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भूटान में सिर्फ 6 घंटे में कैसे बने 108 बौद्ध स्तूप? जानिए PM मोदी वाले 76वें स्तूप की पूरी कहानी

Bhutan PM Modi Stupa: भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में बनाए गए 108 पवित्र बौद्ध स्तूपों में से 76वें स्तूप को प्रधानमंत्री मोदी को समर्पित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस सम्मान पर अपनी भावना व्यक्त की।

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76वां स्तूप (फोटो साभार- @KirenRijiju/AI)

Bhutan PM Modi Stupa: भूटान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऐसा सम्मान दिया है, जो इससे पहले किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री को नहीं मिला। भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में बनाए गए 108 पवित्र बौद्ध स्तूपों में से एक खास स्तूप को प्रधानमंत्री मोदी को समर्पित किया है। यह 76वां स्तूप है, जिसे अब हमेशा के लिए पीएम मोदी के नाम से जाना जाएगा। भूटान के राजा ने सोशल मीडिया पर इस ऐतिहासिक पल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह विशेष समर्पण सोमवार को तब किया गया, जब गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में 108 स्तूपों का निर्माण पूरा हो गया। इस अवसर पर भूटान के राजा और भारत के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने संयुक्त रूप से एक विशेष तख्ती का अनावरण किया। इसी तख्ती पर 76वें स्तूप को पीएम मोदी को समर्पित किए जाने का उल्लेख है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस सम्मान पर अपनी भावना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वे भूटान के राजा और भूटान की जनता की गर्मजोशी और उदारता के इस भाव से गहराई से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि मैं इसे भारत के लोगों की ओर से गहरी कृतज्ञता के साथ स्वीकार करता हूं। यह जंगचुब चोर्टेन हमारी साझा आध्यात्मिक और सभ्यतागत विरासत और हमारे लोगों के बीच दोस्ती के विशेष बंधन का एक स्थायी प्रतीक बना रहेगा।

6 घंटे में बने 108 स्तूप

इन 108 स्तूपों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि भूटान ने 1 नवंबर 2026 को मात्र 6 घंटे के भीतर सभी 108 बौद्ध स्तूपों का निर्माण कर इतिहास रच दिया। भूटान में इन स्तूपों को स्थानीय भाषा में 'जंगचुब चोर्टेन' कहा जाता है। 108 स्तूपों का एक साथ बनना सिर्फ निर्माण का काम नहीं था, बल्कि यह एक आध्यात्मिक अनुष्ठान था। सैकड़ों भिक्षुओं, कारीगरों, स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों ने मिलकर इस काम को पूरा किया। भूटान की परंपरा में इस तरह का सामूहिक निर्माण शांति, समृद्धि और सद्भावना का प्रतीक माना जाता है। बता दें कि 'गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी' भूटान के राजा का ड्रीम प्रोजेक्ट है। यह एक ऐसा शहर होगा, जो भूटान की पारंपरिक आध्यात्मिकता और ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस की अवधारणा को आधुनिक इनोवेशन, ग्रीन टेक्नोलॉजी और आर्थिक विकास के साथ जोड़कर बनाएगा। इन 108 स्तूपों का निर्माण इसी शहर की आध्यात्मिक नींव रखने के लिए किया गया।

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भूटान ने पीएम मोदी को समर्पित किया 76वां स्तूप (फोटो साभार- @KirenRijiju)

76वें स्तूप की खासियत

भूटान द्वारा बनाए गए इन 108 पवित्र स्तूपों में से 76वें स्तूप को विशेष तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित किया गया है। सवाल उठता है कि आखिर 76वां स्तूप ही क्यों? भूटान के शाही सूत्रों के अनुसार, यह स्तूप गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी के केंद्रीय क्षेत्र में स्थित है, जहां से पूरे शहर की आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह माना जाता है। इस स्तूप को समर्पित करने का मुख्य उद्देश्य भारत और भूटान के बीच सदियों पुराने, गहरे आध्यात्मिक और सभ्यतागत संबंधों को और अधिक मजबूत करना है। भूटान के राजा ने अपने संदेश में कहा कि यह समर्पण पीएम मोदी की अटूट प्रतिबद्धता और गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी के उनके विजन को साकार करने के लिए भारत के दृढ़ समर्थन के प्रति उनके गहरे आभार का एक स्थायी प्रतीक है। यानी यह सम्मान सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं दिया गया, बल्कि भारत के उस योगदान को दिया गया है, जो भारत ने भूटान के इस सबसे बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने में दिया है। भारत ने गेलेफू सिटी के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी मदद, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग में अहम भूमिका निभाई है।

