Liuyang China Fireworks Capital: दीपावली के अवसर पर जहां भारत का शिवकाशी शहर (तमिलनाडु) देश भर में पटाखों की आपूर्ति का मुख्य केंद्र रहता है, वहीं अगर वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो पूरी दुनिया को रोशन करने वाली आतिशबाजी का 90% हिस्सा अकेला एक देश- चीन- तैयार करता है।
चीन के हुनान प्रांत (Hunan Province) में स्थित लियाउयांग (Liuyang) शहर को 'दुनिया की आतिशबाजी की राजधानी' (Fireworks Capital of the World) कहा जाता है। अकेले लियाउयांग शहर का चीन के घरेलू बाजार में 60% और अंतरराष्ट्रीय निर्यात (Exports) में लगभग 70% दबदबा है।
आइए जानते हैं कि एक छोटे से कुटीर उद्योग से शुरू होकर लियाउयांग और चीन कैसे वैश्विक आतिशबाजी बाजार के निर्विवाद सम्राट बने और आज यह उद्योग किन चुनौतियों से जूझ रहा है।
1. बारूद की खोज और प्राचीन इतिहास
आतिशबाजी के उद्भव की कहानी तांग राजवंश (Tang Dynasty: 618-907 ईस्वी) के समय से जुड़ी हुई है:
अमरता की खोज में बारूद का आविष्कार: प्राचीन चीनी कीमियागर (Alchemists) अमरता की दवा खोजने के दौरान सोरा (Saltpetre - ऑक्सीजनदाता), सल्फर (ईंधन) और चारकोल (कोयला) को मिला रहे थे। इसी प्रयोग के दौरान दुर्घटनावश बारूद (Gunpowder) का आविष्कार हुआ।
बांस की नलियां और बुरी आत्माएं: शुरुआती दौर में इस बारूद को बांस की नलियों में भरकर आग लगाई जाती थी। भले ही इनमें आधुनिक पटाखों जैसी रंग-बिरंगी रोशनी नहीं थी, लेकिन तेज आवाज और चिंगारियों का उपयोग बुरी आत्माओं को डराने के लिए किया जाता था।
लियू तियानफू की विरासत: लियाउयांग में आतिशबाजी बनाने का काम सदियों तक एक जोखिम भरा कुटीर उद्योग बना रहा, जहाँ परिवार अपने हाथों से खतरनाक काला पाउडर तैयार करते थे।
2. अमेरिकी संबंधों में सुधार (1972) और लियाउयांग का उभार
1949 में आधुनिक चीनी कम्युनिस्ट राज्य की स्थापना के बाद युद्धों और 'सांस्कृतिक क्रांति' के कारण यह उद्योग सुस्त पड़ गया था। लेकिन 1970 के दशक में इसमें बड़ा मोड़ आया:
निक्सन की चीन यात्रा (1972): अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की ऐतिहासिक चीन यात्रा के बाद पश्चिमी देशों की आधुनिक तकनीक और 'नो-हाउ' का आदान-प्रदान चीन के साथ शुरू हुआ, जिससे आतिशबाजी उद्योग में क्रांति आई।
डोंगगुआन से लियाउयांग का सफर: 1980 के दशक तक हांगकांग और बंदरगाहों के पास होने के कारण गुआंगडोंग प्रांत का 'डोंगगुआन' निर्यात का मुख्य केंद्र था। लेकिन 1990 के दशक में शहरीकरण और भीषण दुर्घटनाओं के कारण उत्पादन वापस अपनी ऐतिहासिक जन्मस्थली लियाउयांग में स्थानांतरित हो गया।
कम लागत और सस्ती श्रम शक्ति: पश्चिमी देशों की तुलना में ढीले सुरक्षा नियम और विशाल, सस्ते कार्यबल (Labor Force) के कारण चीन में पटाखों का उत्पादन बेहद सस्ता रहा, जिससे पश्चिमी कंपनियां प्रतिस्पर्धा में बाहर हो गईं।

आतिशबाजी त्योहारों तक नहीं एक स्थायी पर्यटन के रूप में विकसित
3. 'इमोशनल इकोनॉमी' और 380 अरब डॉलर का पर्यटन मॉडल
चीन ने आतिशबाजी को केवल त्योहारों तक सीमित न रखकर एक स्थायी पर्यटन और अनुभव से जोड़ दिया है:
स्काई थियेटर और वीकेंड शो: लियाउयांग शहर के 'स्काई थियेटर' (Sky Theater) में हर वीकेंड पर ग्रैंड फायरवर्क्स शो आयोजित किए जाते हैं। 2023 से अब तक 142 बड़े शो आयोजित किए जा चुके हैं, जिन्होंने 70 लाख (7 Million) से अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया।
भावनात्मक अर्थव्यवस्था: एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, मनोरंजन और अनुभवों पर आधारित चीन का 'इमोशनल इकोनॉमी' बाजार 2025 तक 2.7 ट्रिलियन युआन (लगभग 380 बिलियन डॉलर) तक पहुंच गया है, जिसके 2029 तक 4.5 ट्रिलियन युआन पार करने की उम्मीद है।
4. सुरक्षा हादसे, एआई (AI) निगरानी और प्रदूषण की बहस
भारत की तरह ही चीन में भी आतिशबाजी को लेकर सुरक्षा और वायु प्रदूषण की तीखी बहस जारी है:
कारखाना हादसे और नियम: इसी वर्ष (मई 2026 में) लियाउयांग की एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद सुरक्षा नियमों को और सख्त किया गया।
AI कैमरों से निगरानी: 2006 के राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों के तहत चीन सरकार अब जोखिम वाले रासायनिक प्रक्रियाओं से इंसानों को दूर रखकर AI-संचालित कैमरों और ऑटोमेटेड सिस्टम से फैक्ट्रियों की निगरानी कर रही है।
स्मॉग और बैन पर जनता का विरोध: 2015 से 2018 के बीच बीजिंग और हेनान प्रांत में वायु प्रदूषण के कारण पटाखों पर पूर्ण बैन लगाया गया था। हालांकि, चीनी नव वर्ष पर सदियों पुरानी 'नियन' (Nian) नामक पौराणिक राक्षस को भगाने की परंपरा के कारण ग्रामीण आबादी और सांस्कृतिक लेखकों के भारी विरोध के बाद कई स्थानों पर बैन ढीला करना पड़ा।
