Monsoon: इस बार मानसून ने एक हफ्ते की देरी से दस्तक दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 8 जून को कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल तट पर पहुंच गया है। साल 2016, 2019 और इस साल 2023 में पिछले कुछ दशकों में मानसून की शुरुआत में सबसे अधिक देरी से हुई है। बाकी दो वर्षों में भी 8 जून को केरल तट पर बारिश हुई थी। 2022 में मानसून अपनी अपेक्षित तारीख से पहले 29 मई को केरल तट पर पहुंचा था।
केरल तट पर मानसून की शुरुआत का क्या अर्थ है?
केरल में मानसून की शुरुआत चार महीने (जून-सितंबर) के दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम की शुरुआत का संकेत देती है, जिसके दौरान भारत अपनी वार्षिक वर्षा का 70% से अधिक प्राप्त करता है। यह देश के आर्थिक कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण दिन है। मानसून के देरी से आगमन से कई चिंताएं पैदा हो गई हैं। साथ ही सामान्य से अधिक गर्म मौसम ने भी चिंता बढ़ाई है।
मानसून से जुड़ी कुछ अहम बातें
- मानसून आम तौर पर 1 जून को केरल तट से टकराता है। इस साल, मौसम कार्यालय ने तीन दिन की देरी की भविष्यवाणी की थी। 4 जून को दक्षिण-पश्चिम तट पर बारिश होने की उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
- भारत एक बड़े पैमाने पर कृषि अर्थव्यवस्था है और इसलिए बारिश पर पूरी तरह निर्भर हैं। मानसून में देरी, जो देश की वार्षिक वर्षा का लगभग 75 प्रतिशत लाती है, कृषि भूमि के लिए कठिनाइयों का कारण बन सकती है। इससे उपज पर सीधा असर पड़ेगा। नतीजतन आम आदमी को महंगाई भी झेलनी होगी।
- केरल में मानसून की शुरुआत भारत में चार महीने, जून-सितंबर, दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है। केरल में इसकी शुरुआत के बाद मानसून 15 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है।
- दक्षिण-पश्चिम मानसून का बेसब्री से इंतजार किया जाता है और आईएमडी अच्छी तरह से परिभाषित और योग्य मापदंडों को पूरा करने के बाद ही इसके आगमन की घोषणा करता है। मौसम विज्ञानी इसकी तीव्रता और हवा की गति पर बारिश की संभावना की जांच करते हैं।
9 केंद्रों में 2.5 मिमी बारिश जरूरी
बारिश की शुरुआत (Onset) की घोषणा तब की जाती है जब केरल तट पर 14 चयनित मौसम विज्ञान केंद्रों में से कम से कम 60 प्रतिशत, यानी उनमें से कम से कम नौ लगातार दो दिनों में कम से कम 2.5 मिमी वर्षा प्राप्त करते हैं। इसकी शुरुआत चार महीने के मानसून के मौसम की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है जो भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 75 प्रतिशत लाता है।
लेकिन यह शुरुआत एक 'सॉफ्ट लैंडिंग' की तरह होने की संभावना है और अरब सागर में चक्रवात बिपरजॉय के विकास के कारण मानसून के कम से कम एक और सप्ताह तक कमजोर रहने की उम्मीद है। सामान्य तौर पर मानसून 10 जून तक अधिकांश दक्षिणी भारत और कम से कम आधे महाराष्ट्र में फैल जाता है। अभी तक मानसून की उत्तरी सीमा दक्षिण में मध्य श्रीलंका तक बनी हुई है।
