E20 Petrol Controversy Explained: देश में E20 पेट्रोल को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि देश के कुछ पेट्रोल पंपों पर निर्धारित 20 प्रतिशत से ज्यादा ऐथनॉल मिला हुआ पेट्रोल बेचा जा रहा है। कर्नाटक सरकार की ओर से कराई गई जांच में कुछ नमूनों में एथनॉल की मात्रा 31 प्रतिशत से ज्यादा मिलने का दावा किया गया है। अगर यह दावा सही साबित होता है तो यह तय मानकों से बड़ा अंतर होगा। इससे गाड़ियों के माइलेज, इंजन की सेहत और आम लोगों की जेब पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने इन आरोपों को खारिज किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लिए गए 893 नमूनों की जांच में पेट्रोल गुणवत्ता के तय मानकों पर खरा उतरा है। इस बीच केरलम सरकार ने भी एहतियात के तौर पर चार जिलों में पेट्रोल पंपों की जांच के आदेश दिए हैं। ऐसे में सवाल है कि आखिर E20 पेट्रोल क्या है? इसकी गुणवत्ता पर विवाद क्यों हो रहा है? राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाए हैं और सरकार ने उनके जवाब में क्या कहा है? आइए पूरे मामले को समझते हैं।
सबसे पहले समझिए E20 पेट्रोल क्या होता है?
E20 पेट्रोल का मतलब ऐसे पेट्रोल से है, जिसमें 20 प्रतिशत एथनॉल और बाकी हिस्सा पेट्रोल होता है। एथनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और दूसरी फसलों से तैयार किया जाता है। भारत में इसे पेट्रोल के साथ मिलाने की नीति का उद्देश्य विदेशों से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार तैयार करना और प्रदूषण को घटाने में मदद करना है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में पेट्रोल में एथनॉल मिलाने से पेट्रोल की कुल खपत में कुछ कमी लाई जा सकती है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होने की उम्मीद रहती है। इसके अलावा एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ना और मक्का जैसी फसलों की मांग बढ़ने से किसानों और चीनी उद्योग को भी फायदा मिल सकता है। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एथनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल यानी EBP कार्यक्रम शुरू किया था। पहले पेट्रोल में एथनॉल मिलाने का लक्ष्य धीरे-धीरे बढ़ाया गया और बाद में सरकार ने 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय समय से पहले हासिल करने की दिशा में काम किया। लेकिन अब विवाद इस बात को लेकर है कि क्या पेट्रोल में वास्तव में निर्धारित मात्रा के अनुसार ही एथनॉल मिलाया जा रहा है?
कर्नाटक में जांच के बाद कैसे शुरू हुआ विवाद?
E20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर विवाद उस समय बढ़ा, जब कर्नाटक सरकार ने राज्य के 7 जिलों से पेट्रोल के नमूने लेकर उनकी जांच कराई। कर्नाटक के मंत्री रिजवान अरशद के दावों के मुताबिक, मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच के दौरान 14 में से 11 नमूनों में एथनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से ज्यादा पाई गई। दावा किया गया कि कुछ नमूनों में एथनॉल का स्तर 31.2 प्रतिशत तक पहुंच गया। इनमें इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL) के पेट्रोल में 31.2 प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL) के पेट्रोल में 30.5 प्रतिशत एथनॉल मिलने की बात कही गई। कर्नाटक सरकार का आरोप था कि सरकारी और निजी क्षेत्र की कुछ तेल कंपनियों के पेट्रोल में निर्धारित सीमा से ज्यादा एथनॉल मिलाया जा रहा है। इस मामले में IOCL, HPCL, BPCL के अलावा नायरा और शेल जैसी कंपनियों का भी नाम सामने आया। राज्य सरकार ने इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र और समान प्रक्रिया से दोबारा पुष्टि होना अभी बाकी है।
राहुल गांधी ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
कर्नाटक में पेट्रोल के नमूनों की जांच से जुड़े दावे सामने आने के बाद राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'E20 बना 420 - जनता की गाड़ी से पेट्रोल चोरी!' राहुल गांधी का आरोप है कि सरकार लोगों को 20 प्रतिशत ऐथनॉल मिला पेट्रोल देने की बात कहती है, लेकिन कुछ जगहों पर इससे कहीं ज्यादा ऐथनॉल वाला ईंधन बेचा जा रहा है। उन्होंने कर्नाटक सरकार की जांच का हवाला देते हुए कहा कि 14 में से 11 नमूनों में ऐथनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से ज्यादा मिली। राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि अगर तेल कंपनियों की अपनी प्रयोगशालाओं में जांच की गई थी तो उनकी रिपोर्ट में ऐथनॉल की वास्तविक मात्रा का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं किया गया? राहुल गांधी के मुताबिक, ज्यादा ऐथनॉल मिला पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ियों का माइलेज कम हो सकता है। इससे वाहन मालिकों को अधिक पेट्रोल खर्च करना पड़ सकता है। इसके अलावा इंजन और दूसरे हिस्सों पर भी असर पड़ने की आशंका है, जिससे मरम्मत का खर्च बढ़ सकता है। उन्होंने सरकार से पूछा कि पेट्रोल में वास्तव में कितना ऐथनॉल मिलाया जा रहा है और तय सीमा से ज्यादा मिश्रण करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?
