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Nida Fazli Birthday: 'बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो...', ये हैं निदा फाजली के बेहतरीन शेर

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  • Updated Oct 12, 2022, 07:41 AM IST

Nida Fazli Birthday: उर्दू और हिन्दी के अजीम शायर निदा फाजली का आज (12 अक्‍टूबर) को जन्‍मदिन है। उन्‍हें साहित्‍य अकादमी से लेकर कई राज्‍यों की हिंदी और ऊर्दू अकादमी के पुरस्‍कार मिले।

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Nida Fazli Birthday: 'बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो...', ये हैं निदा फाजली के बेहतरीन शेर

Nida Fazli Birthday: उर्दू और हिन्दी के अजीम शायर निदा फाजली का आज (12 अक्‍टूबर) को जन्‍मदिन है। आज ही के दिन साल 1938 में ग्‍वालियर में उनका जन्‍म हुआ था। उन्होंने ग्वालियर कॉलेज (विक्टोरिया कॉलेज या लक्ष्मीबाई कॉलेज) से स्नातकोत्तर पढ़ाई पूरी करी। उनका पूरा नाम मुक़्तदा हसन निदा फ़ाज़ली है। शायरी की विरासत उन्हें घर से ही मिली क्योंकि पिता भी स्वयं शायर थे। उन्‍होंने हिंदी फ‍िल्‍मों के लिए गीत भी लिखे। सबसे पहले उन्‍होंने फ‍िल्‍म रजिया सुल्‍तान के लिए गाने लिखे। ये दोनों गीत थे- तेरा हिज्र मेरा नसीब है, तेरा गम मेरी हयात है एवं आई ज़ंजीर की झन्कार, ख़ुदा ख़ैर कर।

निदा फाजली को लोगों ने खूब प्‍यार दिया और अपने दिलों में बिठाया। निदा फाजली के शेर और गजल आज भी लोग गुनगुनाते हैं। उनका नाम हिंदुस्‍तान के शीर्ष शायरों में लिया जाता है। उन्‍हें साहित्‍य अकादमी से लेकर कई राज्‍यों की हिंदी और ऊर्दू अकादमी के पुरस्‍कार मिले। साल 2003 में उन्‍होंने भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाजा। 8 फरवरी 2016 को मुंबई में उनका निधन हो गया था।

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता

कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता

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किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं

तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो

कुछ लोग यूँही शहर में हम से भी ख़फ़ा हैं

हर एक से अपनी भी तबीअ'त नहीं मिलती

घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें

किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए।

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बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो

चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएँगे

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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो

ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो

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ये काटे से नहीं कटते ये बाँटे से नहीं बटते

नदी के पानियों के सामने आरी कटारी क्या

ये शहर है कि नुमाइश लगी हुई है कोई

जो आदमी भी मिला बन के इश्तिहार मिला

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दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है

मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है

नक़्शा उठा के कोई नया शहर ढूँढिए

इस शहर में तो सब से मुलाक़ात हो गई

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हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी

जिस को भी देखना हो कई बार देखना

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कुलदीप राघव
कुलदीप राघवauthor

कुलदीप राघव प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक अनुभव का रखने वाले पत्रकार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वह एजुकेशन सेक्शन को लीड कर रहे हैं। एजुकेशन सेक्टर की गहरी समझ और लगातार फील्ड-ओरिएंटेड रिपोर्टिंग के कारण कुलदीप इस बीट के भरोसेमंद पत्रकारों में गिने जाते हैं। वे स्कूल और उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, एडमिशन और काउंसलिंग प्रोसेस, स्कॉलरशिप, करियर गाइडेंस, जॉब अलर्ट, स्किल डेवलपमेंट और युवाओं से जुड़े सामाजिक-शैक्षणिक मुद्दों पर तथ्यात्मक और आसान भाषा में खबरें पब्लिश करते हैं। कुलदीप ने अब तक 18,000 से अधिक बाइलाइन स्टोरीज लिखी हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, विश्लेषण, डेटा आधारित रिपोर्ट्स और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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