Bharat Bhhagya Viddhaata Movie Review: लय से भटकी फिल्म, कंगना रनौत ने बचाई लाज

Bharat Bhhagya Viddhaata Movie Review: कंगना रनौत की 'भारत भाग्य विधाता' मुंबई हमले के दौरान कामा अस्पताल के कर्मचारियों की बहादुरी को दिखाती है। फिल्म प्रेरणादायक है, लेकिन फिल्म में काफी इनकंसिस्टेंसी है। अगर आप भी इस फिल्म को देखने का प्लान कर रहे हैं, तो ये रिव्यू जरूर पढ़ना चाहिए।

AbhayAuthored by: AbhayUpdated Jun 12 2026, 12:15 IST

Bharat Bhhagya Viddhaata

क्रिटिक्स रेटिंग
starstarstarstarstar

3.0

bharat bhhagya viddhaata review: kangana ranaut's tribute to mumbai's unsung heroes delivers emotion despite narrative flaws

फिल्म भारत भाग्य विधाता का रिव्यू (Image Source: Bharat Bhhagya Viddhaata Movie)

Bharat Bhhagya Viddhaata Movie Review: बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत अपनी एक और नई फिल्म भारत भाग्य विधाता के साथ दर्शको के बीच आ गई हैं। कंगना रनौत की फिल्म भारत भाग्य विधाता आज यानी 12 जून को लंबे इंतजार के बाद बड़े पर्दे पर रिलीज हो गई है। ये फिल्म 26/11 मुंबई टेरर अटैक्स के दौरान कामा हॉस्पिटल में हुई घटनाओं पर बेस्ड है। फिल्म नर्सेस और हॉस्पिटल स्टाफ की बहादुरी को सलाम करती है जिन्होंने बिना हथियार के 300-400 मरीजों की जान बचाई। अगर आप भी इस फिल्म को देखने के प्लान बना रहे हैं, तो आपको बिना देर किए इस रिव्यू को आपको पूरा पढ़ लेना चाहिए। इस रिव्यू में हम आपको फिल्म की कमी और अच्छाई दोनों के बारे में बताने वाले हैं।

फिल्म की स्टोरी क्या है?

कहानी 26/11 अटैक्स के कुछ दिन बाद शुरू होती है। गीता गांधारे (कंगना रनौत) पुलिस के पास जाती है क्योंकि वो कामा हॉस्पिटल अटैक की एकमात्र गवाह है। फिर फ्लैशबैक में वो वो भयानक रात याद करती है। हॉस्पिटल में नर्सेस अपनी ड्यूटी कर रही होती हैं। गीता, त्रुप्ती, शीतल, बबिता, मोहिनी समेत बाकी स्टाफ दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं। अचानक बाहर गोलीबारी शुरू हो जाती है। पहले तो सब सोचते हैं पटाखे फूट रहे हैं, लेकिन जल्दी ही पता चलता है कि टेररिस्ट अंदर घुस आए हैं। फिल्म दिखाती है कि ये नर्सेस कैसे 300 से ज्यादा मरीजों, प्रेग्नेंट महिलाओं और NICU के बच्चों को बचाने के लिए अपनी जान पर खेल जाती हैं। टेररिस्ट अजमल कसाब और अबू इस्माइल का सामना करते हुए वो एक-दूसरे का साथ देती हैं।