Private Military Contractor: रविवार को वैगनर ग्रुप अचानक से चर्चा में आ गया। इस प्राइवेट आर्मी के प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन ने रोस्तोव शहर पर नियंत्रण करने के बाद उसने मास्को की तरफ बढ़ने की घोषणा की और धमकी दी कि उसके रास्ते में जो कोई भी आएगा उसे वह तबाह एवं बर्बाद कर देगा। रूस के कई शहरों में उसके लड़ाके दाखिल होना शुरू हुए। हालांकि, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद प्रिगोझिन ने अपना इरादा बदल दिया। रिपोर्टों के मुताबिक बेलारूस के राष्ट्रपति के दखल के बाद वैगनर ग्रुप के तेवर शांत पड़ गए और उसने वापस बेलारूस जाने की घोषणा की।
2014 में अस्तित्व में आया वैगनर ग्रुप
दो दिन पहले तक गुमनाम रहने वाला पिगोझिन रूस की सेना को ललकारने के बाद अचानक से चर्चा में आ गया लेकिन इसका संगठन वैगनर पुराना है। इससे पहले वैगनर ग्रुप यूक्रेन के बाखमुत शहर पर कब्जा करने के बाद सुर्खियों में आया था। इसका गठन 2014 में क्रीमिया युद्ध के समय हुआ। बताया जाता है कि क्रीमिया को रूस में मिलाने में प्रिगोझिन के इस समूह की भी भूमिका रही। इसके बाद यह ग्रुप कई वर्षों तक गुमनामी में रहा।

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रूसी रक्षा मंत्री एवं जनरलों से नाराज है प्रिगोझिन
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह एक बार फिर चर्चा में आया। यह समूह रूसी सेना के साथ यूक्रेन के मोर्चों पर लड़ता आया है। भाड़े के इन सैनिकों की रसद, गोला-बारूद, हथियारों एवं भारी रकम की आपूर्ति रूस की ओर से की जाती रही है। रूसी सेना की तरफ से लड़ने वाला प्रिगोझिन पुतिन के खिलाफ क्यों हो गया। तो इसके पीछे उसने रूसी रक्षा मंत्री एवं जनरलों की कार्यशैली को उत्तरदायी बताया। प्रिगोझिन का कहना है कि रूसी सेना उसे समय पर हथियार एवं गोला-बारूद की सप्लाई नहीं करती। इसकी वजह से उसके लड़ाकों की अपनी जान गंवानी पड़ती है। उसका दावा है कि एक ट्रेनिंग कैंप पर रूसी सेना की तरफ से मिसाइल हमला हुआ जिसमें उसके कई लड़ाके मारे गए।

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दुनिया भर में हैं वैगनर ग्रुप जैसे लड़ाके
वैगनर ग्रुप की तरह दुनिया में ऐसे कई छोटे और बड़े प्राइवेट मिलिट्री कॉन्ट्रैक्टर (PMC) हैं जो पैसों के लिए दुनिया के युद्धग्रस्त एवं संकटग्रस्त हिस्सों में मिशन चला रहे हैं। इनमें से कुछ पीएमसी को अमेरिका, रूस और ब्रिटेन जैसे ताकतवर देशों का समर्थन मिला हुआ है तो कुछ अफ्रीका के देशों के लिए काम कर रहे हैं। भाड़े के इन सैनिकों पर आरोप है कि ये जहां लड़ते हैं वहां मानवाधिकारों का भयंकर उल्लंघन करते हैं।
इनका इमान केवल पैसा होता है
ये हिंसा, रक्तपात, व्यभिचार, अत्याचार एवं उत्पीड़न की पराकाष्ठा को पार कर जाते हैं। ये चूंकि किसी के प्रति जवाबदेह नहीं होते इसलिए अपने प्रमुख को छोड़कर किसी की नहीं सुनते। ये दुनिया भर के सभी गंदे काम, जानलेवा हमले करने के लिए जाने जाते हैं। इनके बारे में सार्वजनिक रूप से ज्यादा जानकारी नहीं होती। इस तरह के बेलगाम समूह दुनिया भर में खतरनाक चीजें कर रहे हैं। इनके लिए नैतिकता, नियम, वसूल कुछ भी काम नहीं करता। इनका इमान केवल पैसा होता है।

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यूएस का ब्लैकवाटर सबसे कुख्यात PMC
रिपोर्टों की मानें तो ब्लैकवाटर दुनिया का सबसे कुख्यात PMC है। हालांकि, अब इसका विलय 'ट्रिपल कैनोपी' के साथ हो गया है। बताया जाता है कि ब्लैकवाटर अमेरिका की सबसे प्रमुख पीएमसी में से एक रही है और अमेरिकी सरकार के लिए इसने अफगानिस्तान, इराक, सीरिया, लीबिया, बोस्निया और दुनिया के अन्य युद्धग्रस्त क्षेत्रों में बड़े मिशन को अंजाम दिया। ब्लैकवाटर के बारे में यह भी कहा जाता है कि यह दुनिया की सबसे एडवांस्ट पीएमसी है। इसके पास अपने मिलिट्री एयरक्राफ्ट, टैंक्स, आर्टिलरी और यूएवी सहित धातक उपकरण एवं हथियार हैं। ब्लैकवाटर पर इराक में 'नीसूर स्क्वॉयर कत्लेआम' सहित मानवाधिकार उल्लंघन के कई गंभीर आरोप हैं।

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ब्लैकवाटर पर अमेरिका ने की दिखावे की कार्रवाई
हैरान करने वाली बात यह है कि इराक में मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन करने के बाद भी ब्लैकवाटर पर अमेरिका में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इराक से अमेरिका लौटन के बाद इस ग्रुप के कुछ सदस्यों पर अभियोग चलाकर जेल में डाला गया लेकिन बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति इन खूंखार अपराधियों को क्षमादान दे दिया।

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अफ्रीका के कई देशों में हैं वैगनर के लड़ाके
अभी की बात करें तो रूस की वैगनर ग्रुप को दुनिया की सबसे बड़ी पीएमसी कहा जाता है। इसके पास करीब 60,000 लड़ाके हैं और यह कई देशों में तैनात हैं। ये सीरिया, सूडान, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक (सीएआर), मेडागास्कर, वेनेजुएला, लीबिया, मोजाम्बिक, बाली, बेलारूस, बुर्किना फासो, चाड, मोल्डोवा एवं सर्बिया में मिशन चला रहे हैं। अर्मेनिया एवं अजरबैजान की लड़ाई में भी ये सक्रिय रहे। ब्लैकवाटर की तरह इन पर मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन के आरोप लगते आए हैं। वैगनर ग्रुप अपने समूह में खूंखार अपराधियों, रिटायर्ड फौजियों एवं बेरोजगारों की भर्ती करता है। संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध के बावजूद यह ग्रुप अपना आकार तेजी से बड़ा कर रहा है।
