Tandav 1st Episode Review: प्रधानमंत्री बनने के लिए हो रहा तांडव, चालाक राजनेता बन सैफ अली खान मार ले गए बाजी

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 15, 2021, 02:02 PM IST

Tandav Episode First Review: सैफ अली खान, डिंपल कपाड़िया, सुनील ग्रोवर और तिग्मांशु धूलिया की वेब सीरीज तांडव रिलीज हो गई है। जानें कैसी है अली अब्बास जफर की ये पहली वेब सीरीज...

Tandav 1st Episode Review: प्रधानमंत्री बनने के लिए हो रहा तांडव, चालाक राजनेता बन सैफ अली खान मार ले गए बाजी

एक था टाइगर, टाइगर जिंदा है, भारत और अन्य फिल्मों से पहचान बना चुके फिल्म मेकर अली अब्बास जफर ने अब डिजीटल डेब्यू किया है। तांडव में सैफ अली खान, डिंपल कपाड़िया, सुनील ग्रोवर, तिग्मांशु धूलिया, कुमुद मिश्रा, सारा जेन डायस लीड रोल में हैं ये सीरीज आज ही रिलीज हुई है। बॉलीवुड में वैसे तो पिछले कई साल से दर्शक राजनीतिक ड्रामा बेस्ड फिल्में देखते आ रहे हैं। जैसे रजनीति, सरकार, आरक्षण, सत्याग्रह, और अब तांडव भी इसी राजनीतिक ड्रामा लिस्ट में शुमार हो गई है। तो चलिए तांडव की रिलीज पर जानते हैं कैसी है अली अब्बास जफर की ये वेब सीरीज...

राजनीति के दांव पेच से भरी है तांडव की कहानी
कहानी की बात करें तो ये दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की राजधानी दिल्ली में तांडव स्थापित किया गया है। यह एक ऐसी कहानी है जो आपको सत्ता के अराजक दरवाजों के अंदर ले जाती है और भारतीय राजनीति की सबसे गहरे सीक्रेट्स को खोलती है। अली अब्बास जफर की तांडव की पहले एपिसोड की शुरुआत सुनील ग्रोवर की जबरदस्त एंट्री से होती है, जो गुरपाल चौहान की भूमिका निभा रहे हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, ग्रेटर नोएडा में हो रहे मलकपुर में किसानों के विरोध प्रदर्शन से परिचित कराया जाता है। जिस स्थान पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं वहां पहुंचने पर, गुरपाल ने दो पुलिस अधिकारियों को तीन आदमियों को मारने और शाम से पहले साइट को साफ करने का आदेश दिया।

गुरपाल के आदेशानुसार, पुलिस अधिकारी तीन लोगों की हत्या करके इस सौदे को सील कर देते हैं। अगले दिन दर्शकों को चालाक राजनेता समर प्रताप सिंह (सैफ अली खान) से मिलवाया जाता है, जो देवकी निवास (उनके पिता के नाम पर) में हजारों लोगों की इकट्ठा भीड़ से मिलते हैं। तभी गोपाल दास (कुमुद मिश्रा) के साथ बातचीत करते हुए, देवकी (तिग्मांशु धूलिया) कहते हैं कि देश के नेता के रूप में उन्होंने कभी देश को विभाजित करने का इरादा नहीं किया। लेकिन उन्हें लगता है कि अगर उनका बेटा (समर) भारत का पीएम बन जाता है, तो वह निश्चित रूप से प्रयास करेंगा सबसे बड़े लोकतंत्र को विभाजित करें।

कौन बनेगा भारत का प्रधानमंत्री?
गुरपाल आकर समर को बताता है कि हत्याएं मलकपुर में की गई हैं। हालांकि, जब देवकी अपने बेटे से खून के बारे में पूछता है, तो समर ऐसे रिएक्ट करता है जैसे उसे मलकपुर में हुई हत्याओं के बारे में कुछ पता नहीं है। देवकी तब उसे आश्वासन देता है कि मामला जल्द ही बंद हो जाएगा। चुनाव के परिणाम आने में कुछ दिन पहले, समर को विश्वास होता है कि वो ही चुनाव जीतेंगे। समर एक लीडिंग समाचार चैनल को साक्षात्कार देने वाला है और यहीं से उसका डर्टी गेम शुरू होगा। 

रघु किशोर (परेश पाहुजा) तांडव में अनुराधा किशोर (डिंपल कपाड़िया) के बेटे का रोल निभा रहे है। जो कि समर द्वारा बिछाए गए जाल में फंस जाते है और वो देवकी के इरादों पर शक करता है। हालांकि, देवकी उसे और अनुराधा को आश्वासन देता है कि वो केवल रघु को ही देश का अगला रक्षा मंत्री बनेएगा। बहुत कम लोग जानते हैं कि समर ने आगे क्या प्लान बनाया है और यहीं कहानी का टर्निंग ट्विस्ट आता है। जो कि किसी ने भी नहीं सोचा होता है। तब सवाल उठता है कि भारत का पीएम कौन बनेगा? समर प्रताप सिंह, देवकी या अनुराधा किशोर? जवाब तांडव की कहानी में आगे है।

जबरदस्त है सभी कलाकारों की एक्टिंग
परफॉर्मेंस की बात करें तो सैफ अली खान ने कमाल की एक्टिंग की है। एक चालाक राजनेता के रूप में अभिनेता सैफ ने शानदार एक्टिंग कर दर्शकों को प्रभावित किया है। अपने हर कदम के साथ, अभिनेता हमें यह जानने के लिए उत्सुक छोड़ देता है कि वह आगे क्या करेगा? सैफ अपने किरदार में जो पैनापन और धार लाते हैं वह दिलचस्प है। देवकी के रूप में तिग्मांशु धूलिया एक बार फिर साबित करते हैं कि वह शानदार अभिनेता हैं। उनकी ऑन-स्क्रीन उपस्थिति इतनी परिपूर्ण है कि कोई भी उनकी कास्टिंग पर संदेह नहीं करेगा, क्योंकि वह सैफ अली खान के पिता हैं। वह अपने किरदार में अपना स्वाभाविक स्पर्श लाते हैं।

जहां तक सुनील ग्रोवर की बात है तो उन्हें गंभीर भूमिका में देखना सुखद है। आमतौर पर सुनील को कॉमिक भूमिकाओं में देखा जाता है लेकिन गुरपाल के रूप में अपने कर्कश स्वर और संवादों को बखूबी पेश करते दिखे हैं। अनुराधा किशोर के रूप में डिंपल कपाड़िया का रोल सादगीपूर्ण रहा। गोपाल दास के रूप में, कुमुद किशोर देवकी के लिए सबसे अच्छे दोस्त की भूमिका निभाते हैं और पूरे मामलों में उसकी तरफ से खड़े दिखते हैं।

गौरव सोलंकी ने तांडव के लेखक के रूप में शानदार काम किया है। अली अब्बास जफर के निर्देशन के लिए उनके द्वारा लिखी गई कहानी दिलचस्प है। अली अब्बास जफर ने साबित कर दिया है कि बड़े परदे पर ही नहीं वो डिजिटल स्पेस में भी माहिर हैं। शो के पहले एपिसोड को देखने के बाद तांडव को 9 एपिसोड की वेब सीरीज में बदलने का उनका फैसला एकदम सही लगता है। कुल मिलाकर देखा जाए तो तांडव एक दिलचस्प सीरीज है।

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