Mardaani 3 Movie Review: 'शिवानी शिवाजी रॉय' की दहाड़ में दिखा पुराना दम, 'अम्मा' की एंट्री ने पलटा गेम

Mardaani 3 Movie Review: रानी मुखर्जी एक बार फिर शिवानी शिवाजी रॉय की वर्दी पहनकर लौट आई हैं। इस बार वो ग्रामीण भारत में बच्चों, खासकर छोटी लड़कियों के खिलाफ हुए एक बेहद क्रूर अपराध को सुलझाने के लिए मैदान में हैं। उनका सामना मल्लिका प्रसाद की कैरेक्टर 'अम्मा' से है। क्या ये फिल्म देखनी चाहिए या नहीं? पूरा रिव्यू पढ़िए और जानिए।

AbhayAuthored by: AbhayUpdated Jan 30 2026, 15:38 IST

Mardaani 3

क्रिटिक्स रेटिंग
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3.0

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Image Source: Mardaani 3 Movie

Mardaani 3 Movie Review: बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी की नई फिल्म 'मर्दानी 3' आज यानी 30 जनवरी 2026 को रिलीज हो गई है। ये मर्दानी सीरीज की तीसरी फिल्म है, जिसमें रानी फिर से शिवानी शिवाजी रॉय नाम की बहादुर पुलिस अफसर बनी हैं। डायरेक्टर हैं अभिराज मिनावाला और विलेन का रोल मल्लिका प्रसाद ने किया है। फिल्म एक क्राइम थ्रिलर है जो बच्चियों के ट्रैफिकिंग और बेगिंग माफिया जैसी भयानक समस्या पर बात करती है। ये फिल्म बहुत इंटेंस और इमोशनल है, जहां शिवानी एक बड़े केस को सॉल्व करती है। अगर आप भी रानी मुखर्जी की इस फिल्म को बड़े पर्दे पर देखने के तैयारी कर रहे हैं, तो ये रिव्यू आपके बहुत काम आने वाला है। तो चलिए जानते हैं फिल्म की स्टोरी क्या है, फिल्म में क्या अच्छा और क्या बुरा है। साथ ही साथ ये फिल्म देखनी चाहिए या नहीं इसका भी जवाब आपको अंत में मिल जाएगा।

फिल्म की कहानी क्या है?

फिल्म की कहानी शिवानी शिवाजी रॉय के इर्द-गिर्द है, जो एनआईए से जुड़कर एक बड़े केस पर काम करती हैं। एक एंबेसडर की बेटी रुहानी और कई छोटी लड़कियां किडनैप हो जाती हैं। ये बच्चे ट्रैफिकिंग और बेगिंग माफिया के चंगुल में हैं। एक महिला विलेन अम्मा (मल्लिका प्रसाद) इस सबको चलाती है, जो बहुत क्रूर और स्मार्ट है। लड़कियों को बचाने के लिए शिवानी शिवाजी रॉय को काफी मेहनत करनी पड़ती है। कहानी ग्रामीण इलाकों में सेट है, जहां सिस्टम कमजोर है और गरीब बच्चों की जिंदगी सस्ती है। फिल्म में दो महिलाओं का आमना-सामना है एक कानून की तरफ से, दूसरी अपराध की तरफ से। पहला हाफ बहुत तेज और टाइट है, सस्पेंस बनाता है। दूसरे हाफ में एक्शन और इमोशंस बढ़ते हैं, लेकिन कुछ जगह प्रेडिक्टेबल लगती है। पूरी फिल्म बच्चियों की सुरक्षा और समाज की क्रूरता पर फोकस करती है, जो दिल को छू जाती है।