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दिल्ली पुलिस ने पत्रकारों को हिरासत में लिया, तो पंजाब विधानसभा के प्रेस गैलरी समिति ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखी चिट्ठी

Delhi Election: चिट्ठी में लिखा गया कि 5 पत्रकारों को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लेते हुए नाजायज रूप से रात भर तुगलक पुलिस थाने में रखा गया। जिसमें पंजाब विधानसभा प्रेस गैलरी कमेटी एक माननीय सदस्य पत्रकार भी शामिल है। आपको बताते हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे इस पत्र में और क्या कुछ कहा गया है।

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पंजाब विधानसभा की प्रेस गैलरी समिति ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा।

Election News: पंजाब विधानसभा की प्रेस गैलरी समिति ने दिल्ली पुलिस द्वारा पत्रकारों को हिरासत में लेने के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा। इस चिट्ठी का विषय 'दिल्ली पुलिस की धक्केशाही व पत्रकारों को हिरासत में लेने की शिकायत' है। पंजाब विधानसभा के प्रेस गैलरी कमेटी के अध्यक्ष अश्वनी चावला ने अपने इस चिट्ठी में क्या कुछ लिखा नीचे पढ़िए।

'मुख्य चुनाव कमिश्नर

इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया दिल्ली।

विषय : दिल्ली पुलिस की धक्केशाही व पत्रकारों को हिरासत में लेने की शिकायत ।

श्रीमान जी,

आपको जानकर हैरानी होगी कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम जनता और पत्रकारों को सुरक्षा मुहैया करवाने की जिम्मेवारी लेने वाली दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मचारी व अधिकारी ही सरेआम धक्केशाही करने में लगे हुए हैं। पंजाब के मीडिया आर्गेनाइजेशन की तरफ से हमेशा ही देश के अन्य राज्यों में होने वाले चुनाव को कवर करने के लिए मीडिया कर्मचारियों को भेजा जाता है क्योंकि वहां की चुनाव की जानकारी पंजाब के पाठकों व जनता तक पहुंच सके।

पंजाब के दो दर्जन के करीब पत्रकार आधिकारिक रूप से ड्यूटी पर दिल्ली चुनाव को कवर रहे हैं। दिल्ली से हमें पत्रकारों द्वारा जानकारी दी गई है कि शनिवार को दिल्ली चुनाव को कवर रहे कुछ पत्रकारों को जानकारी मिली कि चुनावी प्रक्रिया को धूमिल करने की कोशिश में कुछ लोग शराब व अन्य सामग्री बाटने में लगे हुए हैं। जब इन पत्रकारों द्वारा उसे गलत कार्रवाई को कवर किया जा रहा था तो राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं की तरफ से पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार किया गया, इस पर पत्रकारों द्वारा दिल्ली पुलिस को फोन करते हुए मदद मांगी गई। पत्रकारों को उम्मीद थी कि दिल्ली पुलिस के आने के पश्चात उन्हें सुरक्षा मिल जाएगी परंतु इसके उलट दिल्ली पुलिस द्वारा ही उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाने लगा। इस दौरान 5 पत्रकारों को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लेते हुए नाजायज रूप से रात भर तुगलक पुलिस थाने में रखा गया। जिसमें पंजाब विधानसभा प्रेस गैलरी कमेटी एक माननीय सदस्य पत्रकार भी शामिल है।

दिल्ली तुगलक पुलिस थाने की कार्यवाही का पंजाब विधानसभा की प्रेस गैलरी कमेटी की तरफ से निंदा करते हुए विरोध किया जा रहा है और आपसे निवेदन है कि इस मामले में कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को आदेश दिए जाएं कि वह भविष्य में ऐसी कोई भी गलत कार्रवाई न करें और जिन पुलिस कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार किया गया है और नाजायज हिरासत में रखा गया है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।'

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर रहे पंजाब के पत्रकारों को दिल्ली पुलिस ने तुगलक रोड पुलिस थाने में अवैध रूप से आठ घंटे तक हिरासत में रखा। इसी के बाद पंजाब विधानसभा की प्रेस गैलरी कमेटी ने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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