बौद्ध धर्म में 108 संख्या का महत्व

बौद्ध धर्म, सनातन संस्कृति और तिब्बती परंपराओं में '108' अंक को बेहद पवित्र, शुभ और आध्यात्मिक रूप से पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। बौद्ध मान्यता के अनुसार, मनुष्य के मन में 108 तरह की अशुद्धियां और विकार होते हैं, जिनसे मुक्ति के लिए 108 बार मंत्र जाप किया जाता है। जाप माला में भी 108 मनके होते हैं। इसीलिए भूटान में शांति, समृद्धि और सद्भावना के लिए एक साथ 108 स्तूपों का निर्माण किया गया। हर स्तूप में पवित्र मंत्र, धार्मिक ग्रंथ और पवित्र अवशेष रखे गए हैं। स्तूप बौद्ध वास्तुकला में एक पवित्र स्मारक होता है, जिसे चोर्टेन भी कहा जाता है। यह गुंबदनुमा, अर्धगोलाकार ढांचा होता है, जिसे भगवान बुद्ध के प्रबुद्ध मन का प्रतीक माना जाता है। स्तूप शांति, करुणा, बुद्ध की शिक्षाओं और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। बौद्ध अनुयायी स्तूप की परिक्रमा करते हैं और उसे ज्ञान प्राप्ति का मार्ग मानते हैं। वहीं जंगचुब चोर्टेन का अर्थ होता है- ज्ञान प्राप्ति का स्तूप। यह स्तूप बोधिचित्त यानी सभी प्राणियों के कल्याण के लिए ज्ञान प्राप्त करने की भावना का प्रतीक है।

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भूटान 108 स्तूप (फोटो साभार- @KirenRijiju)

गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी क्या है?

गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी भूटान के दक्षिण में भारत की सीमा के पास बन रहा एक नया शहर है। यह भूटान के राजा की परिकल्पना है। इस शहर को भूटान के भविष्य की आर्थिक राजधानी के रूप में देखा जा रहा है। इस शहर की खासियत यह है कि यह पूरी तरह से ग्रीन, सस्टेनेबल और माइंडफुलनेस पर आधारित होगा। यहां कोई भारी प्रदूषणकारी उद्योग नहीं होगा। यहां ध्यान, योग, आध्यात्मिकता, ग्रीन टेक्नोलॉजी, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। भारत के असम और पश्चिम बंगाल से इसकी सीधी कनेक्टिविटी होगी। भारत इस प्रोजेक्ट को लेकर भूटान का सबसे बड़ा साझेदार है। भारत ने इस शहर के लिए सड़क, रेल, एयरपोर्ट, पावर और डिजिटल कनेक्टिविटी में मदद का भरोसा दिया है। यही वजह है कि भूटान के राजा ने पीएम मोदी को इस शहर के सबसे पवित्र निर्माण में जगह दी।

Aditya Sahu
आदित्य साहूauthor

आदित्य साहू टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स और ट्रेडिंग कंटेंट लिखतें हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के बाद वह पिछले 10 सालों से मीडिया में सक्रिय हैं। स्पोर्ट्स इवेंट की रियल टाइम कवरेज, डाटा टॉपिक्स और अनोखे कंटेंट आइडियाज को आकर्षक और एंगेजिंग तरीके से प्रस्तुत करना आदित्य की खासियत है। उनकी कॉपी राइटिंग और इंटरेस्टिंग हेडलाइन बनाने की क्षमता उन्हें डिजिटल दुनिया में अलग पहचान देती है। 15,000 से अधिक बायलाइन स्टोरी पब्लिश कर चुके आदित्य का लक्ष्य हर खबर को यूनिक एंगल और स्टोरीटेलिंग के रोचक अंदाज में पेश करना है।

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