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Jharkhand: क्या बिखर जाएगा INDIA गठबंधन? सीट बंटवारे पर राजद नाराज, पड़ने लगी दरार

Jharkhand Elections: क्या विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA में शामिल पार्टियों के बीच दरार का सिलसिला शुरू हो गया है? ये सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि झारखंड में सीट शेयरिंग को लेकर विवाद शुरू हो गया है। राजद ने कह दिया है कि झारखंड में वो अकेले चुनाव लड़ने पर विचार कर रही है। आखिर क्या वजह है, आपको समझाते हैं।

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झारखंड में इंडिया गठबंधन का क्या होगा?

Internal War in Opposition Parties Alliance INDIA: झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए झामुमो और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर हुए समझौते पर निराशा व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने रविवार को कहा कि 12 से कम सीट उसे स्वीकार्य नहीं होगा और अगर अकेले चुनावी मैदान में उतरना पड़ा, तो उस स्थिति में भी वह ‘इंडिया’ गठबंधन को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।

कितनी सीटों की मांग कर रही है राजद?

राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों ने ‘इंडिया’ गठबंधन बनाया है, जिसमें कांग्रेस, राजद और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) भी घटक हैं। झामुमो और कांग्रेस ने शनिवार को घोषणा की कि दोनों दल राज्य की 81 विधानसभा सीट में से 70 पर चुनाव लड़ेंगे।

राजद प्रवक्ता मनोज कुमार झा ने कहा, '12-13 सीट से कम हमें स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि राजद की 18-20 सीट पर मजबूत पकड़ है। अगर हमें तीन-चार सीट पर चुनाव लड़ने के लिए कहा जाता है, तो हम कोई त्याग करने के लिए तैयार नहीं हैं।' उन्होंने कहा, 'हमारा एकमात्र उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)को हराना है, हम ‘इंडिया’ गठबंधन को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।'

60-62 सीट पर समर्थन देने की कही बात

राज्यसभा सदस्य झा ने कहा कि यदि पार्टी अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय भी लेती है, तो भी वह 60-62 सीट पर ‘इंडिया’ गठबंधन के उम्मीदवारों को अपना समर्थन देगी। राजद ने 2019 के विधानसभा चुनाव में सात सीट पर चुनाव लड़ा था और एक सीट पर जीत हासिल की थी। पार्टी के विधायक सत्यानंद भोक्ता हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल में मंत्री हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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