पेट्रोलियम मंत्रालय ने आरोपों पर क्या जवाब दिया?
कर्नाटक सरकार के आरोपों के बाद पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 7 नवंबर को अपना पक्ष रखा। मंत्रालय ने कहा कि देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पेट्रोल के कुल 893 नमूने एकत्र किए गए थे। इनकी जांच में सभी नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए। मंत्रालय के अनुसार, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के डिपो और पेट्रोल पंपों से लिए गए नमूनों में ऐथनॉल की मात्रा 19 से 21 प्रतिशत के बीच रही। यह भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के IS 17021 मानक के तहत तय सीमा है। मंत्रालय ने खास तौर पर कर्नाटक के 56 नमूनों का भी जिक्र किया। उसके मुताबिक, इन सभी नमूनों में ऐथनॉल की मात्रा 19 से 20 प्रतिशत के बीच मिली। इनका औसत स्तर 19.30 प्रतिशत रहा। सरकार का कहना है कि इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि सरकारी तेल कंपनियां निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार E20 पेट्रोल की आपूर्ति कर रही हैं। इस तरह केंद्र सरकार ने कर्नाटक के उन दावों को चुनौती दी है, जिनमें कुछ पेट्रोल पंपों पर 26 से 31 प्रतिशत तक ऐथनॉल मिलने की बात कही गई थी।
E20 में 20% की जगह 31% एथनॉल का दावा, राहुल गांधी के आरोपों पर सरकार का जवाब! (तस्वीर-AI)
तेल कंपनियों ने कर्नाटक की जांच पर क्यों उठाए सवाल?
इस विवाद में सरकारी तेल कंपनियों ने भी अपना पक्ष रखा है। IOCL, BPCL और HPCL ने कर्नाटक सरकार की ओर से अक्टूबर 2026 में कराई गई जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कंपनियों का कहना है कि नमूनों को इकट्ठा करने और उनकी जांच करने की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। कंपनियों के मुताबिक, अक्टूबर में नमूने इकट्ठा करने के दौरान उनके प्रतिनिधि मौजूद नहीं थे। इसके अलावा उन्हें हर पेट्रोल पंप से लिए गए नमूनों की पूरी जानकारी, नमूनों का डिटेल और प्रयोगशाला की विस्तृत रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं कराई गई। तेल कंपनियों ने तीसरी पार्टी की प्रयोगशालाओं से जारी सर्टिफिकेट पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इन रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ऐथनॉल की मात्रा जांचने के लिए गैस क्रोमैटोग्राफी की मानक तकनीक का इस्तेमाल कैसे किया गया। नमूनों को जांच से पहले किस तरह तैयार किया गया और किन संदर्भ सामग्रियों का इस्तेमाल हुआ, इसकी जानकारी भी जरूरी है। कंपनियों का तर्क है कि जब तक जांच की पूरी प्रक्रिया और तकनीकी जानकारी उपलब्ध नहीं होती, तब तक इन नतीजों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्किल है। उन्होंने इस विवाद को सुलझाने के लिए संयुक्त रूप से नमूने इकट्ठा करने और अधिकृत प्रयोगशालाओं में दोबारा जांच कराने की मांग की है।
ज्यादा ऐथनॉल से गाड़ियों पर क्या असर पड़ सकता है?
