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UP की इस सीट से लगातार तीसरी बार नहीं जीत सकी है कोई पार्टी, BJP बदल चुकी है प्रत्याशी, दलित वोटरों के हाथ में जीत की कमान

Barabanki Lok Sabha Constituency: बाराबंकी लोकसभा सीट पर किसी एक पार्टी का कभी कब्जा नहीं रहा है। कभी कांग्रेस, कभी सपा, कभी बसपा, कभी बीजेपी तो कभी निर्दलीय। 2014 से इस सीट पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है।

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बाराबंकी लोकसभा सीट का इतिहास

Barabanki Lok Sabha Constituency: उत्तर प्रदेश में एक ऐसी लोकसभा सीट है, जहां लगातार तीन बार कोई भी पार्टी नही जीत पाई है। इस सीट से बीजेपी पिछले दो बार से लगातार जीत चुकी है, तीसरी बार वो जीत की कोशिश में है। वहीं कांग्रेस इस सीट पर जीत दर्ज कर इतिहास को बरकरार रखने की कोशिश में है। इस सीट का नाम है बाराबंकी लोकसभा सीट। इस सीट का इतिहास गजब का है।

बाराबंकी लोकसभा सीट का इतिहास

बाराबंकी लोकसभा सीट पर किसी एक पार्टी का कभी कब्जा नहीं रहा है। कभी कांग्रेस, कभी सपा, कभी बसपा, कभी बीजेपी तो कभी निर्दलीय। 2014 से इस सीट पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है। 1952 में इस सीट का गठन हुआ था। पहली बार बाराबंकी सीट से मोहनलाल सक्सेना जीते थे, लेकिन इसके बाद के तीसरे चुनाव में निर्दलीय ने बाजी मार ली थी।

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कांग्रेस उम्मीदवार

विधानसभा का समीकरण

वर्तमान में, बाराबंकी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में 5 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। जिसमें तीन समाजवादी पार्टी के पास है तो दो बीजेपी के पास।
क्रमांकविधानसभा सीट2022 विधानसभा रिजल्ट
1कुर्सीबीजेपी
2राम नगरसपा
3बाराबंकीसपा
4जैदपुर (एससी)सपा
5हैदरगढ़ (एससी)बीजेपी

बाराबंकी सीट से अबतक कौन-कौन जीता

बाराबंकी सीट पर सबसे ज्यादा बार कांग्रेस की कब्जा रहा है। उसके बाद तीन बार भाजपा प्रत्याशी जीते। 1952 में हुए पहले चुनाव में बाराबंकी से कांग्रेस के मोहनलाल सक्सेना सांसद बने। फिर, 1957 में कांग्रेस के स्वामी रामानंद शास्त्री जीते। लेकिन, उपचुनाव में समाजवादी नेता राम सेवक यादव ने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी जीत हासिल की। उन्होंने 1962 में डॉ. लोहिया की सोशलिस्ट पार्टी से और फिर 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उसके बाद 1971 में कांग्रेस ने वापसी की और रुद्र प्रताप सिंह सांसद बने। यहां से 1977 और 1980 में जनता पार्टी के राम किंकर लोकसभा पहुंचे। जबकि, इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में फिर कांग्रेस को जीत मिली और कमला प्रसाद रावत सांसद बने। 1989 में राम सागर रावत जनता दल के टिकट पर चुनाव जीते। वह 1991 में समाजवादी जनता पार्टी और फिर 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीते। बाराबंकी में 1998 में बैजनाथ रावत ने भाजपा का खाता खोला, अगले ही साल 1999 में हुए चुनाव में फिर सपा के राम सागर रावत जीत गए। 2004 में बसपा के कमला प्रसाद रावत जीते। 2009 में कांग्रेस ने पीएल पुनिया को टिकट दिया और उन्होंने जीत हासिल की। इस सीट पर 2014 में भाजपा की प्रियंका सिंह रावत जीतीं और 2019 में भाजपा के ही उपेंद्र सिंह रावत सांसद बने।

barabanki seat

2019 लोकसभा चुनाव परिणाम

बाराबंकी सीट की दिलचस्प कहानी

बाराबंकी सीट पर लगातार तीन बार कोई पार्टी नहीं जीत सकी है। कहने का मतलब है कि किसी भी दल ने सियासी हैट्रिक नहीं लगाई है। बाराबंकी लोकसभा सुरक्षित सीट पर बीजेपी ने वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष राजरानी रावत को प्रत्याशी घोषित किया है। दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन के तहत कांग्रेस के प्रत्याशी तनुज पुनिया ताल ठोंक रहे हैं।

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बीजेपी उम्मीदवार

बाराबंकी सीट पर दलित मतदाता की अहम भूमिका

बाराबंकी सुरक्षित सीट है। ऐसे में दलित वोटर जीत-हार तय करते हैं। इसके अलावा यादव, कुर्मी और मुस्लिम वोटर्स भी काफी अहम हैं।

बीजेपी बदल चुकी है प्रत्याशी

बाराबंकी लोकसभा सीट पर भाजपा ने पहले उपेंद्र रावत को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन, एक वीडियो विवाद के बाद उन्होंने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। उपेंद्र रावत बाराबंकी सीट से वर्तमान सांसद भी हैं। जिसके बाद बीजेपी ने इस सीट से प्रत्याशी बदल दिया।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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