Haq movie Review: आस्था-अधिकार-सम्मान के बीच का महीन फर्क समझाती है यामी-इमरान-वर्तिका की 'हक'

Haq movie Review: जंगली पिक्चर्स के अंतर्गत बनी फिल्म 'हक' (Haq) केवल मुस्लिम समुदाय के लिए ही नहीं बल्कि भारतीय समाज के लिए जरूरी है। डायरेक्टर सुपर्ण वर्मा (Suparn Varma) ने जिस तरह से एक जटिल विषय को बहुत ही साधारण अंदाज में पेश करके दिल को छू लेने वाला मैसेज दिया है, वो काबिल-ए-तारीफ है। फिल्म हक इमरान हाशमी (Emraan Hashmi) और यामी गौतम (Yami Gautam) की काबिलियत के साथ पूरा न्याय करती है और वर्तिका सिंह (Vartika Singh) के हुनर को पूरा सम्मान देती है।

Rahul SharmaAuthored by: Rahul SharmaUpdated Nov 5 2025, 13:28 IST

क्रिटिक्स रेटिंग
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5.0

Drama
Release Date

Nov 7, 2025

Duration

2 hr 37 mins

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Haq movie Review in Hindi: साल 1947 में भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली थी, जिसके बाद देश के स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान रचयिताओं ने देशवासियों से एक वादा किया था कि यहां हर किसी को समान अधिकार मिलेगा ताकि सभी भारत देश में सम्मानजनक जिंदगी बिता सकें और भेदभाव पूरी तरह से खत्म हो सके। भेदभाव खत्म करने की ये बात सिर्फ धर्म, जातियों और समुदायों के लिए ही नहीं बल्कि जेंडर्स यानि कि पुरुष-महिलाओं और बाकियों के लिए भी बोली गई थी लेकिन क्या हमने एक समाज के तौर पर देश के साथ किया ये वादा पूरा किया है? यही समझाने के लिए इमरान हाशमी-यामी गौतम और वर्तिका सिंह 'हक' जैसी थॉट प्रोवोकिंग मूवी लेकर आए हैं, जिसे धर्म के चश्मे से देखना न केवल महिलाओं और देशवासियों के साथ बल्कि देश के साथ भी गलत होगा।

फिल्में दो तरह की होती हैं एक जो आपसे कहती हैं कि दिमाग घर पर रखिए और थिएटर के अंदर खुद को एंटरटेन करिए और दूसरी वो जो अपने कंटेंट के दम पर आपको सोचने पर मजबूर करती हैं। जंगली पिक्चर्स के अंतर्गत बनी डायरेक्टर सुपर्ण वर्मा की 'हक' साल 1967 से शुरू होती है और हमें शाजिया बानो (यामी गौतम) - अब्बास (इमरान हाशमी) से मिलवाती है। घरवालों की रजामंदी से शादी कर रहे शाजिया और अब्बास की लवस्टोरी सोलफुल सॉग्स के साथ अनफोल्ड होती है और जल्द ही हमें अपनी दुनिया में ले जाती है। धीरे-धीरे इनकी शादीशुदा जिंदगी में आने वाले बदलाव हमें दिखाए जाते हैं और फिर होती है सायरा (वर्तिका सिंह) की एंट्री, जिसके साथ अब्बास ने पहली बीवी शाजिया को बिना बताए शादी कर ली है। इसके बाद पर्दे पर हमें शाजिया बानो के अधिकार और सम्मान की लड़ाई देखने को मिलती है, जिससे लड़ने के लिए अब्बास ने मजहब की चादर ओढ़कर आस्था को हथियार बनाया है। अब्बास के मजहब और शाजिया के कुरान में से किसे भारतीय संविधान का साथ मिलेगा, ये जानने के लिए आपको फिल्म हक देखनी होगी...