Illegal infiltrators : देश से घुसपैठियों को बाहर करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठा लिया है। देश में जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का व्यापक आकलन करने के लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। यह कमेटी अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से पूरे भारत में हो रहे जनसांख्यिकी परिवर्तन का व्यापक मूल्यांकन करेगी और धार्मिक एवं सामाजिक समुदायों के स्तर पर असामान्य जनसंख्या परिवर्तनों की पद्धति का विश्लेषण करेगी। समिति इसका सुनियोजित और समयबद्ध समाधान भी प्रस्तुत करेगी। जाहिर है कि जनसांख्यकीय बदलाव को सरकार काफी गंभीरता से ले रही है। वह इस समस्या के तह में जाकर उसका स्थायी समाधान निकालेगी। सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब बंगाल में पहली बार उसकी सरकार बनी है। बंगाल की सुवेंदु सरकार बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़कर उन्हें निरूद्ध केंद्रों (डिटेंशन सेंटर) में रख रही है। इससे घुसपैठियों में भारी घबराहट देखी जा रही है।
कई तरह की समस्याएं बढ़ाते हैं घुसपैठिए
बांग्लादेशी नागरिकों और बांग्लादेश से भारत का विरोध नहीं है, उनका स्वागत है लेकिन भारत में वे वैध एवं कानूनी तरीके से आने चाहिए। भारत उन्हें आकर काम करना है तो उन्हें वीजा लेकर वैध तरीके से आना चाहिए। हर देश को अवैध लोगों को अपनी सीमा से बाहर करने का अधिकार है। इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। अवैध एवं अतिरिक्त लोग देशों की समस्याएं कई तरीके से बढ़ाते हैं। ये देशों पर अतिरिक्त बोझ होते हैं जो उस देश के वाजिब एवं वैध नागरिकों का हक मारते हैं। देश के संसाधनों पर पहला हक उस देश के नागरिकों का होता है लेकिन जब बाहरी देश के लोग गैर-कानूनी रूप से जब आ जाते हैं तो संसाधनों में असंतुलन आने लगता है।
घुसपैठिए देश के नागरिकों का हक मारते हैं
सरकारें भी अपनी नीतियों एवं जनकल्याणकारी योजना का निर्माण देश के वैध नागरिकों को ध्यान में रखकर तैयार करती हैं। घुसपैठिए रोजगार, राशन, जल, जमीन सभी में अतिक्रमण करते हैं और देश के नागरिकों का हक छीनते हैं। जिस रोजगार, राशन, भूमि, पानी, सुविधाओं पर पहला हक देश के वास्तविक लोगों का होना चाहिए वह ऐसे लोगों में बंटने लगता है जो उस देश के नागरिक नहीं हैं और जो सुविधाएं पाने के योग्य नहीं हैं। हैरान करने वाली बात है कि इनकी उस समाज के प्रति निष्ठा भी नहीं होती जहां ये अपना गुजर-बसर करते हैं एवं जिनके साथ खाते-पीते एवं उठते-बैठते हैं। सुरक्षा के लिहाज से भी ये समाज एवं सरकार के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। कई बार गंभीर से लेकर सामान्य अपराधों में इनकी भूमिका सामने आ चुकी है।
2016 में भारत में थे करीब 2 करोड़ घुसपैठिए
देश में बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या करोड़ों में है। 10 साल पहले यानी 2016 में गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने राज्यसभा को बताया था कि देश में 20 मिलियन यानी करीब दो करोड़ बांग्लादेश घुसपैठिए देश में रह रहे हैं। एक लिखित जवाब में रिजिजू ने कहा कि सरकार के पास जो जानकारी हैं उसके हिसाब से करीब 20 मिलियन बांग्लादेशी घुसपैठिए भारत में हैं। रिजिजू ने कहा कि ये बिना वैध दस्तावेज के भारत में आए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ये बांग्लादेशी घुसपैठिएं देश के अलग-अलग हिस्सों में चोरी-छिपे रह रहे हैं, ऐसे में इनकी सटीक संख्या के बारे में अभी बता पाना मुश्किल है। रिजिजू का यह बयान 2016 का है। यह 2016 है। यानी उनके इस बयान के करीब 10 साल हो चुके हैं। बंगाल में ममता सरकार के आने के बाद घुसपैठ तेजी से बढ़ी है। ऐसे में यह बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या इससे काफी ज्यादा हो चुकी होगी।
कम पैसे में काम के लिए तैयार हो जाते हैं
एक रिपोर्ट के अनुसार जिन इलाकों में अवैध बांग्लादेशी रह रहे हैं, वहां की शिक्षा व्यवस्था पर काफी दबाव पड़ रहा है। इस समस्या का उन क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में रहने वाले वैध स्थानीय मजदूरों और घुसपैठियों के बीच कम वेतन वाली नौकरियों को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। इसके कारण दिल्ली के वैध निवासियों में काफी नाराजगी है, क्योंकि उन्हें काम नहीं मिल पा रहा है। दरअसल, ये घुसपैठिए बहुत कम मजदूरी पर काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं, जिससे दिल्ली में कानूनी रूप से काम करने वाले लोगों के अवसर लगातार कम हो रहे हैं। इसका असर लोगों की आय पर भी पड़ा है, जो एक बड़ी समस्या बनती जा रही है।
फर्जी दस्तावेज पर बनवाते हैं आधार
देश के अन्य हिस्सों में घुसपैठ कैसे होती है, इसे समझने के लिए सबसे पहले घुसपैठ के रास्ते को समझना जरूरी है। बांग्लादेश से होने वाली अधिकांश घुसपैठ पश्चिम बंगाल के जरिए होती है। बांग्लादेश की सीमा पश्चिम बंगाल से करीब 4096.7 किलोमीटर लंबी है। इस सीमा पर जंगल, नदियां और जलधाराएं हैं, जिनका फायदा उठाकर बांग्लादेशी पहले पश्चिम बंगाल में प्रवेश करते हैं। इसके बाद वे बस और ट्रेन के जरिए दिल्ली और दूसरे राज्यों तक पहुंच जाते हैं। हालांकि, ये बांग्लादेशी घुसपैठिए यह सब अपने दम पर नहीं करते। सीमा के दोनों ओर ऐसे गिरोह सक्रिय हैं, जो पैसे लेकर उन्हें सीमा पार कराने में मदद करते हैं। सबसे पहले एक गिरोह करीब 15 हजार से 20 हजार रुपये लेकर अवैध घुसपैठिए को भारत की सीमा पार कराता है। इसके बाद वह उस शहर की ओर जाता है, जहां पहले से उसके परिचित घुसपैठिए रह रहे होते हैं। जब वह उस शहर में पहुंचता है, तो पैसे खर्च कर उसके लिए फर्जी आधार कार्ड और फर्जी पासपोर्ट तैयार किए जाते हैं। दस्तावेज बन जाने के बाद ये अवैध घुसपैठिए नौकरी या अपना कोई छोटा-मोटा कारोबार शुरू कर देते हैं।
