुत छोटे कण जैसे PM2.5 बहुत खतरनाक होते हैं, क्योंकि ये सीधे फेफड़ों में जाकर खून में प्रवेश कर सकते हैं। भारत में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि दस माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (µg/m³) के अतिरिक्त PM2.5 के संपर्क में आने पर टाइप 2 डायबिटीज का खतरा लगभग 22 प्रतिशत तक बढ़ गया था।

इसका मतलब साफ है कि गंदी हवा सिर्फ सांस लेने में दिक्कत नहीं करती, ये हमारी मेटाबॉलिज्म और इन्सुलिन सेंसिटिविटी पर भी असर डाल सकती है।

इन्सुलिन रेसिस्टेंस और सूजन की बड़ी वजह

जब हम प्रदूषित हवा सांस लेते हैं, तो हमारे शरीर में सूजन (inflammation) और ऑक्सीडेटिव तनाव (oxidative stress) बढ़ जाता है। ये बदलाव पैंक्रियास (insulin बनाने वाली ग्रंथि) के लिए मुश्किल खड़ी कर देते हैं। इन्सुलिन प्रतिक्रिया कमजोर होती जाती है, यानी शरीर जिस तरह ग्लूकोज (शुगर) को कोशिकाओं में भेजने के लिए इन्सुलिन का उपयोग करता है, वो प्रक्रिया ठीक-ठीक नहीं हो पाती। ऐसा होने से फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज और HbA1c (तीन-चार महीने का औसत शुगर) बढ़ सकते हैं।

शहरी लोगों के लिए खतरा अधिक

हमारे देश में शहरों में वाहनों की संख्या, इंडस्ट्रियों का प्रसरण, कृषि से बचे अवशेषों के जलने जैसे कई कारण हैं जो हवा को बेहद प्रदूषित करते हैं। उदाहरण के तौर पर दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता बहुत कमजोर पाई गई है।

इसलिए ये क्षेत्र डायबिटीज के खतरे में पहले से खड़े हैं। यदि आपने शहर-वासी जीवन अपनाया है, तो यह जानना जरूरी है कि सिर्फ मोटापा-अम्लता-कम हिस्ट्री ही शुगर को बढ़ाती नहीं बल्कि इस तरह का प्रदूषण भी उस खतरे को बढ़ा रहा है।

गंदी हवा से बचने के लिए सरल कदम

यह जानना एक बात है और उस पर कदम उठाना दूसरी। हालांकि पूरी तरह प्रदूषण से बच पाना मुश्किल है, लेकिन कुछ सुझाव हैं जो मदद कर सकते हैं,

  • जब AQI हाई हो, तब बाहर निकलने से बचें या N95 जैसी मास्क लगाएं।
  • घर के अंदर एयर प्यूरिफायर रखें या कम-से-कम खिड़कियां थोड़ी बंद रखें जब धूल-धुंआ ज्यादा हो।
  • नियमित रूप से शुगर-चेक और HbA1c टेस्ट करवाते रहें क्योंकि आप विचार कर सकते हैं कि हवा का असर आपका शुगर बढ़ा सकती है।
  • स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं: पौष्टिक आहार, नियमित एक्सर्साइज व पर्याप्त नींद। ये सब इन्सुलिन सेंसिटिविटी बेहतर करने में मदद करते हैं।

गांध बांध लें ये बात

अध्ययनों ने स्पष्ट किया है कि केवल जीवनशैली बदलने से काम नहीं चलेगा हमें सामाजिक स्तर पर वायु-प्रदूषण पर भी नियंत्रण चाहिए। उदाहरण के तौर पर, अगर पीएम2.5 में मात्र 30 प्रतिशत की कमी लाया जाए तो महिलाओं में डायबिटीज का प्रतिशत कम हो सकता है।

इसलिए यह सिर्फ व्यक्तिगत मामला नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का बड़ा मुद्दा भी है। आपकी जागरूकता, मास्क-उपयोग, एवं घर-परिवेश की सफाई मिलकर उस दिशा में काम करती है।

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विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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