Sharda Sinha Death: लोकगायिका शारदा सिन्हा का निधन हो गया है। उन्होंने 72 साल की उम्र में मंगलवार रात 9 बजकर 20 मिनट पर अंतिम सांस ली। लंबे समय से शारदा सिन्हा बीमार चल रही थी। सोमवार की रात उन्हें वेंटीलेटर पर शिफ्ट किया गया था, लेकिन उन्होंने आज दुनिया को अलविदा बोल दिया है। इस खबर को सुनकर सोशल मीडिया पर सन्नाटा छा गया है और लोगों गहरा झटका लगा है।
कुछ दिनों से उनका एम्स में इलाज चल रहा था, लेकिन आज रात 9 बजकर 20 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। वही सोशल मीडिया पर लोग लगातार दुख प्रकट कर रहे हैं। लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने कहा-'छठ का पर्याय ही हैं बिहार कोकिला हैं' वही एक यूजर ने कहा-'आपकी आवाज हमेशा हम सबके बीच रहेगी'। दूसरे ने कहा-'आपकी आवाज के सब कायल है शारदा जी'। तीसरे ने कहा-दुखद समाचार। चौथे ने कहा-बेहद दुःखद खबर। पांचवें ने कहा-छठ का महापर्व है और हर घर-हर घाट पर शारदा सिन्हा जी का मधुर स्वर गूंज रहा है, लेकिन मन द्रवित है, क्योंकि वही स्वर आज हमेशा के लिए समाप्त हो गया है। यह अजीब संयोग है कि छठ पर्व की पहचान ही जिनके गीतों से थी, आज वो छठ पर्व के पहले ही दिन अंतिम सांस ली।
'उग हो सुरुज देव' से मिली थी पहचान
शारदा सिन्हा का जन्म 1 अक्टूबर 1952 को सुपौल में हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार उनके पिता सुखदेव ठाकुर शिक्षा विभाग में अधिकारी थे। शारदा सिन्हा को पहचान भोजपुरी गीत से मिली थी। उन्होंने पहली बार 1974 में भोजपुरी गीत गाया था। लोगों ने उनका छठ गीत 'उग हो सुरुज देव' को बहुत पसंद किया था। बता दें शारदा सिन्हा ने इस गीत को 1978 में गाया था। सभी छठ के दौरान ये गाना सुनते हैं। शारदा सिन्हा ने बॉलीवुड में भी गाना गया था। उनके गाने 'कहे तोसे सजना तोहरे सजनिया' को लोगों का बहुत प्यार मिला था।