E20 पेट्रोल को लेकर सबसे बड़ी चिंता वाहन मालिकों की है। सवाल यह है कि अगर पेट्रोल में तय मात्रा से ज्यादा ऐथनॉल मिलाया जाए तो गाड़ियों पर इसका क्या असर हो सकता है? ऐथनॉल में पेट्रोल के मुकाबले प्रति लीटर ऊर्जा कम होती है। इसलिए पेट्रोल में ऐथनॉल की मात्रा बढ़ने पर गाड़ी का माइलेज प्रभावित हो सकता है। इसका मतलब है कि समान दूरी तय करने के लिए वाहन को पहले की तुलना में थोड़ा ज्यादा ईंधन खर्च करना पड़ सकता है। इसके अलावा हर गाड़ी का इंजन एक निश्चित प्रकार के ईंधन को ध्यान में रखकर बनाया जाता है। E20 के अनुकूल नहीं बनाई गई पुरानी गाड़ियों में अधिक ऐथनॉल वाला पेट्रोल इस्तेमाल करने से कुछ तकनीकी परेशानियां पैदा होने की आशंका रहती है। ऐथनॉल में नमी को आकर्षित करने की क्षमता भी होती है। ऐसे में ईंधन प्रणाली के कुछ हिस्सों पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से हर गाड़ी का इंजन खराब हो जाएगा। इसका असर वाहन के मॉडल, इंजन की तकनीक, इस्तेमाल की अवधि और ईंधन की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।
केंद्र सरकार ने भी माइलेज को लेकर अपनी बात रखी है। मंत्रालय के अनुसार, E20 के अनुकूल गाड़ियों में माइलेज में करीब 1 से 2 प्रतिशत की कमी हो सकती है। वहीं कुछ दूसरी गाड़ियों में यह कमी 3 से 6 प्रतिशत तक हो सकती है। सरकार ने उपभोक्ताओं को होने वाले नुकसान के बड़े अनुमानों पर भी सवाल उठाए हैं। इसमें कम माइलेज और गाड़ियों की मरम्मत के कारण सालाना 1.01 लाख करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान शामिल है। सरकार का कहना है कि ऐसे अनुमानों को तकनीकी तथ्यों के आधार पर परखना जरूरी है।
केरलम सरकार ने भी क्यों शुरू की जांच?
कर्नाटक में ऐथनॉल की अधिक मात्रा मिलने के दावों के बाद अब केरलम सरकार भी सतर्क हो गई है। राज्य के नागरिक आपूर्ति मंत्री अनूप जैकब ने मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन से चर्चा के बाद चार जिलों में पेट्रोल पंपों की जांच के आदेश दिए हैं। इन जिलों में तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम, कोझिकोड और कन्नूर शामिल हैं। इन जिलों के अलग-अलग पेट्रोल पंपों से ईंधन के नमूने लिए जाएंगे और उन्हें जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि केरलम में अब तक निर्धारित सीमा से ज्यादा ऐथनॉल मिलाए जाने का कोई मामला सामने नहीं आया है। लेकिन पड़ोसी राज्य कर्नाटक में उठे विवाद को देखते हुए एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया है। मंत्री के मुताबिक, 2005 के केंद्रीय मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (आपूर्ति और वितरण का विनियमन और कदाचार की रोकथाम) आदेश के तहत जारी 2014 की राज्य अधिसूचना अधिकारियों को पेट्रोल पंपों का निरीक्षण करने, नमूने लेने और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार देती है। सरकार ने कहा है कि जांच में गड़बड़ी मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आखिर इस विवाद का समाधान कैसे निकलेगा?
फिलहाल E20 पेट्रोल को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने हैं। एक तरफ कर्नाटक सरकार की जांच में कुछ नमूनों में 26 से 31 प्रतिशत तक एथनॉल मिलने की बात कही गई है। दूसरी तरफ पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि देशभर के 893 नमूनों की जांच में सभी नमूने तय मानकों पर खरे उतरे हैं। इस विवाद का सही समाधान तभी निकल सकता है, जब सभी पक्ष एक समान प्रक्रिया के तहत पेट्रोल के नमूने एकत्र करें और उनकी जांच स्वतंत्र तथा अधिकृत प्रयोगशालाओं में कराई जाए। जांच के दौरान तेल कंपनियों, राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी पारदर्शिता बढ़ा सकती है। साथ ही प्रत्येक पेट्रोल पंप की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके।
आम लोगों के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे पेट्रोल खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और कीमत पर भरोसा करते हैं। अगर पेट्रोल में एथनॉल की मात्रा तय मानक से ज्यादा पाई जाती है तो यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि उपभोक्ता के अधिकारों से जुड़ा मामला भी है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि कर्नाटक के आरोप सही हैं या केंद्र सरकार का पक्ष पूरी तरह सही है। असली तस्वीर पारदर्शी और निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगी। तब तक सबसे बड़ा सवाल यही है कि पेट्रोल पंप पर मिलने वाले ईंधन में ऐथनॉल की वास्तविक मात्रा कितनी है और क्या उपभोक्ताओं को इसकी पूरी जानकारी दी जा रही है?
