Mahabharat Throwback: 25 पैसे बचाने को 8KM पैदल चलते थे महाभारत के युधिष्ठ‍िर, 201 रुपये मिली थी पहली कमाई

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Apr 23, 2020, 07:52 PM IST

Mahabharat Throwback: बी आर चोपड़ा की महाभारत इन द‍िनों टीवी पर द‍िखाई जा रही है। इस सीरियल में गजेंद्र चौहान ने युधिष्ठ‍िर का किरदार न‍िभाया था।

Mahabharat Throwback: 25 पैसे बचाने को 8KM पैदल चलते थे महाभारत के युधिष्ठ‍िर, 201 रुपये मिली थी पहली कमाई

Mahabharat Throwback: बी आर चोपड़ा की महाभारत इन द‍िनों टीवी पर द‍िखाई जा रही है। कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के ल‍िए देशभर में लॉकडाउन लगाया गया है और प्रसार भारती ने ऐसे में पुराने और लोकप्रिय धारावाहिकों का पुन: प्रसारण शुरू किया है। महाभारत धारावाहिक अपने दौर में बेहद लोकप्रिय था और यूजर्स ने ही इसके पुन: प्रसारण की मांग सोशल मीडिया पर की थी। 

इस सीरियल में गजेंद्र चौहान ने युधिष्ठ‍िर का किरदार न‍िभाया था। गजेंद्र चौहान ने जिस दमदारी के साथ इस सीरियल में अपना किरदार निभाया था, उसकी तारीफ आज भी होती है। उनकी भारी भरकम आवाज और उनके अंदाज की चर्चा सीरियल खत्‍म होने के बाद भी होती रहती है। 

आपको बता दें कि महाभारत में आने से पहले गजेंद्र चौहान AIIMS में नौकरी किया करते थे। वह दिल्‍ली के खामपुर में पैदा हुए और उन्‍होंने रामजस स्‍कूल से शिक्षा ग्रहण की। स्‍कूल के बाद डीयू के किरोड़ीमल कॉलेज में उनका दाखिल हो गया। इसी दौरान उन्‍होंने AIIMS में नौकरी के लिए आवेदन कर रखा था। वहां से कॉल आई तो दो साल की पढ़ाई के बाद उन्‍होंने नौकरी ज्‍वाइन कर ली। 

पिता ने नौकरी यह कहकर छुटवा दी कि पहले पढ़ाई पूरी करो। गजेंद्र ने फ‍िर बीएस की पढ़ाई पूरी की। उन्‍होंने सीटी स्‍कैन का कोर्स किया था तो उनके पास नौकरी के तमाम ऑफर आने लगे। 1979 में एक बार फ‍िर वह AIIMS में नौकरी करने लगे। 

एक्टिंग का था शौक
उन्‍हें बचपन से एक्टिंग का शौक था। वह गांव में होली के त्‍यौहार पर अभिनय किया करते थे। स्‍कूल में भी एक बार उन्‍हें श्रवण कुमार के रोल के ल‍िए पुरस्‍कार मिला था। 1982 में वह एक्टिंग क्‍लास लेने बंबई चले गए। 

ऐसे मिला काम
राजश्री प्रोडक्शन के सीरियल पेइंग गेस्ट में उन्हें काम करने के लिए 201 रुपये मिले थे। ये बतौर एक्टर उनकी पहली कमाई थी। आपको बता दें कि 25 पैसे बचाने के लिए वह आठ किलोमीटर पैदल चलते थे। 

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