Masoom Sharma Got This Reply From Aniruddhacharya Over Eating Meat: हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने अपने गानों से लोगों का खूब दिल जीता है। मासूम शर्मा के गाने केवल हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे भारत में धूम मचा चुके हैं। अक्सर अपने गानों के कारण सुर्खियों में रहने वाले मासूम शर्मा हाल ही में अपने एक सवाल के लिए चर्चा में आ गए हैं। मासूम शर्मा हाल ही में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज के दरबार में पहुंचे। जहां उन्होंने मीट खाने के सिलसिले में सवाल किया और उनका ये सवाल पाप-पुण्य तक पहुंच गया। वहीं अनिरुद्धाचार्य महाराज ने भी मासूम शर्मा की हर बात का जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह भी पढ़ें: 'मैं धमकी से परेशान हूं' देहरादून में हुए विवाद पर हरियाणवी सिंगर Masoom Sharma ने तोड़ी चुप्पी
मासूम शर्मा (Masoom Sharma) ने अपने बेटे को दी हुई सीख के सिलसिले में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज से सवाल किया। उन्होंने कहा, "मैंने अपने बेटे को सिखाया है कि मांस खाना गलत है। लेकिन मैं जब युरोप के कई देशों में घूमकर आया तो वहां मैंने देखा कि माता-पिता अपने बच्चों को मांस खाने से नहीं रोकते। अगर वहां के बच्चे मांस खाते हैं तो क्या उन्हें पाप लगेगा? क्या इसमें उनकी कोई गलती है? क्योंकि उन्हें बचपन से यही सिखाया गया है।" इसपर अनिरुद्धाचार्य ने जवाब देते हुए भारतीय संस्कृति और पाश्चात्य संस्कृति का फर्क साझा किया। यह भी पढ़ें: Haryanvi Songs Ban Controversy: अमन गिल ने मासूम शर्मा को बताया गुरु तुल्य, गाने बैन होने पर सरकार से की रिक्वेस्ट
अनिरुद्धाचार्य महाराज (Aniruddhacharya) ने कहा, "विदेशों में भारतीय संस्करती और संस्कार नहीं हैं। संस्कार केवल भारत में ही हैं और मांसाहार की तुलना दुनिया से नहीं करनी चाहिए।" अनिरुद्धाचार्य महाराज ने उदारण देते हुए मासूम शर्मा से सवाल किया कि शेर भी मांस खाता है और कुत्ता भी, ऐसा क्यों? इसपर हरियाणवी सिंगर ने कहा कि उनकी प्रवृत्ति यही है। वहीं अनिरुद्धाचार्य ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "अमेरिका, लंदन जैसे देशों में पहले खाने के ज्यादा विकल्प नहीं थे। उनका इतिहास उठाकर देखिये, वहां शाकाहार के विकल्प बहुत सीमित हैं।" लेकिन इस बात पर मासूम शर्मा ने पूछा कि पहले नहीं थे, लेकिन अब तो हैं? वहीं अनिरुद्धाचार्य ने आगे कहा, "जब पहले से ही वहां मांस खाने की परंपरा बन गई है तो वही आगे भी चलती रही। अगर किसी को धीरे-धीरे सात्विक भोजन दिया जाए तो वो उसे अपनाने लगेगा।"

फोटो क्रेडिट- यूट्यूब
अनिरुद्धाचार्य महाराज (Aniruddhacharya) ने कहा कि भारत के पास छप्पन भोग के विकल्प हैं। उन्होंने कहा, "जहां विकल्प नहीं है, वहां मांस खाया जाता है। लेकिन हमारे पास इतने विकल्प हैं तो हम मांस क्यों खाएं?" बता दें कि मासूम शर्मा ने अनिरुद्धाचार्य के आश्रम में मौजूद वृद्ध महिलाओं से मिलकर उनका आशीर्वाद भी लिया।
