Times Now Navbharat
live-tv
Premium

भारत दौरे से जापान को क्या मिला? पीएम सनाए ताकाइची की यात्रा के बड़े नतीजे समझिए

Times Now Navbharat Explainer: जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की पहली आधिकारिक भारत यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में एक नया मील का पत्थर साबित हुई है। 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान जापानी कंपनियों ने भारत में 12.5 बिलियन डॉलर (लगभग 1.04 लाख करोड़) के नए निवेश और 129 समझौतों (MoUs) की घोषणा की।

Image
भारत-जापान के बीच नई दोस्ती का आगाज (फोटो: X/@narendramodi)
Edited by: monu jha
Updated Jul 4, 2026, 18:01 IST

Times Now Navbharat Explainer: वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव और सप्लाई चेन की अनिश्चितताओं के बीच जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचीं। नई दिल्ली में आयोजित '16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन' (Japan PM Sanae Takaichi India Visit)ने दोनों देशों के बीच 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' को एक बिल्कुल नए स्तर पर पहुंचा दिया है।

इस दौरे से न केवल भारत में अरबों डॉलर का निवेश आया है, बल्कि रक्षा, तकनीक और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में ऐसे फैसले हुए हैं जो आने वाले दशकों में दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देंगे। आइए विस्तार से समझते हैं कि जापान के प्रधानमंत्री की इस भारत यात्रा से दोनों देशों को क्या मिला और इसके मायने क्या हैं:

रिकॉर्ड तोड़ निवेश और 129 समझौते

इस ऐतिहासिक दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि आर्थिक मोर्चे पर रही। 'इंडिया-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम' में जापानी उद्योग जगत ने भारत में 12.5 बिलियन डॉलर (लगभग 1.04 लाख करोड़ या 2 ट्रिलियन येन) के नए निवेश की प्रतिबद्धता जताई। इसके साथ ही दोनों देशों की कंपनियों और सरकारों के बीच 129 समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए।

(Photo: X/@narendramodi)

(Photo: X/@narendramodi)

जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (JETRO) के सर्वे के अनुसार, भारत में काम कर रही 80 प्रतिशत से अधिक जापानी कंपनियां अपने कारोबार का विस्तार करना चाहती हैं। इस भरोसे को और मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अनोखी घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का 'प्रधानमंत्री कार्यालय' (PMO) सीधे जापानी निवेशकों के लिए 'जापान बिजनेस वीक' का आयोजन करेगा, जहाँ वरिष्ठ अधिकारी निवेशकों की समस्याओं को सुनकर 'इज ऑफ डूइंग बिजनेस' (व्यापार करने की सुगमता) को बेहतर बनाएंगे।

क्या है नया 'आर्थिक सुरक्षा रोडमैप'

आज जब दुनिया में युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण व्यापार प्रभावित हो रहा है, तब भारत और जापान ने मिलकर एक 'जॉइंट रोडमैप फॉर इकोनॉमिक सुरक्षा' तैयार किया है। इसका मुख्य उद्देश्य किसी एक देश (विशेषकर चीन) पर निर्भरता को कम करना है।

(Photo: X/@narendramodi)

(Photo: X/@narendramodi)

सेमीकंडक्टर: दोनों देश मिलकर मजबूत चिप सप्लाई चेन बनाएंगे ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव से बचा जा सके।

क्रिटिकल मिनरल्स: चीन द्वारा दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों को देखते हुए, भारत-जापान ने इनके वैकल्पिक सप्लाई रूट और प्रोसेसिंग प्लांट लगाने पर सहमति जताई है।

क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई: दोनों देशों ने 'ट्रस्टवर्दी एआई इकोसिस्टम' बनाने के लिए हाथ मिलाया है। इसमें जापान की हार्डवेयर और रोबोटिक्स तकनीक को भारत के बेहतरीन सॉफ्टवेयर और स्टार्टअप इकोसिस्टम से जोड़ा जाएगा।

पहली बार बनेंगे संयुक्त हथियार

दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों में यह अब तक का सबसे बड़ा बदलाव है। भारत और जापान अब मिलकर सैन्य हथियारों का सह-विकास करेंगे। इस समझौते के तहत जापान की अत्याधुनिक नौसैनिक तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स और मेटलर्जी का इस्तेमाल भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत किया जाएगा। शुरुआत में भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए रडार एंटीना तकनीक पर काम होगा।

(Photo: X/@narendramodi)

(Photo: X/@narendramodi)

इसके अलावा, दोनों देश 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' (मुक्त और खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र) के विचार पर पूरी तरह सहमत दिखे और इस साल के अंत तक '2+2' विदेश और रक्षा मंत्री स्तर की बैठक करने की पुष्टि की।

बायोगैस और बुलेट ट्रेन परियोजना को रफ्तार

  • ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को सुधारने के लिए 'भारत-जापान बायोगैस पहल' शुरू की गई है। इसके तहत देश में 1,000 बायोगैस और जैविक उर्वरक प्लांट लगाए जाएंगे, जिससे रसायनों पर निर्भरता कम होगी। सुजुकी कंपनी इस बड़ी पहल में भागीदार होगी।
  • भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना की समीक्षा की गई, जिसका पहला चरण 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस प्रोजेक्ट के लिए 81 प्रतिशत फंडिंग जापानी एजेंसी JICA द्वारा लोन के रूप में दी जा रही है। साथ ही भारत में अगली पीढ़ी की 'E10-सीरीज शिन्कान्सेन' (Shinkansen) तकनीक लाने पर भी चर्चा हुई।

पूर्वोत्तर भारत का विकास

'एक्ट ईस्ट फोरम' के जरिए जापान भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सड़क, पुल और पानी की व्यवस्था से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को अपना समर्थन जारी रखेगा। इतना ही नहीं, अगले 5 वर्षों में पूर्वोत्तर के 5,000 युवाओं को जापान में कौशल विकास और रोजगार के अवसर दिए जाएंगे। साल 2027 में भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी। प्रधानमंत्री साने ताकाइची का यह दौरा दिखाता है कि कभी सिर्फ बुनियादी ढांचे की मदद से शुरू हुआ यह रिश्ता अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिफेंस, ग्रीन एनर्जी और ग्लोबल सप्लाई चेन को सुरक्षित करने वाले एक बेहद मजबूत और भरोसेमंद गठबंधन में बदल चुका है।

End of Article