आरोपियों ने नकदी को अपनी जेबों और मोजों में छिपाया।
आरोपी अविनाश शुक्ला के घर से 20,39,220 रुपये की बरामदगी।
Ram Mandir Donation Row: "राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट, अंत समय पछताएगा जब प्राण जाएंगे छूट।" इस दोहे का अर्थ है कि ईश्वर का नाम सबसे बड़ा धन है, जिसे जितना चाहो अपना सकते हो, लेकिन विडंबना देखिए कि जिन लोगों को राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान की रखवाली का जिम्मा सौंपा गया था, उन्हीं पर उस धन में हेराफेरी करने के आरोप लगे हैं।
अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच में पता चला है कि मंदिर के दान में कथित हेराफेरी करने वाले कई आरोपियों की आर्थिक स्थिति और जीवनशैली बेहद कम समय में पूरी तरह बदल गई।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने कथित तौर पर रोजाना 6 से 8 लाख रुपये तक की रकम दान से निकाल ली। इसके बाद उन्होंने आलीशान मकान खरीदे, महंगी एसयूवी लीं और उनकी जीवनशैली पूरी तरह बदल गई। जबकि इन आरोपियों की मासिक सैलरी महज 14,000 से 15,000 रुपये के बीच थी। हालांकि, विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
राम मंदिर चंदा चोरी विवाद को लेकर अहम खुलासे हो रहे। AI IMAGE
आरोपियों को लेकर हुए अहम खुलासे
अविनाश शुक्ला
जो शख्स कभी अयोध्या में हनुमान गुफा के पास पीने का पानी बेचता था, उसे बाद में मंदिर के दान गणना केंद्र में नौकरी मिल गई। इसके बाद उसने अयोध्या में एक शानदार मकान बनवा लिया। शनिवार रात अयोध्या पुलिस ने शुक्ला की मारुति ब्रेजा कार भी जब्त कर ली। उसके घर से 20,39,220 रुपये की बरामदगी हुई। वहीं, 1121 अमेरिकी डॉलर, चांदी (159.54 ग्राम), 1 सोने की चैन (8.14 ग्राम), वहीं, 3.44 ग्राम अन्य सोने के धातु मिले।
चंदा चोरी मामले में आरोपी अविनाश शुक्ला की फोटो।
लवकुश मिश्रा
इस आरोपी ने अयोध्या के सोहावल इलाके में 1,000 वर्ग फुट का एक प्लॉट खरीदा। सरकारी दस्तावेजों में इसकी कीमत करीब 9 लाख रुपये दिखाई गई है, जबकि स्थानीय लोगों के मुताबिक, उस इलाके में इतने बड़े प्लॉट की बाजार कीमत 24 से 25 लाख रुपये है। उसके पास से कुल 14,25,000 रुपए (500 के 2850 नोट) बरामद हुए।
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू
जो पहले ड्राइवर का काम करता था, उसने कथित तौर पर इस पैसे से एक पूरा हॉस्टल ही बनवा लिया। टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष के पास से पुलिस ने करीब 23 लाख रुपए की बरामदगी हुई।
'हर दिन 6 से 8 लाख रुपये की होती थी हेराफेरी'
अधिकारियों के अनुसार, SIT द्वारा पूछताछ किए गए बैंक अधिकारियों ने प्रतिदिन कथित तौर पर चोरी की गई राशि का अनुमान बताया है। उनके मुताबिक, चोरी का खुलासा होने से पहले राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बैंक खातों में प्रतिदिन औसतन 16 से 18 लाख रुपये जमा होते थे। मामला सामने आने के बाद यह रकम बढ़कर 24 से 26 लाख रुपये प्रतिदिन हो गई। बैंक के इन आंकड़ों के आधार पर जांचकर्ताओं का अनुमान है कि प्रतिदिन 6 से 8 लाख रुपये की कथित हेराफेरी की जा रही थी।
जेबों और मोजों में छिपाकर ले गए पैसे
आठ आरोपियों में से पांच सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दिए हैं। इनमें से कुछ आरोपी कैमरों की नजर से बचने की कोशिश करते हुए भी नजर आए। जांचकर्ता उन सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण कर रहे हैं, जिनमें कथित तौर पर पांच आरोपी गिनती के दौरान संदिग्ध तरीके से नकदी संभालते दिखाई दे रहे हैं।
आरोप है कि उन्होंने नकदी को अपनी जेबों और मोजों में छिपाया और कुछ समय के लिए मंदिर के स्नानघरों में रखा। इसके बाद पैसे को छोटी-छोटी किश्तों में मंदिर परिसर से बाहर ले जाया गया। जबकि मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार, दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले कपड़े पहनना अनिवार्य था। जांच में इस नियम के स्पष्ट उल्लंघन की बात सामने आई है।
राम मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं की फाइल फोटो। shriramteerthkshetra
महाकुंभ के दौरान हुई सबसे बड़ी कथित हेराफेरी
साल 2025 में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक चले 45 दिनों के महाकुंभ के दौरान अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा था। आम दिनों में जहां 80 हजार से 1 लाख श्रद्धालु प्रतिदिन आते थे, वहीं महाकुंभ के दौरान यह संख्या बढ़कर 10 से 12 लाख प्रतिदिन तक पहुंच गई।
दान की राशि में भारी बढ़ोतरी होने पर बैंक ने ट्रस्ट से अतिरिक्त मैनपावर की मांग की। इसके बाद वाराणसी की एक एजेंसी के जरिए 40 से 45 नए कर्मचारियों को दान की गिनती के लिए नियुक्त किया गया। जांच के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उन्होंने महाकुंभ के दौरान आए भारी चढ़ावे का फायदा उठाकर सबसे ज्यादा चोरी की।
अयोध्या राम मंदिर में दानपात्र से कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली औपचारिक बैठक 6 जुलाई को दोपहर 3 बजे मणिराम दास छावनी में आयोजित होगी। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि की ओर से जारी बैठक सूचना के अनुसार, एजेंडे में सबसे पहले महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफों पर विचार किया जाएगा। उम्मीद है कि इस बैठक में कुछ कड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएं, जिसके बाद फिर कभी राम मंदिर के दान को चुराने की हिमाकत न कर सके।
