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Kerala Election: केरल में किसकी सरकार? होगा सत्ता में बदलाव या जारी रहेगा पिनराई का विजय अभियान?

Kerla Election 2026: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाली सत्ताधारी एलडीएफ, शासन के "पिनराई मॉडल" को मजबूत करने के लिए रिकॉर्ड तीसरी बार लगातार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है।

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केरल में किसकी सरकार? (AI Photo)

Kerla Election 2026: आज हो रहे मतदान के साथ ही केरल का राजनीतिक माहौल एक तनावपूर्ण गतिरोध में तब्दील हो चुका है। एक ओर वामपंथी दल सीएम पिनाराई विजयन की अगुवाई में ऐतिहासिक "तिहरी" जीत हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष बदलाव के लिए जोरदार प्रयास कर रहा है। सत्ताधारी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) ऐतिहासिक तीसरी बार सत्ता में आने की उम्मीद कर रहा है, वहीं संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) वापसी की कोशिश में जुटा है। वहीं, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) इस दोध्रुवीय रुझान को तोड़ने का प्रयास कर रहा है। क्या कहा रहा है केरल का सियासी समीकरण, समझते हैं।

मुख्य मुद्दे क्या हैं?

एलडीएफ: सत्ता में बने रहने का प्रयास

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाली सत्ताधारी एलडीएफ, शासन के "पिनाराई मॉडल" को मजबूत करने के लिए रिकॉर्ड तीसरी बार लगातार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है। यह कल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता (सामाजिक सुरक्षा पेंशन), विझिंजम बंदरगाह जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी उपलब्धियों और स्थिरता की जनहितैषी छवि पर भरोसा कर रही है। अनुभव और विश्वसनीयता दिखाने के लिए उन्होंने ज्यादातर मौजूदा विधायकों को ही बरकरार रखा है।

यूडीएफ: बदलाव की कहानी

कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ का लक्ष्य केरल में हर पांच साल में सरकार बदलने की ऐतिहासिक प्रणाली का हवाला देते हुए सत्ता पर फिर से कब्जा करना है। एक दशक के वामपंथी शासन के बाद यूडीएफ सत्ता-विरोधी लहर पर भरोसा कर रहा है। साथ ही सरकार की कमियों को उजागर कर रहा है, जिसमें प्रशासनिक थकान, वित्तीय संकट (बढ़ता राज्य ऋण) और सोने की तस्करी घोटालों जैसे भ्रष्टाचार के आरोप शामिल हैं। वे अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के मिश्रण के साथ इसे सुधार का समय बता रहे हैं।

एनडीए: तीसरी शक्ति बनने का लक्ष्य

भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का लक्ष्य पारंपरिक द्विध्रुवीय प्रतिस्पर्धा को चुनौती देकर एक निर्णायक तीसरी शक्ति के रूप में उभरना है। "विकसित केरलम" की थीम को अपनाते हुए एनडीए युवा पलायन को रोकने के लिए रोजगार सृजन और केंद्र सरकार द्वारा समर्थित बुनियादी ढांचे से संबंधित वादों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। एनडीए ने सबरीमाला विकास और मंदिर प्रबंधन सुधारों जैसे मुद्दों को अपने प्रचार का केंद्र बनाया है।

सीएम विजयन ने किया मतदान

सीएम विजयन ने किया मतदान

केरल में जमीनी स्तर पर लोगों की क्या राय है?

सियासी माहौल को अनिश्चित बताया जा रहा है, जहां कुछ मतदाता स्थिरता के लिए निरंतरता पसंद कर रहे हैं, वहीं कई लोग रोजगार और सुरक्षा सहित रोजमर्रा के संघर्षों के बारे में खुलकर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव का नतीजा व्यापक लहर के बजाय कुछ चुनिंदा करीबी मुकाबले वाले निर्वाचन क्षेत्रों में छोटे बदलावों से तय हो सकता है।

चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों से पता चलता है कि मुकाबला कड़ा होता जा रहा है; कुछ अनुमानों के अनुसार, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को 77-81 सीटों के साथ मामूली बढ़त मिल रही है, जबकि अन्य अनुमानों से पता चलता है कि लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) कांटे की टक्कर में दूसरे स्थान पर बना हुआ है।

प्रमुख मुद्दे क्या हैं?

अर्थव्यवस्था: उच्च सार्वजनिक ऋण और विलंबित कल्याणकारी पेंशन एलडीएफ के मुख्य आधार को प्रभावित कर रहे हैं।

बेरोजगारी: स्नातक बेरोजगारी और इसके परिणामस्वरूप युवाओं का पलायन सभी वर्गों के लिए प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है।

सामाजिक ताना-बाना: लगभग 50 निर्वाचन क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समुदायों (मुस्लिम और ईसाई) का जुड़ाव निर्णायक कारक माना जा रहा है।

क्या सत्ता विरोधी भावना प्रबल है?

सत्ता विरोधी भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है, लेकिन इतनी प्रबल नहीं है, जिससे मुकाबला बेहद करीबी हो गया है।

अंतिम परिणाम किस बात पर निर्भर?

महत्वपूर्ण सीटों पर मामूली बदलाव और मतदान प्रतिशत यह तय कर सकते हैं कि केरल स्थिरता को चुनेगा या नए सिरे से बदलाव को। बहरहाल जनता का फैसला क्या होगा, इसका खुलासा मतगणना के दिन 4 मई को होगा।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडल author

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर... और देखें

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